भाजपा ने कहा कि योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया को न तो गरीबों से सहानुभूति है और न ही गरीबी की समझ, इसलिए उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.
पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने यहां कहा कि गांवों में 26 रूपए और शहरों में 32 रूपए प्रतिदिन से अधिक कमाने वालों को अमीर मानने संबंधी उच्चतम न्यायालय में वाहियात हलफनामा देने के बाद अब अहलुवालिया कह रहे हैं कि गरीबी रेखा का नया मानदंड बनाकर वह शीर्ष अदालत में नया हलफनामा दाखिल करेंगे जिसमें जाति को भी आधार बनाया जाएगा.
जोशी ने जाति को गरीबी रेखा का मानदंड बनाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि गरीबी जाति, समुदाय और धर्म की सीमाओं से नहीं बंधी है. उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि गरीबी के आंकलन का आधार जाति होगी या आर्थिक स्थति.
उन्होंने कहा कि जाति को गरीबी का मानदंड बना कर बीपीएल के निर्धारण टालने की कोशिश भी है. उनके अनुसार जातिगत जनगणना 2012 तक पूरी होगी, जिसका मतलब है कि कम से कम तब तक गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों का आंकलन नहीं किया जा सकेगा.
उधर गरीबी की परिभाषा को लेकर चौतरफा आलोचनाओं के बीच अहलुवालिया ने अपने को इस विवाद से अलग करने का प्रयास किया. उन्होंने कहा कि समाज के वंचित वर्गों को सब्सिडी देने में न्यायालय में प्रस्तुत आंकड़ों को आधार नहीं बनाया गया है.
उन्होंने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा कि गरीबी की परिभाषा का विचार उनका अपना नहीं है. उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों के इस्तेमाल से समाज के पिछड़े तबकों को सरकारी सहायता से वंचित करने का कोई इरादा नहीं है.