उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और यूपी पुलिस लाख दावा कर ले कि राज्य में लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति सुधरी है लेकिन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की रिपोर्ट इसके उलट है. उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यकों और दलितों के शोषण का केंद्र बना हुआ है. पिछले तीन साल में मानवाधिकार आयोग में अल्पसंख्यकों और दलितों के शोषण के जितने मामले दर्ज हुए हैं, उनमें से 43% सिर्फ उत्तर प्रदेश से हैं. इन मामलों में मॉब लिंचिंग भी शामिल है.
साल 2016 से 2019 (15 जून तक) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पास अल्पसंख्यकों और दलितों के शोषण के कुल 2008 मामले दर्ज हुए हैं. इनमें से 869 मामले सिर्फ उत्तर प्रदेश से ही हैं. हालांकि, इतने मामलों के बावजूद 2016-17 की तुलना में 2018-19 में अल्पसंख्यकों के शोषण से जुड़े मामलों में 54% की कमी आई है. 2016-17 में ऐसे 42 मामले थे जबकि 2018-19 में ये घटकर 19 रह गए.
उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यकों के शोषण के मामले तो कम हुए लेकिन दलितों से जुड़े मामलों में 41% का इजाफा हुआ है. वर्ष 2016-17 में दलितों से जुड़े शोषण के 221 मामले थे जो 2018-19 में बढ़कर 311 हो गए. ये जानकारी 16 जुलाई को लोकसभा में पेश एक सवाल के जवाब में मिली.
जानिए...किस राज्य में अल्पसंख्यकों-दलितों के शोषण से जुड़े कितने मामले NHRC में दर्ज हुए
राज्य अल्पसंख्यक दलित
यूपी 70 799
राजस्थान 11 120
हरियाणा 12 94
बिहार 19 78
एमपी 16 72
ओडिशा 05 70
गुजरात 23 65
दिल्ली 16 60
उत्तराखंड 10 48
महाराष्ट्र 15 47
अल्पसंख्यकों के शोषण के मामले कम हो रहे, दलितों पर बढ़ रहे हैं
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के आंकड़ों के माने तो पूरे देश अल्पसंख्यकों से जुड़े शोषण के मामले कम हो रहे हैं लेकिन दलितों पर बढ़ रहे हैं. 2016-17 में पूरे देश में अल्पसंख्यकों से जुड़े शोषण के 117 मामले दर्ज किए गए थे. 2017-18 में ये घटकर 79 हो गए. 2018-19 में अब तक सिर्फ 5 मामले दर्ज किए गए हैं. वहीं, दलितों से जुड़े शोषण के मामलों में कुल 33 फीसदी का इजाफा हुआ है. 2016-17 में 505 मामले दर्ज किए गए थे. जो 2018-19 तक बढ़कर 672 हो गए. यानी हर दिन 2 मामले दर्ज हो रहे हैं. सिर्फ इस साल NHRC दलितों से जुड़े शोषण के 99 मामले दर्ज किए हैं.
अल्पसंख्यकों और दलितों के शोषण से जुड़े मामले ज्यादातर हिंदी भाषी राज्यों में
अल्पसंख्यकों और दलितों के शोषण से जुड़े मामले ज्यादातर हिंदी भाषी राज्यों में ही देखने को मिल रहे हैं. उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, हरियाणा, मध्यप्रदेश में ही अल्पसंख्यकों और दलितों के शोषण से जुड़े 64 फीसदी मामले सामने आए हैं. अगर इनमें दिल्ली, गुजरात और उत्तराखंड भी जोड़ दे तो ये सभी राज्य मिलकर इस आंकड़ें को 75 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा.
वहीं, दक्षिण भारत के पांच राज्य - तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और एक केंद्र शासित राज्य पुड्डूचेरी को मिलाकर देखें तो अल्पसंख्यकों और दलितों के शोषण से जुड़े सिर्फ 9.5 फीसदी मामले ही सामने आए हैं. वहीं, उत्तर-पूर्वी राज्यों में ये आंकड़ा सिर्फ 0.54 फीसदी ही है. पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल और ओडिशा में ऐसे कुल 5.17 मामले दर्ज हुए हैं.