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पकड़ा गया अलवर का आदमखोर तेंदुआ, 6 लोगों को मौत के घाट उतारा

सरिस्का प्रशासन ने तीन दिन दूसरे तेंदुए को पिंजरे में कैद करने में सफलता प्राप्त की है.वन अधिकारियो का दावा है की आज जो तेंदुआ पकड़ा है यही है वह आदमखोर है जिसने छह लोगो को मौत के घाट उतारा ह.

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सरिस्का बाघ अभ्यराण्य में था तेंदुआ
सरिस्का बाघ अभ्यराण्य में था तेंदुआ

राजस्थान के अलवर में सरिस्का बाघ अभ्यराण्य के गांवों के लिए आतंक का पर्याय बन चुके किलर तेंदुए को आखिरकार पकड़ लिया गया है. सरिस्का प्रशासन का दावा है कि आज पकड़ा गया तेंदुआ ही असली आदमखोर तेंदुआ है. इसके दांत टूटे हुए हैं और ये खुंखार भी है. हालांकि डीएनए टेस्ट के बाद ही इसकी पुष्टि की जा सकेगी.

शनिवार को भी एक तेंदुआ पकड़ा गया था लेकिन बाद में ये साफ हो गया था कि पकड़ा गया तेंदुआ वो आदमखोर नहीं है जिसने इलाके में कहर बरपा रखा है. इसके बाद प्रशासन वापस आदमखोर तेंदुए की तलाश में जुट गया था.

सरिस्का के क्षेत्रीय निदेशक आर एस शेखावत ने बताया कि इस पकड़े गए तेंदुए की उम्र करीब 10 वर्ष है जो . साथ ही इस पैंथर के नीचे के दांत नहीं हैं. तेंदुए की ओर से अब तक मारे गए 6 लोगों की जांच में यह बात भी सामने आई कि जिन-जिन लोगों को मारा गया था उन लोगों के जख्मों में भी निचले हिस्से में दांतों के निशान नहीं आए हैं. जिससे अब यह साफ जाहिर है कि आदमखोर तेंदुआ यही था.

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व्यस्क होने की वजह से यह पैंथर ज्यादा भागदौड़ नहीं कर सकता था इसलिए उसने आसानी से ग्रामीणों को अपना निशाना बनाया .उन्होंने बताया कि जब कोई मांसाहारी वन्य जीव बूढ़ा होता है तो वह आसानी से बड़े जानवरों पर हमला नहीं करता और छोटे-छोटे जानवरों पर हमला करके ही अपना भोजन तलाशता है.

सरिस्का प्रशासन ने तीन दिन दूसरे तेंदुए को पिंजरे में कैद करने में सफलता प्राप्त की है.वन अधिकारियो का दावा है की आज जो तेंदुआ पकड़ा है यही है वह आदमखोर है जिसने छह लोगो को मौत के घाट उतारा है. यह किलर तेंदुआ संतवाला खोहरा गांव के जंगल में पिजंरे में कैद हुआ है.कल शाम को सरिस्का के सर्च टीम को संतवाला खोहरा में इस पेंथर की लोकेशन मिली थी उसके बाद रामजी का ग्वाडा से ये पिंजरा लगाया था और आज सुबह पिंजरे में तेंदुआ कैद हो गया. सरिस्का के डीएफओ बालाजी करी ने बताया कि इस तेंदुए को जयपुर चिड़ियाघर में रखा गया है.

इधर सरिस्का सूत्रों ने बताया कि आज जो तेंदुए पकड़ा गया है उस. इस तेंदुए को 3 महीने पहले अलवर के सरिस्का इलाके से ही जयपुर चिड़ियाघर में छोड़ा गया था और उसके कुछ दिन बाद ही जयपुर चिड़ियाघर से उस तेंदुए को वापस सरिस्का इलाके में छोड़ दिया था. जब इस तेंदुए को जयपुर चिड़ियाघर के लिए छोड़ा गया था तब भी कई ग्रामीणों पर इस तेंदुए ने हमला किया था जिसमें 2 लोगों की मौत हो गई थी. इस संबंध में जब क्षेत्रीय निदेशक आर एस शेखावत से पैंथर के चिप लगी हुई होने की बात की तो उन्होंने कोई जवाब देने से इंकार कर दिया. सरकार के लिए जवाब देना मुश्किल होगा कि इस किलर तेंदुए को आखिरकार छोड़ा ही क्यों गया था.

 

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