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भारत और चीन के बीच 'दोस्ती की दस्तक', चीनी राष्ट्रपति से मिले मनमोहन

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात की. चीन में नेतृत्व परिवर्तन के बाद दोनों देशों के बीच यह पहला उच्च स्तरीय नियोजित संपर्क है.

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भारत चीन
भारत चीन

ने बुधवार को चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात की. चीन में नेतृत्व परिवर्तन के बाद दोनों देशों के बीच यह पहला उच्च स्तरीय नियोजित संपर्क है.

दोनों नेताओं के बीच ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर बैठक हुई. सिंह और शी डरबन शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने आए हुए हैं. द्विपक्षीय बैठक से पहले दोनों नेताओं के बीच शिखर सम्मेलन के दौरान अनौपचारिक बैठक हुई.

शी ने प्रधानमंत्री से कहा कि उन्हें अपने पूर्ववर्ती हु जिन्ताओ और पूर्व प्रधानमंत्री वेई के साथ उनके (सिंह के) अच्छे संबंधों की जानकारी है और वह इसे आगे भी जारी रखना चाहेंगे. शी ने पिछले सप्ताह भारत के साथ संबंधों के बारे में गर्भजोशी भरे शब्द कहे थे. उन्होंने कहा था कि वह मनमोहन सिंह से मिलने को उत्सुक हैं.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति शी के बीच बैठक से पहले भारत ने साफ संकेत दिया था कि सीमा विवाद जैसी समस्याओं तक सीमित रहे बिना संबंधों को बेहतर बनाने की चीन के नये नेतृत्व की इच्छा पर वह सकारात्मक पहल करेगा.

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आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि भारत द्विपक्षीय संबंधों को सीमा मुद्दे पर मतभेद जैसी समस्याओं के आड़े नहीं आने देगा जैसे विचार नये राष्ट्रपति शी ने पिछले सप्ताह व्यक्त किये थे. उन्होंने कहा, ‘हम समझते हैं कि हम सकारात्मक हो सकते हैं. हम साझी चिंताओं के बारे में एक दूसरे से बात कर सकते हैं. हम यह प्रदर्शित कर सकें हैं कि मतभेद के बावजूद चीन, भारत का सबसे बड़ा द्विपक्षीय कारोबारी सहयोगी है और निश्चित तौर पर हममें मिलकर काम करने की क्षमता है.’

उन्होंने इशारा किया कि दोनों देशों ने पिछले वर्ष सैन्य वार्ता शुरू करने का निर्णय किया था. शी ने पिछले सप्ताह भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के लिए पांच प्रस्तावों का जिक्र किया था. इनमें मुख्य हितों से निपटने के दौरान एक दूसरे की चिंताओं को ध्यान देना और आपसी संबंधों को बेहतर बनाने के दौरान विभिन्न मुद्दों पर मतभेदों को दरकिनार करना शामिल है.

उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि लंबित मुद्दों के समाधान तक सीमा पर अमन एवं शांति बनाये रखा जाना चाहिए. चीनी नेतृत्व के ‘मुख्य हित’ जैसे शब्दों का उपयोग किये जाने के बारे में पूछे जाने पर सूत्रों ने बताया कि संबंधों में भारत के मुख्य हित खुले एवं पारदर्शी हैं.

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उन्होंने कहा, ‘उन्हें बातचीत करने दीजिए. हमें पहले से अनुमान नहीं लगाना चाहिए. हम आपसी चिंताओं का लेखाजोखा तैयार करने से पहले मूल्यांकन करेंगे.’ सीमा संबंधी प्रश्न के आसानी से समाधान निकालना आसान नहीं होने के शी के बयान के बारे में सूत्रों ने कहा कि भारत का हमेशा कहना रहा है कि इसके समधान में समय लगेगा.

अधिकारियों ने कहा, ‘हमने कभी नहीं कहा कि इसका समाधान आसान होगा.’ भारत हमेशा से महसूस करता रहा है कि दोनों देशों को कारोबार और सकारात्मक क्षेत्र में बेहतरी की दिशा में आगे बढना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘एक मुद्दे (सीमा) को संबंधों के आड़े नहीं आने दें.’ अधिकारियों ने कहा कि भारत की तरफ से चीनी नेतृत्व को सकारात्मक संदेश है. उन्होंने कहा कि सिंह और शी के बीच बैठक से द्विपक्षीय संबंधों को बल मिलने की उम्मीद है. इससे चीजों का जायजा लेने के साथ संबंधों को आगे बढाया जा सकेगा.

उन्होंने कहा कि चीन के साथ कुछ मुद्दे पिछले 20 सालों से हैं. इनमें पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह में चीनी निवेश, ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध का निर्माण और पाकिस्तान के चश्मा विद्युत परियोजना में चीनी परमाणु रिएक्टर का निर्माण शामिल है.

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