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पंजाब में आटा-दाल स्कीम के स्मार्ट कार्ड रद्द, कैप्टन सरकार का फैसला

पंजाब में कैप्टन सरकार ने पूर्व की अकाली-बीजेपी गठबंधन सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आटा-दाल स्कीम के लाभार्थियों के स्मार्ट कार्ड रद्द कर दिए हैं. पंजाब सरकार ने ऐलान किया है कि वेरीफिकेशन किए जाने के बाद नए सिरे से ये स्मार्ट कार्ड जारी किए जाएंगे.

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो- आईएएनएस) पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो- आईएएनएस)

पंजाब में कैप्टन सरकार ने पूर्व की अकाली-बीजेपी गठबंधन सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आटा-दाल स्कीम के लाभार्थियों के स्मार्ट कार्ड रद्द कर दिए हैं. पंजाब सरकार ने ऐलान किया है कि वेरीफिकेशन कराए जाने के बाद नए सिरे से ये स्मार्ट कार्ड जारी किए जाएंगे. बता दें कि इस योजना के तहत गरीबों को हर महीने आटा और दाल मुफ्त दिया जाता है. इस स्कीम पर पहले कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सवाल उठा चुकी है.

कार्ड के नीले रंग पर हुआ बवाल

अकाली-बीजेपी शासन के दौरान भी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने आटा-दाल स्कीम के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की थी. तब कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया था कि अकाली दल ने अपने चहेतों और अपने कार्यकर्ताओं के फर्जी स्मार्ट कार्ड बनाकर उन्हें इस योजना का लाभ दिया है जबकि गरीबों को इससे कोई फायदा नहीं हो रहा. साथ ही जब पंजाब में कैप्टन सरकार बनी तो उसने तय किया कि योजना के तहत नीले रंग के नए कार्ड नहीं जारी करने का फैसला किया था.

दरअसल, इस नीले कार्ड पर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और तत्कालीन खाद्य मंत्री आदेश प्रताप कैरों की तस्वीरें छपी हुई थी. साथ ही कैप्टन अमरिंदर सिंह का मानना है कि आटा दाल स्कीम के तहत कई ऐसे लोगों को भी नीले कार्ड जारी कर दिए गए जिन्हें मुफ्त अनाज की जरूरत नहीं है और वो लोग पहले से ही आर्थिक रुप से संपन्न हैं. CM अमरिंदर का मानना है कि अकाली दल ने अपने चाहने वालों को इस तरह के कार्ड बनाकर लाभान्वित करने की कोशिश की.

क्या है आटा-दाल स्कीम

आटा-दाल स्कीम को पंजाब में पूर्व की अकाली-बीजेपी गठबंधन सरकार ने शुरू किया था. इस योजना के तहत गरीबों को हर महीने आटा और दाल मुफ्त दिया जाता है. इस योजना को लेकर कैप्टन सरकार का कहना है कि इस पूर्व अकाली-बीजेपी सरकार ने ऐसे लोगों को भी आटा-दाल स्कीम के तहत कार्ड जारी किए जो कि गरीबी रेखा से नीचे नहीं हैं बल्कि आर्थिक रुप से काफी संपन्न हैं. कैप्टन सरकार ने तर्क दिया था कि इस योजना का लाभ जरुरतमंदों तक नहीं पहुंच रहा है.

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