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मैगी प्रतिबंध: नेस्ले का आरोप, उसके साथ भेद-भाव किया जा रहा है

नेस्ले इंडिया लिमिटेड ने पक्षपात का आरोप लगाते हुए शीर्ष उपभोक्ता आयोग के समक्ष कहा कि मैगी नूडल्स प्रतिबंध मामले में सरकार उसके साथ भेद-भाव कर रहा है क्योंकि इसी प्रकार के उत्पादों के लिए अन्य विनिर्माताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई.

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नेस्ले इंडिया लिमिटेड ने पक्षपात का आरोप लगाया
नेस्ले इंडिया लिमिटेड ने पक्षपात का आरोप लगाया

नेस्ले इंडिया लिमिटेड ने पक्षपात का आरोप लगाते हुए शीर्ष उपभोक्ता आयोग के समक्ष कहा कि मैगी नूडल्स प्रतिबंध मामले में सरकार उसके साथ भेद-भाव कर रहा है क्योंकि इसी प्रकार के उत्पादों के लिए अन्य विनिर्माताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई.

को खारिज करने के बंबई उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कंपनी ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग (एनसीडीआरसी) से अपने पूर्व के उस आदेश को वापस लिए जाने का अनुरोध किया जिसके तहत उसने कंपनी के खिलाफ सरकार के 640 करोड़ रुपये के दावे को सुनवाई के लिए स्वीकार किया है. यह दावा कारोबार में अनुचित व्यापार व्यवहार और अन्य आरोपों को लेकर दर्ज कराया गया है.

न्यायाधीश वी के जैन की अध्यक्षता वाली आयोग की पीठ ने कंपनी के आवेदन पर सरकार को नोटिस जारी किया और आठ अक्तूबर तक इस पर जवाब दाखिल करने को कहा है. साथ ही सरकार की एक अन्य याचिका पर दिया जिसमें मैगी नूडल्स के फिर से परीक्षण की अनुमति देने का अनुरोध किया गया है.

कंपनी की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद निगम ने सरकार द्वारा दायर मुकदमे का विरोध करते हुए कहा कि इस प्रतिबंध के कारण करीब 9000 विक्रेता और 10,000 आपूर्तिकर्ता बेरोजगार हुए हैं और उसे करीब 250 करोड़ रपये का नुकसान हुआ.

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उन्होंने कहा, इससे कंपनी की साख को काफी नुकसान पहुंचा है. एक तरफ जहां मेरे है, सरकार इसी प्रकार के उत्पाद बनाने वाली कंपनियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही. मेरे साथ भेद-भाव किया जा रहा है. 'सरकार के दावे पर एनसीडीआरसी ने 17 अगस्त को कंपनी नोटिस जारी किया था. कंपनी को इसका आज जवाब देना था.

हालांकि कंपनी नोटिस का जवाब नहीं दे पाई. उसने दावा किया कि उसे सरकार से पूरा दस्तावेज नहीं मिला है. आयोग ने अब कंपनी को भी आठ अक्तूबर तक जवाब देने को कहा है.

-इनपुट भाषा

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