2जी घोटाले में एक और खुलासा सामने आया है. आजतक को सरकार के उच्चपदस्थ सूत्रों से जानकारी मिली है कि वित्त मंत्रालय की चिट्ठी से नाराज गृहमंत्री पी चिदंबरम इस्तीफा देना चाहते थे, लेकिन प्रधानमंत्री ने उन्हें समझा-बुझाकर मना लिया.
पीएम ने चिदंबरम को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ है. यही नहीं, फ्रैंकफर्ट से न्यूयार्क के रास्ते पीएम ने अपने विशेष विमान में साथ चल रहे पत्रकारों से भी साफ कहा कि उन्हें चिदंबरम पर पूरा भरोसा है.
2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में सरकार के दो बड़े मंत्रियों के बीच जारी घमासान का ये सबसे बड़ा खुलासा है. सूत्रों से ऐसी खबर मिली है कि प्रणब मुखर्जी की अगुवाई वाले वित्त मंत्रालय द्वारा 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय को जो चिट्ठी लिखी गई, उसके मजमून से गृहमंत्री पी चिदंबरम बेहद नाखुश हैं.
सूत्रों के मुताबिक जब इस चिट्ठी को लेकर मीडिया में बवाल मचा और 2जी घोटाले में तब के वित्त मंत्री चिदंबरम की भूमिका पर उंगली उठने लगी, तो चिदंबरम ने सीधे प्रधानमंत्री से बात की. पीएम उस वक्त फ्रैंकफर्ट से न्यूयार्क के रास्ते थे.
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने जा रहे मनमोहन चिदंबरम की पेशकश से परेशान हो उठे. उन्होंने सिक्किम में भूकंप पीड़ित इलाकों का जायजा ले रहे गृहमंत्री को काफी देर तक समझाया और उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिश की.
सूत्रों के मुताबिक मनमोहन ने चिदंबरम से साफ कहा कि सरकार को उनका पूरा समर्थन है और वो इस्तीफा जैसा कोई भी कदम उठाने से पहले उनके स्वदेश लौटने का इंतजार करें. ऐसा माना जाता है कि इसी बातचीत के बाद प्रधानमंत्री अपने एयरफोर्स वन विमान की केबिन से बाहर आए और मीडिया के सामने चिदंबरम के पक्ष में बयान दिया.
आजतक के सवाल पर पीएम ने साफ कहा, ''चिदंबरम जब वित्त मंत्री थे तब मुझे उन पर पूरा भरोसा था और अब गृहमंत्री के रूप में भी ये भरोसा कायम है.'' यही नहीं, प्रधानमंत्री ने इस आकलन को भी खारिज कर दिया कि वित्त मंत्रालय के नोट का मतलब चिदंबरम और प्रणब के बीच दरार जैसी कोई बात है.
उधर, प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने आजतक को बताया कि वित्त मंत्रालय का नोट प्रधानमंत्री के दिशा-निर्देश पर तैयार हुआ था और इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे चिदंबरम पर उंगली उठे.
बहरहाल विवाद को शांत करने के लिए प्रधानमंत्री ने खुद आगे आकर बयान तो जारी कर दिया, लेकिन क्या पीएम के इस बयान से चिदंबरम की कुर्सी सलामत मानी जाए? शायद, ये जल्दबाजी का निष्कर्ष होगा, क्योंकि मामला अदालत में है और कोर्ट की कोई भी प्रतिकूल टिप्पणी चिदंबरम पर भारी पड़ सकती है.