एमएसपी समेत कई मांगों को लेकर दिल्ली कूच के लिए निकले पंजाब के किसानों को हरियाणा के शंभू और खनौरी बॉर्डर पर रोक लिया गया. हरियाणा पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े. इस दौरान खनौरी बॉर्डर पर शुभकरण नाम के एक युवा किसान की मौत हो गई थी. हालांकि उसके परिजनों ने तबतक अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था, जबतक इस मामले में एफआईआर दर्ज न की जाए. पंजाब पुलिस ने इस मामले में हत्या और अपराध के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है, जिसके बाद शुभकरण सिंह के अंतिम संस्कार के लिए परिवार और किसान संगठन राजी हो गए हैं.
शुभकरण सिंह के पार्थिव शरीर को खनौरी बॉर्डर पर श्रद्धांजलि देने के लिए लाया गया है. उसके बाद वहीं से उनके गांव में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी. शुभकरण के शव का अंतिम संस्कार दोपहर दो बजे के बाद बठिंडा के बल्लो गांव में किया जाएगा. इसकी जानकारी किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने दी है.
पंढेर ने बताया, "शंभू और खनौरी बॉर्डर पर आज आंदोलन का 17वां दिन है. हमें जानकारी मिली है कि शुभकरण की मौत के मामले में धारा 302 और 114 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. हम आज शुभकरण का शव खनौरी बॉर्डर पर श्रद्धांजलि के लिए रखेंगे और उसके बाद उसके गांव में अंतिम संस्कार किया जाएगा."
कौन था शुभकरण सिंह?
शुभकरण सिंह की उम्र करीब 22 साल थी. वह दो बहनों का इकलौता भाई था, जिसके पिता चरणजीत सिंह स्कूल वैन ड्राइवर हैं और मां की पहले ही मौत हो चुकी है. शुभकरण सिंह के पास खुद की साढे 3 एकड़ जमीन है. इसके अलावा उसने कुछ जानवर भी पाले हुए थे. शुभकरण के पीछे अब उसके पिता, दादी और दो बहनें हैं. एक बड़ी बहन की शादी हो चुकी है. जबकि दूसरी छोटी बहन की शादी का जिम्मा शुभकरण पर ही था.
शुभकरण सिंह 2 साल पहले जब दिल्ली में किसान आंदोलन हुआ था तो उसमें भी किसान यूनियन की तरफ से शामिल हुआ था. भारतीय किसान एकता सिद्धपुर यूनियन से ताल्लुक रखने वाला शुभकरण सिंह बीती 13 फरवरी को दिल्ली की तरफ किसानों के साथ कूच करते हुए खनौरी बॉर्डर पर पहुंचा था.
कांग्रेस ने मोदी सरकार पर लगाया जान लेने का आरोप
कांग्रेस ने शुभकरण की मौत के लिए बीजेपी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा कि खनौरी बॉर्डर पर बठिंडा के युवा किसान शुभकरण सिंह की फायरिंग से मृत्यु बेहद पीड़ादायक है. उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने अब तक 750 किसानों की जान ले ली है.
सरकार से क्या चाहते हैं किसान?
पंजाब के किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए पेंशन, बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं करने, पुलिस के द्वारा दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने और 2021 की लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए 'इंसाफ', भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 की बहाली और साल 2020-21 में हुए किसान आंदोलन के दौरान मरने वाले किसानों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं.