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सुरक्षा एजेंसियों में तालमेल बढ़ेगा: पीएम

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत में बढ़ते घुसपैठ के प्रयासों पर गहरी चिंता जताते हुए आंतरिक सुरक्षा के प्रति खतरों से निपटने के लिए केन्द्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल करने की ज़रूरत बताई.

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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत में बढ़ते घुसपैठ के प्रयासों पर गहरी चिंता जताते हुए आंतरिक सुरक्षा के प्रति खतरों से निपटने के लिए केन्द्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल करने की ज़रूरत बताई.

आंतरिक सुरक्षा पर आयोजित मुख्यमंत्रियों की बैठक में सिंह ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद, सीमा-पार से चलाया जा रहा आंतकवाद, पूर्वोत्तर में विद्रोह तथा साम्प्रदायिक तथा क्षेत्रीय तनाव को हवा देना आंतरिक सुरक्षा की मुख्य चुनौतियां हैं और इन खतरों का सामना केन्द्र तथा राज्यों के बीच अच्छे तालमेल से ही किया जा सकता है. उन्होंने कहा, हमारी सुरक्षा के प्रति बड़े खतरों से आप सब अवगत हैं. शत्रुतापूर्ण समूह और तत्व हमारे देश में आतंकी कार्रवाई करने के लिए सीमा पार से कार्रवाई करते हैं. जम्मू-कश्मीर इन समूहों की कार्रवाइयों का खामियाज़ा भुगत रहा है.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि सीमा पार से भारतीय मुद्रा के जाली नोट भी छाप छाप कर हमारे यहां बाज़ार में प्रसारित किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि जाली मुद्रा के प्रसार पर रोक के लिए राज्यों को आपस में और अधिक तालमेल करना चाहिए और इसके लिए विशिष्ट एजेंसियां भी बनानी चाहिए.

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प्रधानमंत्री ने अपने इस रुख को दोहराया कि नक्सलवाद और माओवाद जैसा अतिवादी वामपंथी उग्रवाद आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे अधिक खतरा है. उन्होंने कहा कि सीमा पारीय आतंकवाद और अतिवादी वामपंथी उग्रवाद देश के लिए सबसे बड़े खतरे तो हैं ही, लेकिन इनके साथ ही ‘‘कुछ तत्व ऐसे भी हैं जो हमारे समाज को साम्प्रदायिकता और क्षेत्रीयता में बांटने का प्रयास कर रहे हैं.’’ इन सब खतरों से निपटने के लिए उन्होंने कहा कि हमें ‘‘प्रतिबद्ध, कड़ी मेहनत और सतत सजग रहने’’ की आवश्यकता है. {mospagebreak}

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 2008 के मुकाबले 2009 में आतंकी घटनाओं में काफी कमी आई है लेकिन इसी अवधि में घुसपैठ का स्तर बढ़ा है. ‘‘हाल ही में ऐसी कुछ घटनाएं हुई हैं जो परेशान करने वाली हैं.’’ अतिवादी वामपंथी उग्रवाद को देश की सुरक्षा के बड़े खतरों में से एक बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे निपटते समय इस बात का ख्याल रखा जाए कि इनसे हमारी जनता, खासकर आदिवासी हमसे विमुख नहीं हो जाएं. उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा से प्रभावित इलाकों में उग्रवादियों से निपटने के साथ ही सामाजिक और आर्थिक विकास के कार्य चलने चाहिए. उन क्षेत्रों के लोगों को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जाना चाहिए.

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प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि आतंकवाद के खिलाफ शाक्तिशाली और एकजुट लड़ाई के लिए सभी राज्य केन्द्र द्वारा गठित राष्ट्रीय जांच एजेंसी का ‘‘पूर्ण संभावित उपयोग’’ करेंगे. उन्होंने कहा कि यह इसलिए भी ज़रूरी है, क्योंकि आज की दुनिया में बहुत से मुद्दे ऐसे हैं जिनसे निपटने के लिए केवल राज्यों के बीच ही नहीं, बल्कि केन्द्र और राज्यों में भी नज़दीकी समन्वय की ज़रूरत है. सिंह ने कहा, ‘‘आंतरिक सुरक्षा निश्चित तौर पर इनमें से एक मुद्दा है, क्योंकि यह हमारी शांति, और हमारी वृद्धि तथा विकास को प्रभावित करता है.’’

उन्होंने सभी मुख्यमंत्रियों से अपील की कि वे अपने अपने राज्यों में विशेष जांच एजेंसियां और द्रुत प्रतिक्रिया दल गठित करें. इसके साथ ही उन्होंने राज्यों से विशिष्ट कमांडो बल बनाने को भी कहा जो आतंकवादी कार्रवाई से कड़ाई से निपट सकें. राज्यों से उनके पुलिस बलों में रिक्त पड़े तीन लाख 94 हज़ार स्थानों को भरने की कार्रवाई तेज़ करने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ी संख्या है. पुलिस बलों का 20 प्रतिशत रिक्त रहना ठीक नहीं है. उन्होंने पुलिस ढांचे का विकास करने और उनके प्रशिक्षण को बेहतर बनाने के लिए इन मदों के लिए राज्यों के बजट आवंटन में बढ़ोत्तरी करने को कहा.

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इससे पहले गृह मंत्री पी चिदंबरम ने आतंकवादी खतरों सहित आंतरिक सुरक्षा की समस्याओं से प्रभावकारी ढंग से निपटने के लिए राज्यों के पुलिस बलों, खासतौर पर खुफिया प्रकोष्ठों और विशिष्ट इकाइयों को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि पिछले 14 महीनों में देश में कोई बड़ा आतंकी हमला और साम्प्रदायिक हिंसा नहीं हुई है, जो संतोष की बात है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसी घटनाओं के होने की आशंकाओं का खतरा नहीं रह गया है. गृह मंत्री ने कहा कि ऐसे में ‘‘हमें सदा सचेत और सतर्क रहने की आवश्यकता है. हमें अपनी क्षमताओं को बढ़ाना जारी रखना होगा. साथ ही हमें आतंकी हमलों तथा साम्प्रदायिक तनावों की आशंकाओं को रोकने के लिए अपने शासन की व्यवस्था तथा संस्थानों में सुधार करना होगा.

उन्होंने कहा कि भारत में घातक आतंकी हमले करने के जिम्मेदार लश्करे तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों ने हाल ही में पाक अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में बैठक की है और यह इस बात का साफ संकेत है कि ये समूह भारत के घोर विरोधी हैं. चिदंबरम ने कहा कि इन आतंकी समूहों के हथियार तबाही और हिंसा है और उनका लक्ष्य कश्मीर का बलात हरण करना है. जब भी और जहां भी हम उनका सामना करेंगे, हम उन्हें शिकस्त देंगे.

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