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साल 2010: देशभर की प्रमुख घटनाएं

2011 आने वाला है लेकिन अगर हम साल 2010 पर नजर डालें तो राष्‍ट्रमंडल खेल, कसाब पर फैसला, अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा और अयोध्‍या पर आया कोर्ट का फैसला प्रमुख रहीं.

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2011 आने वाला है लेकिन अगर हम साल 2010 पर नजर डालें तो राष्‍ट्रमंडल खेल, कसाब पर फैसला, अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा और अयोध्‍या पर आया कोर्ट का फैसला प्रमुख रहीं.

राष्‍ट्रमंडल खेल

राजधानी दिल्‍ली में 3 से 14 अक्टूबर के बीच हुए 19वें राष्‍ट्रमंडल खेल कई मायनों में भारत के लिए ऐतिहासिक भी रहे और कई मायनों में भूलने वाला भी साबित हुआ. इन खेलों में भ्रष्टाचार सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा. आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी और उनके सहयोगियों पर आयोजन में घोटाले के आरोप लगे. इस मामले में अब भी जांच जारी है. हालांकि, विवाद से दूर भारतीय एथलीटों ने राष्‍ट्रमंडल खेलों में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन करते हुए 38 स्वर्ण पदक जीते लेकिन भ्रष्टाचार की छाया खेल पर छायी रही. गड़बड़ियों के बीच कई खिलाड़ियों ने भारत आने से इनकार कर दिया लेकिन इन दिक्कतों के बावजूद भारत ने एक शानदार आयोजन कर यह साबित कर दिया कि भारत ऐसी बड़ी प्रतियोगिताओं का कामयाबी से आयोजन कर सकता है.

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राहुल और सोनिया गांधी पर विकीलीक्स के खुलासे

विकीलीक्स के खुलासे ने दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका की पोल पट्टी खोलकर रख दी. विकीलीक्स पर अमेरिका के गोपनीय राजनयिक दस्तावेजों के खुलासे ने दुनिया को लेकर अमेरिकी सोच को सबके सामने ला दिया. ढाई लाख से ज़्यादा गोपनीय दस्तावेजों को उजागर करने वाली वेबसाइट विकीलीक्स ने भारत में मौजूद अमेरिकी दूतावास से ही करीब साढ़े तीन हजार केबल भेजे गए. इनमें से सामने आए कुछ दस्तावेज कांग्रेस पार्टी, राहुल गांधी और सोनिया गांधी के लिए खासे मुश्किल साबित हुए. हिंदू आतंकवाद को लश्कर-ए-तैयबा से ज़्यादातर खतरनाक बताने वाली टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी और उनकी पार्टी बचाव करती दिखी. वहीं, गोपनीय दस्तावेज में सोनिया की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए गए थे. 26 नवंबर, 2008 को मुंबई पर हुए आतंकी हमले के बाद कांग्रेस की सांप्रदायिक राजनीति की कोशिशों के बारे में अमेरिका के गोपनीय राजनयिक दस्तावेज के खुलासे ने कांग्रेस को बगलें झांकने पर मजबूर कर दिया.{mospagebreak}

26/11 के आरोपी कसाब को सजा-ए-मौत

मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले में जिंदा बचे अजमल आमिर कसाब को एक स्पेशल कोर्ट ने इसी साल मई में दोषी ठहराते हुए मौत की सज़ा सुनाई थी. हालांकि, कसाब ने इस सज़ा के ख़िलाफ़ बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की है, जिसकी सुनवाई चल रही है. इस हमले में कुल 10 आतंकवादी शामिल थे, जिनमें से नौ की हमलों के दौरान ही मौत हो गई थी और सिर्फ़ कसाब को जिंदा पकड़ा गया था. कसाब को आर्थर रोड जेल में रखा गया है और सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें अदालत में पेश नहीं किया जाता है. मामले की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए होती है.

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अमेरिकी राष्‍ट्रपति ओबामा की भारत यात्रा

इस साल नवंबर में अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत दौरे पर आए. ओबामा का यह दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक रहा. हालांकि, मंदी से जूझते देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और अपने हथियारों और परमाणु सामग्री के लिए बाज़ार की तलाश में आए ओबामा ने भारत को दुनिया की एक ताकत बताते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थायी सदस्य बनाए जाने की वकालत की. संसद के केंद्रीय हॉल में सांसदों को संबोधित करते हुए पाकिस्तान से 26/ 11 के दोषियों पर कार्रवाई करने के लिए कहा और आतंकवादी गतिविधियों में कमी लाने की बात कही. अपने तीन दिनों की यात्रा के दौरान ओबामा मुंबई भी गए, जहां उन्होंने 26/ 11 के शहीदों को श्रद्धांजलि दी. ओबामा ने अमेरिकी लोगों के लिए करीब 50 हजार नौकरियों का इंतजाम भी इस दौरे पर किया.{mospagebreak}

अयोध्या विवाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने 50 साल से ज़्यादा पुराने अयोध्या में विवादित भूमि के मालिकाना हक के मामले में ऐतिहासिक फैसला देते हुए कहा कि विवादित जमीन से रामलला की प्रतिमा नहीं हटेगी. इसके साथ ही कोर्ट ने जमीन को तीन हिस्सों में सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला पक्ष को बराबर बांटने के निर्देश दिए. इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस डी. वी. शर्मा, जस्टिस एस. यू. खान और जस्टिस सुधीर अग्रवाल की बेंच ने बहुमत से दिए गए फैसले में एक हिस्सा (जहां राम लला की प्रतिमा विराजमान है) हिंदुओं को मंदिर के लिए, दूसरा हिस्सा ( जहां सीता रसोई और राम चबूतरा है) निर्मोही अखाड़ा को और तीसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने का फैसला सुनाया. 30 सितंबर को आए इस फैसले के तीन महीने तक किसी भी तरह के कब्जे या निर्माण कार्य पर रोक लगी है. इस मामले से संबंधित ज़्यादातर पक्षों को फैसला मंजूर नहीं है. ऐसे में कई पक्ष इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने की रणनीति बना रहे हैं.

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