शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के भाजपा के प्रधानमंत्री के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी के साथ नाराजगी जगजाहिर हो गई जब उन्होंने अपने भाषण में भाजपा और आडवाणी का कहीं जिक्र नहीं किया. इसके बाद तो आडवाणी तुरंत जा पहुंचे मातोश्री.
मुंबई के शिवाजी पार्क में बाला साहब के भाषण का वीडियो टेप चला. इस भाषण में बीजेपी और आडवाणी का एक बार भी जिक्र नहीं था. बाद में आडवाणी ने मीडिया को बताया कि बाला साहब से उनकी मुलाकात बेहद अच्छी रही.
लाल कृष्ण आडवाणी ने समझ लिया इशारा, और अपने भाषण के बाद तुरंत रवाना हो गए मातोश्री की ओर. वैसे तो आडवाणी ने इसे सामान्य शिष्टाचार की मुलाकात बताया लेकिन इस मुलाकात का मतलब बस इतना नहीं था.
पिछले कुछ दिनों से बीजेपी और शिवसेना के बीच रिश्ते बहुत अच्छे नहीं रहे हैं. इसकी झलक रविवार को शिवाजी पार्क में हुई रैली में भी नजर आई. शिवसेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे खुद तो रैली में हिस्सा नहीं ले पाए लेकिन उनके भाषण का एक वीडियो टेप सभा में सुनाया गया.
बाला साहब ने लोगों से कहा कि कि अब वो घर से बाहर नहीं निकलते. अब उद्धव को ही उन्होंने अपना काम सौंप दिया है और लोग उनके लिए ही वोट करें. बाला साहब ने ये भी कहा कि प्रधानमंत्री कोई भी बने, वो शिवसेना प्रमुख बने रहने में ही खुश हैं. इस पूरे भाषण में एक बार भी ना तो आडवाणी का जिक्र था और ना ही बीजेपी का.
बाला साहब ने भले ही आडवाणी का नाम नहीं लिया लेकिन आडवाणी के भाषण में बाला साहब बार-बार आए. आडवाणी ने अपने भाषण में कहा कि यहां दो बड़े नेता मौजूद नहीं हैं एक तो अटल जी और दूसरे बाला साहब जी.
आडवाणी की पूरी कोशिश थी कि चुनाव को देखते हुए बीजेपी और शिवसेना के रिश्ते को सुधारने की. दरअसल इससे पिछली बार आडवाणी बाल ठाकरे से नहीं मिल पाए थे. अब रैली में भी बाला साहब की नाराजगी जाहिर हो गयी तो आशीर्वाद लेना जरूरी हो गया.