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ओडिशा में जियो-सिंथेटिक ट्यूब वाली समुद्री दीवार बनाने के लिए मिली मंजूरी

उफनते समुद्र की लहरों को रोकने के लिए ओडिशा की पहली जियो-सिंथेटिक ट्यूब वाली समुद्री दीवार बनाने के लिए मंजूरी दे दी गई है. यह समुद्री दीवार जियो-सिंथेटिक ट्यूब सी वॉल परियोजना के तहत बनाई जा रही है. 33 करोड़ की लागत की यह परियोजना केंद्रपाड़ा जिले के पेंथा तट पर समुद्र की उफनती लहरों के कारण तटों के कटाव को रोकेगी.

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नवीन पटनायक
नवीन पटनायक

उफनते समुद्र की लहरों को रोकने के लिए ओडिशा की पहली जियो-सिंथेटिक ट्यूब वाली समुद्री दीवार बनाने के लिए मंजूरी दे दी गई है. यह समुद्री दीवार जियो-सिंथेटिक ट्यूब सी वॉल परियोजना के तहत बनाई जा रही है. 33 करोड़ की लागत की यह परियोजना केंद्रपाड़ा जिले के पेंथा तट पर समुद्र की उफनती लहरों के कारण तटों के कटाव को रोकेगी.

समुद्री तटबंधीय विभाग के कार्यकारी अभियंता जुगल किशोर त्रिपाठी ने कहा कि जियो ट्यूब उच्च स्तरीय रेक्सीन से बनती हैं और इनमें रेत भरकर अपरदन प्रभावित पेंथा तटबंध पर रखा जाएगा. रेत से भरे ये रेक्सीन बैग तूफानी लहरों से रक्षा के लिए एक बाधा के रूप में काम करेंगे.

उन्होंने कहा कि इस परियोजना का ठेका पुणे की गारवाड़े वॉल रोप्स लिमिटेड को दिया गया है. इसका काम जल्दी ही शुरू कर दिया जाएगा और यह दीवार अक्तूबर 2014 तक पूरी हो जाएगी.

विश्व बैंक के अनुदान से संचालित कार्यक्रम ‘समग्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन कार्यक्रम’ के तहत आने वाली इस परियोजना में काफी देरी हो चुकी है. यह परियोजना केंद्रपाड़ा जिले के राजनगर खंड में असुरक्षित गांवों को तटों के कटाव से बचाएगी. अधिकारियों ने कहा कि 15 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना की नींव मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 2008 में रखी थी. योजना में तकनीकी बदलाव और वैश्विक निविदा में देरी के कारण इस परियोजना में देरी हुई.

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आईआईटी चेन्नई पहले ही समुद्री तट का वैज्ञानिक और जमीन से जुड़ा अध्ययन करने के बाद इस परियोजना को हरी झंडी दे चुका है. आईआईटी चेन्नई के तकनीकी अध्ययन के नतीजों को राज्य के जलसंसाधन विभाग द्वारा पुन: जांचा गया. इसके बाद यह ठेका पुणे की कंपनी को दिया गया. परियोजना का काम पंद्रह दिन के भीतर शुरू कर दिया जाएगा.’ उन्होंने कहा कि जियो-ट्यूब वाली समुद्री दीवार के इस तटबंध की उंचाई 7.4 मीटर तक होगी.

समुद्री तूफान के वक्त लहरों की उंचाई पांच मीटर तक चली जाती है. इस तरह ये तूफानी लहरों का सामना कर सकती है. तटबंध की लंबाई 675 मीटर होगी. इस तटबंध का आधार तीन मीटर तक गहरा होगा. जियो सिंथेटिक ट्यूब पराबंगनी किरणों और ज्वारभाटा में उठने वाली लहरों की गति का प्रभाव झेलने में सक्षम होगी.

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