कैग ने हाल ही में रिपोर्ट जारी की थी कि रेलवे का खाना खाने लायक नहीं है. जिस पर काफी बवाल मचा था. अब मंगलवार को दिल्ली से कोलकाता आ रही पूर्वा एक्सप्रेस में यात्री के एक खाने में छिपकली मिली. इसके बाद यात्री ने सुरेश मंत्री को टैग कर फोटो ट्वीट भी किया. मीडिया रिपोर्टस की मानें, तो यात्री ने खाने में वेज बिरयानी ऑर्डर की थी. रेलवे ने इसके बाद 48 घंटे का नोटिस दिया था, जिसके बाद पूर्वा एक्सप्रेस के केटरिंग कॉन्ट्रेक्ट से बर्खास्त कर दिया है. 2016 में इनपर 10 लाख का जुर्माना लगा था, 2017 में 7.5 लाख रुपये का जिसके बाद अब बर्खास्त कर दिया गया है.
Chandauli (UP): Lizard found in food served to a passenger on-board Poorva Express; passenger had complained to Railway Minister on Twitter
— ANI UP (@ANINewsUP)
2/ Catering Contract of Poorva Ex has been given to R K Associates on 15th may 2014 for 5 Yrs
— Ministry of Railways (@RailMinIndia)
रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने इस मामले पर लोकसभा में बयान दिया और कहा कि दोषी ठेकेदार को हटा दिया गया है. जल्द ही सरकार रेलवे के लिए नई कैटरिंग पॉलिसी लाएगी.3/ Last year in 2016 ,10 Lakh fine imposed and this year 2017,fine of 7.5 Lakh imposed & now 48 hr termination notice has been issued
— Ministry of Railways (@RailMinIndia)
आपको बता दें कि नियंत्रक एवं लेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. भारतीय रेलवे की कैटरिंग सर्विस पर कैग की ऑडिट रिपोर्ट शुक्रवार को संसद में रखी जानी है. रिपोर्ट में बताया गया है कि रेलवे स्टेशनों पर जो खाने-पीने की चीजें परोसी जा रही हैं, वो इंसानी इस्तेमाल के लायक ही नहीं हैं. रिपोर्ट के मुताबिक पर परोसी जा रही चीजें प्रदूषित हैं. डिब्बाबंद और बोतलबंद चीजों को एक्सपायरी डेट के बावजूद बेचा जा रहा है.
सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि ठेके बांटने के दौरान भी घोटाला किया गया. यहां तक कि खाने को गंदगी से बचाने के लिए कवर करने से स्टाफ आंखे मूंदे रहा. अब रेलवे के अधिकारी एक्शन की दुहाई दे रहे हैं. जांच में यह भी पाया गया कि रेलवे परिसर और ट्रेनों में साफ-सफाई का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जा रहा.
इसके अलावा ट्रेन में बिक रही चीजों के बिल न दिए जाने और फूड क्वॉलिटी में कई तरह की खामियों की भी शिकायतें हैं. सीएजी और रेलवे की ज्वाइंट टीम ने 74 स्टेशनों और 80 ट्रेनों का मुआयना करने के बाद इस रिपोर्ट को तैयार किया है. कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि रेल में यात्रियों को दी जा रही खाद्य वस्तुओं के संबंध में ठेकेदारों ने कीमतों के साथ समझौता किया और गुणवत्ता मानकों पर ध्यान नहीं दिया.