भारतीय सेना का जवान चंदू बाबूलाल चौहान 21 जनवरी को पाकिस्तान से रिहा होकर स्वदेश लौटा और आठ दिन बाद अपने बड़े भाई और दादाजी से मिला. दो दिनों में दो बार मुलाकात हुई. चंदू और भूषण भाई हैं. आजतक से बातचीत में भूषण ने चंदू के साथ हुए टॉर्चर के बारे मे बताया. चंदू से मुलाक़ात के बारे में भूषण ने बताया कि " चंदू बोला कम और रोया ज्यादा, उन्हें इस बात की खुशी है कि उसने सभी को पहचान लिया".
भूषण ने बताया कि एक घंटे की मुलाकात में आधे से ज्यादा समय चंदू रोता ही रहा , " मेंटली ज्यादा प्रॉब्लम नहीं लगा, लेकिन नानी के बारे में पूछने पर जब बताया कि नानी अब इस दुनिया में नहीं है तो और भी रोने लगा ". चंदू नानी का लाडला था. माता पिता का जब देहांत हुआ तब चंदू बहुत छोटा था. ठीक तरह से चल भी नहीं पाता था. चंदू को पाल पोस कर नानी ने बड़ा किया इस लिए चंदू के लिए नानी ही मां समान थी. अब वो नानी भी इस दुनिया में नहीं है.
भूषण ने बताया कि पाकिस्तान से लौटने के बाद से चंदू ठीक तरह से चल नहीं पा रहा है. चंदू के घुटने में चोट लगी है. उसे चलने में मुश्किल हो रही है. डॉक्टर के कहे अनुसार दस दिनों में जख्म ठीक हो जाएंगे. उसके हाथ के उंगलियो में भी बहुत चोटें आयी हैं. पाकिस्तानी फौजियों द्वारा किये गए टॉर्चर के बारे में चंदू ने भूषण को बताया कि उसे खुद के साथ होने वाली चीजों का कुछ पता नहीं था. वे उसे लगातार इंजेक्शन देते रहते और खाने की भी तकलीफ थी. उसे हरदम कालकोठरी में ही रखते थे. जब भी कहीं ले जाते तो उसके चेहेरे पर काला कपड़ा डालकर ले जाते थे.
अमृतसर में जब भूषण और चंदू की मुलाकात हुई तब उनके आस-पास भारतीय फौजी थे. ज्यादा सवाल पूछने पर पाबंदी थी. भूषण ने बताया कि वो चंदू से ज्यादा बातें नहीं कर पाए. ज्यादा सवाल पूछ नहीं पाया क्योंकि फौजी अधिकारी ज्यादा सवाल नहीं करने दे रहे थे. चंदू ने बताया के साढ़े तीन महीने लगातार इंजेक्शन लगने की वजह से वह सुधबुध खो चुका था. आधी बेहोशी की हालत में था. चंदू ने भाई को बताया कि उसे दो या तीन दिन में एक बार खाना दिया जाता था. साढ़े तीन महीनो में उसने रोशनी नहीं देखी. जब रोशनी देखी तो कोई उसकी दाढ़ी काट रहा था तो कोई उसके बाल काट रहा है. उस समय भी चंदू आधी बेहोशी की हालात में ही था.
चंदू के शरीर पर चोटें तो दिखाई दे रही थी लेकिन भूषण का कहना है कि पाकिस्तान ने उसे जिन्दा वापस किया यह मायने रखता है. अब जबकि दुश्मन की सेना ने बंधक बनाया है तो टॉर्चर किया जाना स्वाभाविक है. अपनी बात समझाने के लिए भूषण ने बताया कि कैसे गाडी का एक्सीडेंट होने पर कई बार चोटें आती हैं, खून निकलता है लेकिन हम खुद को खुशनसीब समझते हैं कि जान बच गयी.
ऐसा ही समझना चाहिए कि पाकिस्तान ने चंदू को जिन्दा छोड़ दिया और जल्दी छोड़ दिया. भूषण चौहान ने फिर एक बार भारतीय फौज के आला अधिकारियो का शुक्रिया अदा किया. भारत सरकार का शुक्रिया अदा किया और भरोसा जताया कि उसका भाई जल्द ही तंदुरुस्त होकर परिवार से मिलने के लिए फिर गांव आएगा.