भारत सहित अन्य एशियाई देशों से आने वाले वकीलों की संभावनाओं को विस्तार देते हुए कनाडा सरकार ने उनकी कानून की डिग्री को मान्यता देने का फैसला किया है. भारतीय कानून की डिग्री इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया के विधि पाठ्यक्रम के समकक्ष मानी जाती है.
नेशनल कमीशन आन एक्रीडिशन (एनएसी) के निवर्तमान कार्यकारी निदेशक वेर्न कृष्ण ने रविवार को कहा एनएसी ने भारत इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया सहित समान विधि देशों में दी जाने वाली तीन वर्षीय पूर्णकालिक कानून की डिग्री को एक समान दर्जा देने का निर्णय किया है. कानूनी पेशे में आने की बाधाओं में यह एक महत्वपूर्ण छूट है.
प्रो. कृष्ण अपनी 27 साल की सेवा के बाद 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले हैं. उन्होंने कहा कि नया फैसला एक मार्च से प्रभावी हो गया था और एक मई 2009 को फिर इसकी समीक्षा की गई. इससे भारत सहित दूसरे देशों के प्रशिक्षित वकीलों के मुख्यधारा में आने का मार्ग प्रशस्त होगा.
प्रो. कृष्णा ने कहा भारत बांग्लादेश इंग्लैंड हांगकांग आयरलैंड न्यूजीलैंड नाइजीरिया पाकिस्तान सिंगापुर अमेरिका वेल्स और वेस्ट इंडीज में दी जाने वाली कानून की डिग्री को एक समान दर्जा दिया गया है.
हालांकि उन्होंने कहा कि इन देशों से आने वाले वकीलों को कनाडा में वकालत के लिए लगभग छह विषयों की परीक्षा में सफलता अर्जित करनी होगी. इसके अलावा उन्हें यहां वकालत करने के लिए बार की परीक्षा भी देनी होगी.
प्रो. कृष्ण ने कहा कि इस परीक्षा से इच्छुक विदेशी वकीलों की कानूनी ज्ञान और उसे व्यवहार में लाने के संबंध में उनकी योज्ञता की जानकारी मिलेगी और इसके बाद ही उन्हें लोक सेवा के लिए अनुमति मिलेगी. उन्होंने कहा कि कनाडा दक्षिण एशिया के वकीलों को बड़े मौके दे रहा है और आने वाले सालों में इन दोनों के बीच निवेश में खासे इजाफे की संभावना है.
एनसी के फैसले का स्वागत करते हुए कनाडा के मानवाधिकार आयोग के पूर्व प्रमुख भाउसाहेब उबाले ने कहा कि इस कदम से हिंदुस्तानी वकीलों की राह की सबसे बड़ी अड़चन दूर हो गई. उन्होंने दूसरे पेशे के लोगों के लिए भी ऐसी ही मांग की.
कनाडा में नागरिकता और आव्रजन मामलों के मंत्री जेसन केनी ने कहा विदेशी प्रमाणपत्रों की स्वीकृति या सही तौर पर कहा जाए तो अस्वीकृति एक ऐसी व्यवस्थागत खामी है जो कनाडा में भी पाई जाती है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने विदेशी पाठ्यक्रमों के लिए आवंटित धन को तीन गुना कर दिया है.
केनी ने कहा हम एक राष्ट्रीय ढांचा बना रहे हैं जो एक साल में तैयार हो जाएगा. साथ ही उन्होंने कहा कि इससे नए लोगों की विश्वसनीयता का शीघ्र मूल्यांकन हो सकेगा और मुख्यधारा की नौकरियों में आने के लिए रास्ता भी बनेगा.