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अक्षरधाम हमले से बरी शख्स का आरोप, गुजरात पुलिस ने की थी फंसाने की कोशिश

अक्षरधाम मंदिर पर हमले के दाग से हाल ही में बरी हुए मोहम्मद सलीम ने गुजरात पुलिस पर सनसनीखेज आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि गुजरात पुलिस ने उन्हें गोधरा कांड, हरेन पांड्या की हत्या या अक्षरधाम पर हमला में से कोई एक मामला चुनने को कहा था, जिसमें उन्हें फंसाया जा सके.

Akshardham temple attack Akshardham temple attack

अक्षरधाम मंदिर पर हमले के दाग से हाल ही में बरी हुए मोहम्मद सलीम ने गुजरात पुलिस पर सनसनीखेज आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि गुजरात पुलिस ने उन्हें गोधरा कांड, हरेन पांड्या की हत्या या अक्षरधाम पर हमला में से कोई एक मामला चुनने को कहा था, जिसमें उन्हें फंसाया जा सके.

11 साल जेल में हो गए खर्च
अंग्रेजी अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने ऐसी खबर दी है. सलीम 11 साल तक जेल में रहने के बाद हाल ही में रिहा हुए हैं. निचली अदालत में पोटा कानून के तहत उन्हें दोषी पाया गया था और उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. लेकिन 16 मई को ही सुप्रीम कोर्ट ने फैसले को पलटते हुए सलीम समेत पांच अन्य को बरी कर दिया. इन 6 लोगों में से चार की 10 साल से ज्यादा जिंदगी जेल की सलाखों के भीतर ही खर्च हो चुकी है.

'उन्होंने कहा, किसमें आरोपी बनना पसंद करोगे'
हमले के आरोप से बरी हुए लोगों ने मंगलवार को दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस की. सलीम ने बताया, 'मैं 13 साल से सऊदी अरब में काम कर रहा था. मुझे पासपोर्ट की समस्या बताकर गिरफ्तार किया गया. मुझे बुरी तरह मारा-पीटा गया. मेरी पीठ पर अब भी जख्म के निशान हैं. मेरे पैर में फ्रैक्चर हो गया था. उन्होंने मुझसे पूछा कि मैं किस मामले में आरोपी बनाया जाना पसंद करूंगा- अक्षरधाम, हरेन पांड्या या गोधरा. मुझे नहीं पता था कि क्या कहना है.'

कयूम से जबरन कॉपी करवाया गया लेटर!
सलीम की गिरफ्तारी के चार महीने बाद उनकी बेटी पैदा हुई. उन्हें 11 साल बाद अपनी बेटी को बाहों में उठाने का सुख मिला. आरोपों से बरी होने वालों में एक और नाम अब्दुल कयूम मुफ्तिसाब मोहम्मद भाई का भी है. उन्होंने भी 11 साल जेल में बिताए. जब बाहर आए तब तक घर पर बहुत कुछ बदल चुका था. पिता की मौत हो गई थी और परिवार पुराने घर से कहीं और शिफ्ट हो गया था.

कयूम ने बताया कि आतंकी हमले में जो फिदायीन मारे गए थे, उनके पास मिले लेटर लिखने का आरोप उन पर लगाया गया था. वह कहते हैं कि उन्हें फंसाया गया. 'उन्होंने मुझे लेटर दिया और तीन दिन और रात तक उसे कॉपी करवाया. वह रोज एक्सपर्ट बुलाते थे और जांच करवाते थे कि मैंने ठीक से कॉपी किया है या नहीं. वह चाहते थे कि मैं उर्दू के अक्षरों के घुमाव को भी ज्यों का त्यों कॉपी करूं, ताकि वह असली लेटर जैसा लगे. मैं बहुत डरा हुआ था. उन्होंने जो कहा, मैंने कर दिया. फिर कोर्ट में उन्होंने दावा किया कि वह लेटर मैंने लिखा है.'

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