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जस्टिस चेलमेश्वर की CJI को चिट्ठी, कार्यपालिका के दबाव पर फुल कोर्ट मीटिंग बुलाने की मांग

जस्टिस चेलमेश्वर की इस चिट्ठी पर न्यायपालिका के गलियारों में खासी चर्चा है. कहा तो यहां तक जा रहा है कि कायदे से न्यायपालिका की स्वायत्तता को लेकर कार्यपालिका की दखलंदाजी पर विरोध चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को दर्ज कराना चाहिए था.  

 जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर (फाइल फोटो) जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा आजकल दोहरे हमले झेल रहे हैं. न्यायपालिका के भीतर से भी और विपक्षी राजनीतिक दलों की ओर से भी.

एक ओर राजनीतिक दल जस्टिस मिश्रा पर महाभियोग चलाने की बात कह रहे हैं तो दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के बाद वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर ने एक और चिट्ठी लिखकर मुख्य न्यायाधीश से कहा है कि वो न्यायपालिका के काम में कार्यपालिका के दबाव पर फुल कोर्ट मीटिंग बुलाएं क्योंकि न्यायपालिका के कॉलेजियम सिस्टम को नजरअंदाज कर कार्यपालिका का सीधे हाईकोर्ट के जज से किसी भी तरह का संवाद करना कतई उचित नहीं है.

जस्टिस चेलमेश्वर की इस चिट्ठी पर न्यायपालिका के गलियारों में खासी चर्चा है. कहा तो यहां तक जा रहा है कि कायदे से न्यायपालिका की स्वायत्तता को लेकर कार्यपालिका की दखलंदाजी पर विरोध चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को दर्ज कराना चाहिए था.   

दरअसल जस्टिस चेलमेश्वर प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले और बाद में भी कई बार मुख्य न्यायाधीश को चिट्ठी लिखकर उनकी कार्यशैली पर कानूनी और संवैधानिक सवाल उठा चुके हैं. अबकी बार उन्होंने कर्नाटक के जिला और सत्र न्यायाधीश पी कृष्णा भट्ट के खिलाफ फिर से जांच शुरू कराने को मुद्दा बनाया है.

जस्टिस चेलमेश्वर का आरोप है कि मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मिश्रा ने केंद्र सरकार के कहने पर दबाव में आकर दोबारा जांच कराने के निर्देश कर्नाटक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस दिनेश माहेश्वरी को दिए हैं. वरना सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की सिफारिश के बाद हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस का अपने मन से फिर से जांच शुरू करने का कोई तुक नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों को भेजी गई 5 पन्नों की चिट्ठी में जस्टिस चेलमेश्वर ने लिखा है कि तब जबकि सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम अगस्त और नवंबर 2016 में दो बार भट्ट को कर्नाटक हाईकोर्ट का जज नियुक्त करने की सिफारिश कर चुका है.

जब-जब सिफारिश सरकार तक पहुंचती है भट्ट के साथ काम कर चुकी एक महिला न्यायिक अधिकारी के आरोपों की फेहरिस्त भट्ट के खिलाफ खड़ी मिलती है. सरकार ने पिछली बार भी जब जज भट्ट को जस्टिस बनाने की कोजियम की सिफारिश वापस भेजी थी तब के CJI जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर ने जस्टिस माहेश्वरी से पहले चीफ जस्टिस रहे न्यायमूर्ति शुभ्र कमल मुखर्जी से जांच कराई थी. तब जज भट्ट को क्लीनचिट मिली थी.

दरअसल जज भट्ट के खिलाफ एक महिला ज्यूडिशियल अधिकारी ने प्रताड़ना के आरोप लगाए थे. जस्टिस मुखर्जी की क्लीन चिट के बाद जब जब भट्ट के हाईकोर्ट जज बनने की फाइल आगे बढ़ती है सुप्रीम कोर्ट और सरकार तक उन महिला अधिकारी की चिट्ठियां पहुंचना शुरू हो जाती हैं.

जस्टिस चेलमेश्वर की चिट्ठी पर चर्चा के साथ ही संसद के गलियारों में कुछ विपक्षी दलों के नेता गुपचुप तो कुछ के खुलेआम बातें कर रहे हैं कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर दस्तखत करने वाले सांसदों की तादाद धीरे-धीरे बढ़ रही है, यानी संकट तब और बढ़ जाता है जब मुकाबला एक साथ दो मोर्चों पर हो.

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