नेटवर्किंग मार्केटिंग कंपनी एमवे इंडिया के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी विलियम एस पिंकने और कंपनी के दो निदेशकों को सोमवार को वित्तीय अनियमितता के आरोप में केरल पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार कर लिया.
अपराध शाखा के सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार निदेशकों में संजय मल्होत्रा और अंशु बुद्धिराजा शामिल हैं.
सूत्रों ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी एक महिला की शिकायत और वायनाड जिले में कंपनी के खिलाफ दायर तीन मामलों के आधार की गयी है. महिला ने शिकायत में दावा किया है कि कंपनी के नेटवर्क की वजह से उसे नुकसान हुआ है.
पुलिस ने इन तीनों कंपनी अधिकारियों से पिछले माह भी पूछताछ की थी और आगे की पूछताछ के लिए आज बुलाया था. थाने में पहुंचते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.
पिछले साल अपराध शाखा (आर्थिक अपराध) इकाई ने एमवे के त्रिसूर, कोझिकोड तथा कन्नूर के दफ्तरों पर छापेमारी की थी. यह छापेमारी मनी चेन गतिविधियों का पता लगाने के लिए की गई थी. इन केंद्रों पर कंपनी के गोदामों को बंद कर दिया गया और उत्पादित सामान जब्त किया गया था.
यह छापेमारी कोझिकोड की विसालाक्षी की शिकायत पर की गई थी. महिला ने दावा किया था कि उसे कंपनी की वजह से नुकसान हुआ है.
डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों के संगठन इंडियान डायरेक्ट सेलिंग एसोसिएशन की महासचिव छवि हेमंत ने एक बयान में इस घटना को ‘बहुत निराशाजनक और दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया और सरकार से नियमों को स्पष्ट करने की मांग की. उन्होंने कहा, ‘ सरकार को डायरेक्ट सेलिंग कारोबार के माडल और घोखाधड़ी भरी पिरामिड योजनाओं के बीच अंतर तत्काल स्पष्ट करना चाहिए क्यों कि यह फर्क न किए जाने होने के कारण डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों को परेशान किया जाता है.’
इस बीच, एमवे ने कोच्चि में जारी बयान में कहा कि वह केरल पुलिस सीबी-सीआईडी को 2012 में दर्ज शिकायत की जांच में पूरा सहयोग दे रही है. विलियम एस पिंकने, अंशु बुद्धिराजा तथा संजीव मल्होत्रा सीबी-सीआईडी के सभी सवालों का जवाब देने के लिए हमेशा मौजूद रहे हैं.
कंपनी ने कहा कि 2011 के वायनाड मामले में कंपनी और उसके अधिकारियांे को न तो कभी समन भेजा गया और न ही किसी प्रकार की जानकारी मांगी गई.
एमवे ने कहा कि उसने पुलिस अधिकारियों द्वारा मांगी गई सभी जानकारियां और दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं. ‘हम अन्य मामलों में भी आगे की जांच के लिए पुलिस के साथ पूरी तरह सहयोग के लिए तैयार हैं.’ डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों के संगठन इंडियन डायरेक्ट सेलिंग एसोसिएशन की महासचिव छवि हेमंत ने एक बयान में इस घटना को ‘बहुत निराशाजनक और दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया और सरकार से नियमों को स्पष्ट करने की मांग की. उन्होंने कहा, ‘ सरकार को डायरेक्ट सेलिंग कारोबार के माडल और घोखाधड़ी भरी पिरामिड योजनाओं के बीच अंतर तत्काल स्पष्ट करना चाहिए क्योंकि यह फर्क न किए जाने के कारण डायरेक्ट सेलिंग कंपनियों को परेशान किया जाता है.’