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के परासरण: वकालत का वो 'पितामह', जिन्होंने SC में रखीं रामलला विराजमान की दलीलें

सर्वोच्च अदालत ने अयोध्या की विवादित जमीन का हक रामलला विराजमान को दिया और मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ ज़मीन अलग से देने को कहा.

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रामलला की दलीलें रखने वाले के. परासरण (फोटो: www.revenuebar.org)
रामलला की दलीलें रखने वाले के. परासरण (फोटो: www.revenuebar.org)

  • सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में सुनाया फैसला
  • 92 साल के के. परासरण थे हिंदू पक्ष के वकील
  • कई पुरस्कारों से हो चुके हैं सम्मानित

सुप्रीम कोर्ट ने दशकों से चले आ रहे अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद पर शनिवार को फैसला सुनाया. सर्वोच्च अदालत ने अयोध्या की विवादित जमीन का हक रामलला विराजमान को दिया और मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ ज़मीन अलग से देने को कहा. इस पूरे मामले में कई दिनों तक वाद-विवाद हुआ. सुप्रीम कोर्ट में घंटों तक बहस चलती रही. वकीलों ने अपनी दलीलें भी रखीं, जिन्होंने सुर्खियां बटोरीं.

इनमें से ही एक हैं के. परासरण, जिन्होंने रामलला विराजमान की ओर से पक्ष रखा. 92 साल के के. परासरण को इंडियन बार का पितामह कहा जाता है. उनका करियर कैसा रहा और उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातों को जानिए...

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-    के. परासरण ने रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में रामलला विराजमान की ओर से पक्ष रखा. वह हिंदू शास्त्रों के अच्छे जानकार हैं, वकीलों के खानदान से आते हैं. के. परासरण दो बार देश के अटॉर्नी जनरल रह चुके हैं.

-    इस मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि अपनी अंतिम सांस लेने से पहले वह इस केस में पूरा न्याय चाहते हैं.

-    मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे संजय किशन कॉल ने के. परासरण को इंडियन बार का पितामह कहा था.

-    अयोध्या केस के अलावा के. परासरण ने सबरीमाला केस में नायर सोसाइटी की ओर से दलीलें रखी थीं.

-    के. परासरण ने 1958 में सुप्रीम कोर्ट में बतौर वकील प्रैक्टिस शुरू की. जब देश में आपातकाल लगा तो वह तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल थे, 1980 में वह देश के सॉलिसिटर जनरल बने. 1983 से 1989 तक वह देश के अटॉर्नी जनरल रहे.

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-    के. परासरण मौजूदा कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के लिए भी केस लड़ चुके हैं. 1997 में तीस हजारी कोर्ट में प्रियंका की ओर से उन्होंने केस लड़ा था. तब एक व्यक्ति ने याचिका दायर की थी कि रॉबर्ट वाड्रा से शादी होने से पहले ही प्रियंका की शादी उसके साथ हो गई थी.

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-    अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने के. परासरण को पद्म भूषण से नवाजा. बाद में मनमोहन सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से नवाजा और राज्यसभा के लिए नॉमिनेट भी किया. 2019 में ही उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के द्वारा उन्हें मोस्ट एमिनेंट सीनियर सिटीजन अवॉर्ड दिया गया.

-    के. परासरण का जन्म साल 1927 में तमिलनाडु के श्रीरंगम में हुआ था. उनको वकालत विरासत में मिली. उनके पिता भी वकील थे. परासरण ने साल 1958 में वकालत की प्रैक्टिस शुरू की थी. तब से लेकर अब तक कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन परासरण सबके भरोसेमंद वकील बने रहे.

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