पूर्व वित्त मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली का 66 साल की उम्र में निधन हो गया है. उनको बीते 9 अगस्त को दिल्ली के एम्स में भर्ती करवाया गया था. उस समय उनको सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. लंबे समय से चल रही बीमारी के चलते उन्होंने दूसरी बार नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर कैबिनेट में शामिल होने से विनम्रता पूर्वक मना कर दिया था. अरुण जेटली मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में दूसरे नंबर के सबसे अहम शख्सियत थे. अपने फैसलों से वह हमेशा चर्चा में बने रहते थे.
अरुण जेटली सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव थे वह अपना खुद का ब्लॉग भी लिखा करते थे. उन्होंने 6 अगस्त 2019 को आखिरी बार ट्वीट किया था. जिसमें उन्होंने लिखा था "महान संत तुलसीदास जी की जयंती पर उनको कोटि कोटि नमन.
महान संत तुलसीदास जी की जयंती पर उनको कोटि कोटि नमन |
— Arun Jaitley (@arunjaitley)
वहीं आपको बता दें, 6 अगस्त को पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का 67 वर्ष की उम्र में देहांत हो गया था. जिस पर अरुण जेटली ने सुषमा जी के निधन पर दुख जताते हुए ट्वीट करते हुए लिखा था.
"सुषमा जी के निधन पर दुख, दर्द और टूट गया. वह वर्तमान युग में सबसे उत्कृष्ट राजनीतिज्ञों में से एक थी. वह सभी पदों पर प्रतिष्ठित थीं. वह पार्टी एनडीए सरकार के साथ वरिष्ठ पदों पर रहीं.
Saddened, pained & broken on demise of Sushmaji. She was one of the most outstanding politicians in the Present Era. She distinguished in all positions. She held Senior Positions with the Party, NDA Govt. & while in opposition. She leaves behind a void which is difficult to fill.
— Arun Jaitley (@arunjaitley)
आपको बता दें, अरुण जेटली ने अपने ब्लॉग में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 का जिक्र करते हुए कई बाते लिखी थी.
उन्होंने अपने पहले ट्वीट में लिखा था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने कश्मीर नीति को लेकर जो कदम उठाया है वह असंभव था. अरुण जेटली ने ट्वीट किया कि उन्होंने अपने ब्लॉग में मोदी सरकार के इस फैसले की विवेचना की थी. इसमें जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को लेकर इतिहास में हुए असफल प्रयासों का भी जिक्र किया गया था.
Prime Minister Shri Narendra Modi and Home Minister Shri Amit Shah achieved the Impossible with the new Kashmir policy. In my blog today, I have analysed the impact of this decision, and history of failed attempts on resolving the J&K issue.
— Arun Jaitley (@arunjaitley)
इसी के साथ उन्होंने दूसरे ट्वीट में लिखा- "सात दशकों से कभी भी जम्मू-कश्मीर को लेकर सही कदम नहीं उठाया गया. वहां जुड़ाव कि नहीं अलगाववाद की बात होती रही. इससे वहां पर अलगाववादी मानसिकता का विकास हुआ. पाकिस्तान कई दशकों से इसी मानसिकता का फायदा उठाता आया है.
In the last seven decades, attempts to resolve the issue proved a disaster, PM Modi decided to follow an alternative approach. The present decision makes it clear that just as the rule of law prevails in other parts of the country, it will equally prevail in the Kashmir valley.
— Arun Jaitley (@arunjaitley)
कांग्रेस पार्टी तो हेडलेस चिकन की तरह है. वो भारत के लोगों से अब दूर जा रहा है. नया भारत बदल चुका है. सिर्फ कांग्रेस इस बात को समझ नहीं पा रही है. कांग्रेस नेतृत्व लगातार रेस में नीचे से अव्वल आने की ओर भाग रही है."
Congress Party, as a ‘headless chicken’, is further consolidating its alienation from the people of India. The New India has changed. Only the Congress does not realise this. The Congress leadership is determined to succeed in its race to the bottom.
— Arun Jaitley (@arunjaitley)
अरुण जेटली का शनिवार को दिल्ली के एम्स में निधन हो गया है. वह लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे. उन्होंने 12.07 बजे अंतिम सांस ली. वह 66 साल के थे. 9 अगस्त को सांस लेने में तकलीफ के बाद अरुण जेटली को एम्स में भर्ती कराया गया था. अनुभवी डॉक्टरों की टीम की देखरेख में कई दिनों से उनका इलाज किया जा रहा था.