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ISPR चीफ ने जज्बाती रूट का लिया सहारा, कहा- 'सैनिकों का हताहत होना आंकड़ों का मामला नहीं'

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के बाद पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता बैकफुट पर है. प्रवक्ता की ओर से दबे शब्दों में जो कहा जा रहा है वो एक तरह से इंडिया टुडे की रिपोर्ट के तथ्यों पर ही मुहर लगा रहा है. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता का कहना है कि उनके लिए जवानों का हताहत होना आंकड़ों का मामला नहीं है.

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पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर

  • इंडिया टुडे की रिपोर्ट से बैकफुट पर पाक मिलिट्री प्रोपेगेंडा प्लेटफॉर्म
  • शहीदों की कुरबानी देने वाले इस्लाम के सिद्धांत के मुताबिक वो हमारे लिए जीवित

इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) का कच्चा चिट्ठा खुलने के बाद अब पाकिस्तानी सेना कह रही है कि उनके लिए सैनिकों की कुर्बानी महज एक आंकड़ा नहीं है. दरअसल इंडिया टुडे ओपन-सोर्स इंवेस्टीगेशन ने अपनी रिपोर्ट में तथ्यों के साथ खुलासा किया था कि किस तरह पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर होने वालीं अपने ही जवानों की मौत पर पर्दा डालता रहा.  

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के बाद पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता बैकफुट पर हैं. प्रवक्ता की ओर से दबे शब्दों में जो कहा जा रहा है वो एक तरह से इंडिया टुडे की रिपोर्ट के तथ्यों पर ही मुहर लगा रहा है. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता का कहना है कि उनके लिए जवानों का हताहत होना आंकड़ों का मामला नहीं है.

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रावलपिंडी में बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने कहा, 'ये आंकड़ों का मामला नहीं है. अगर 20-25 हजार लोगों ने पाकिस्तान के लिए कुर्बानी दी है तो ये सिर्फ आंकड़ों से ही नहीं जुड़ा है, ये मानवता के बारे में है. इस्लाम के सिद्धांत के मुताबिक वो हमारे लिए जीवित हैं.' पाकिस्तानी सैनिकों की मौत की संख्या को छुपाने से जुड़े सवाल पर सीधा जवाब देने की बजाय ISPR के डायरेक्टर जनरल गफ़ूर ने जज्बाती रूट का सहारा लेकर पर्दा डालने की कोशिश की.

मेजर जनरल गफ़ूर ने कहा, टइन लोगों (पाकिस्तानी सैनिकों) ने हमारे लिए अपनी जान कुर्बान की. वो अपने परिवार यहां पीछे छोड़ गए. उनके यहां माता-पिता हैं, बच्चे हैं. मैं हर पाकिस्तानी से अपील करता हूं कि वे अपने अपने क्षेत्रों में इन शहीदों के परिवारों तक पहुंचे. साथ ही शहीदों को याद रखने के लिए उनकी तस्वीरें लगाएं.'  गफ़ूर ने कहा, 'पाकिस्तानी सेना हर साल 6 सितंबर को 'शहीद दिन' मनाती है और उन शहीदों की कुरबानी व्यर्थ जाएगी अगर पाकिस्तानी नागरिक उनके घरों तक नहीं जाते हैं.'   

हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद किसी भी पत्रकार ने इंडिया टुडे की रिपोर्ट के बारे में सवाल नहीं किया था लेकिन गफ़ूर ने खुद ही सवाल-जवाब का सत्र खत्म होने पर बयान दिया. इससे पहले गफ़ूर ने इंडिया टुडे ब्रॉडकास्ट के लिंक को शेयर करते हुए कहा था कि ये भारतीय मीडिया का 'ISPR' के लिए जुनून है.   

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इंडिया टुडे ओपन-सोर्स इंवेस्टीगेशन ने अपनी रिपोर्ट में पाकिस्तानी सेना के तिथिवार (हिस्टोरिकल) डेटा का हर दिन मीडिया को दी जाने वाली जानकारी से मिलान किया और इनमें आपस में ही काफी अंतर पाया. जांच से सामने आया कि नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी जवानों की मौत हिस्टोरिकल डेटा में तो उल्लेख किया गया लेकिन इसे रोजाना दिए जाने वाले बयानों में छुपाया गया.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के दूसरे हिस्से में क्राउड-सोर्स्ड डेटा के जरिए दिखाया गया कि पाकिस्तानी सेना की ओर से नियंत्रण रेखा पर जुलाई से अगस्त के बीच कई जवान हताहत हुए. लेकिन ISPR ने सार्वजनिक तौर पर इसे कबूल नहीं किया.

ऑब्सर्वर रिसर्च फाउंडेशन के सीनियर फैलो सुशांत सरीन ने इंडिया टुडे के खुलासे पर कहा, 'वो क्यों अपने जवानों की मौतों को सार्वजनिक तौर पर कबूल नहीं करते, इसके पीछे कारण है. अगर वो ऐसा करने लगें तो ये पाकिस्तानी सेना के लिए बड़ी शर्मिंदगी का सबब होगा.

पाकिस्तानी सेना खुद पर अपराजेयता का मुलम्मा चढ़ा हुआ दिखाए रखना चाहती है जबकि असलियत में उसे काफ़ी मुंह की खानी पड़ती है.' सरीन के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने करगिल युद्ध के दौरान भी यही किया था. सरीन ने कहा, 'वो मीडिया तक पर नियंत्रण रखते हैं जिससे कि कुछ लीक ना हो सके.'

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