क्या केंद्र सरकार ने वित्तीय संकल्प और जमा बीमा (एफआरडीआई) बिल 2017 को एक बार फिर से संसद में लाने का फैसला किया है? कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स की माने तो केंद्र सरकार का ये बिल फिलहाल संसद के संयुक्त समिति के सामने है और संसद के शीतकालीन सत्र में इसे पास करवाया जाएगा.
इस विवादित बिल का उद्देश्य वित्तीय संस्थानों जैसे कि बैंकों के दिवालिया होने से रोकने के लिए था. लेकिन इस बिल में एक क्लॉज को लेकर खूब विवाद हुआ था जिसके अनुसार अगर बैंक बुरी स्थिति में फंस जाते हैं तो वो जमाकर्ताओं के पैसे का इस्तेमाल भी उन्हें बचाने के लिए किया जा सकता है.
इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज़ वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि इस बिल को अगस्त 2017 में संसद में लाया गया था, लेकिन 2018 में इसे वापस भी ले लिया गया था. वायरल पोस्ट के साथ जो वीडियो है, वो 2017 में भी वायरल हुआ था.

फेसबुक पेज ‘चकिया एक्सप्रेस’ ने 29 सितंबर को एक वीडियो अपलोड करते हुए लिखा, “सावधान, आप हिन्दू मुस्लिम करते रहिये, खाते में जमा आपका सारा पैसे हड़प जाएगी बैंक”. पोस्ट के साथ जो वीडियो है उसमें दावा किया जा रहा है की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी खाता धारकों के पैसों के साथ “रफूचक्कर” हो जाएंगे. और ये कि बड़े उद्योगपति जो मोदी के दोस्त हैं, वो अगर अपने लोन को नहीं चुकाएंगे तो बैंक खाता धारकों के पैसे का इस्तेमाल कर अपने नुकसान की भरपाई करेगी.
इस पोस्ट को स्टोरी के लिखे जाने तक 14,000 से ज्यादा फेसबुक यूज़र्स ने शेयर किया और कमेंट करते वक्त सरकार को काफी भला बुरा कहा है और ये तक कहा कि “बैंक में आग न लगा देंगे”. इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्ज़न यहां देखा जा सकता है.
इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज़ वॉर रूम (AFWA) ने अपनी पड़ताल में पाया कि ये बिल लोकसभा में 10 अगस्त 2017 को लाया गया. इस बिल के तहत सरकार ने ऐसे प्रावधान किए थे कि वित्तीय संस्थानों जैसे कि बैंकों को दिवालिया होने से बचाया जा सके. इस बिल को 2017 में संसद की संयुक्त समिति के सामने रखा गया था जिसकी जानकारी पीआईबी की वेबसाइट से ली जा सकती है.
हालांकि इस बिल में मौजूद एक प्रावधान की वजह से इस बिल का पुरज़ोर विरोध हुआ. इस बिल के तहत ये प्रावधान भी था कि अगर खराब लोन की वजह से बैंक दिवालिया होने की हालत में पहुंच जाते हैं तो खाता धारकों के पैसे का इस्तेमाल भी उन्हें बचाने के लिए किया जा सकता है. लेकिन भारी विरोध की वजह से सरकार को ये बिल वापस लेना पड़ा था. लोकसभा की वेबसाइट पर इस बिल को वापस लिए जाने का ज़िक्र है. हालांकि लोकसभा की वेबसाइट पर 2018 के बाद इस बिल के वापस लाए जाने का कोई ज़िक्र नहीं है.
अपनी पड़ताल में इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज़ वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वायरल हो रहे पोस्ट में जो 2.05 मिनट लंबा वीडियो है, वो इससे पहले 2017 में भी वायरल हुआ था, यानी कि इस बिल के वापस लिए जाने से पहले. जबकि अब वायरल हो रहा वीडियो और पोस्ट ये कहीं नहीं कहता कि ये बिल वापस लिया जा चुका है.
हाल की किसी और खबर में भी एफआरडीआई बिल के वापस से लाए जाने को लेकर कोई बात नहीं कही गई है. ज़ाहिर है कि संसद में इस बिल के अभी वापस लाए जाने वाली बात पूरी तरह से गलत है.