पंजाब के गुरदासपुर से कांग्रेस सांसद और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय मंत्री और कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर पंजाब सरकार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने मोगा के किली चहलां में आयोजित 'नशों के खिलाफ युद्ध' रैली में पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) की उपस्थिति पर रिपोर्ट मांगी है.
रंधावा के मुताबिक सरकारी मुहिम के नाम पर आयोजित यह कार्यक्रम पूरी तरह सियासी था, जिसमें अरविंद केजरीवाल मुख्य अतिथि थे और पार्टी के झंडों के साथ राजनीतिक नारेबाजी की गई. उन्होंने आरोप लगाया कि सिविल सेवा अधिकारियों का ऐसी रैली में शामिल होना ऑल इंडिया सर्विसेज (आचरण) नियम, 1968 का खुला उल्लंघन है.
इस शिकायत के जरिए रंधावा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से स्पष्टीकरण मांगने और प्रशासनिक तटस्थता बनाए रखने के लिए जांच की मांग की है.
सियासी मंच सजाने का आरोप
सांसद रंधावा ने अपनी शिकायत में कहा कि किली चहलां की रैली को सरकारी बताया गया था, लेकिन वहां का माहौल पूरी तरह पक्षपातपूर्ण था. पार्टी के झंडे, AAP नेताओं की भागीदारी और मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा की गई राजनीतिक बयानबाजी यह साबित करती हैं कि इसे योजनाबद्ध तरीके से एक राजनीतिक मंच के रूप में इस्तेमाल किया गया. उन्होंने इसे संविधान की भावना के विपरीत और लोकतांत्रिक मूल्यों का उपहास बताया है.
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अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप पंजाब के टॉप अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर लगाया गया है. रंधावा का मानना है कि मुख्य सचिव और DGP की भागीदारी ने प्रशासनिक तटस्थता के सिद्धांत को गहरी ठेस पहुंचाई है. उनके मुताबिक, इससे पुलिस और सिविल सेवा की निष्पक्षता पर जनता का यकीन कमजोर हुआ है. उन्होंने मांग की है कि स्थायी सिविल सेवा और राजनीतिक मंचों के बीच एक स्पष्ट सीमा तय की जानी चाहिए.
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PMO से की गई ये मांग...
संस्थागत गरिमा की रक्षा के लिए सुखजिंदर रंधावा ने केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की गुजारिश की है. उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को लिखे पत्र में आग्रह किया है कि पूरे मामले की विधिवत तरीके से जांच की जाए. रंधावा ने जोर देकर कहा कि सरकारी संसाधनों का उपयोग राजनीतिक मकसद के लिए करना गलत है और इस पर मुख्यमंत्री से जवाबदेही तय होनी चाहिए, जिससे संवैधानिक मूल्यों को बचाया जा सके.