अयोध्या में बाबरी मस्जिद के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट आज अहम फैसला सुनाने वाला है. अदालत इस बात को तय करेगा कि हाई कोर्ट बाबरी मस्जिद की मिल्कियत वाले मुकदमे का फैसला कब सुनाए.
इलाहाबाद हाई कोर्ट इस मामले में पिछले हफ्ते 24 सितंबर को ही फैसला सुनाने वाला था. लेकिन इससे ठीक एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने फैसले पर हफ्ते भर की रोक लगा दी. अदालत ने रमेशचंद्र त्रिपाठी की याचिका सुनने के बाद दोनों पक्षों को आपसी रजामंदी बनाने का मौका दिया है.
सरकार ने दोनों पक्षों से अपील की है कि अगर बातचीत से मामला सुलझ जाए तो सबसे अच्छा होगा. ऐसा न होने पर अदालत के फैसले को मानने के लिए तैयार रहना चाहिए.
वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि हम लोग कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. इस मामले में दो ही विकल्प हैं. दोनों ही विकल्प कांग्रेस और सरकार को मान्य हैं.
अयोध्या की जमीन की मिल्कियत का मामला 1949 से चल रहा है और भारत के सबसे पुराने मुकदमों में एक है. सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अखिल भारत हिंदु महासभा इसमें पक्षकार हैं.