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Beat Report: AAP में फूट के बीच विधायकों को व्हिप, 'विश्वास मत' पेश कर सकती है मान सरकार

पंजाब की आम आदमी पार्टी ने मजदूर दिवस के अवसर पर एक दिवसीय विशेष विधानसभा सत्र बुलाया है. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, सरकार इस सत्र का इस्तेमाल विश्वास मत लाने के लिए कर सकती है ताकि आंतरिक उथल-पुथल के बीच अपनी स्थिति मजबूत कर सके. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि उनके पास पूर्ण विश्वास है और वो सदन में बहुमत साबित करने को तैयार हैं.

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AAP ने सभी विधायकों को पेश होने के लिए कहा. (Photo- ITGD)
AAP ने सभी विधायकों को पेश होने के लिए कहा. (Photo- ITGD)

पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने सभी विधायकों के लिए एक सख्त 'व्हिप' जारी किया है. आज विधानसभा का विशेष एक दिवसीय सत्र बुलाया गया है. पार्टी ने सभी विधायकों को सुबह 10 बजे तक सदन पहुंचने का आदेश दिया और बताया कि सत्र की शुरुआत 11 बजे से होगी.

पार्टी नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि किसी भी विधायक की गैर-मौजूदगी को अच्छा नहीं माना जाएगा. आधिकारिक तौर पर य सत्र अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर मजदूरों को सम्मान देने के लिए बुलाया गया. सरकार ने मजदूर संघ के प्रतिनिधियों को खास मेहमान के तौर पर आमंत्रित किया है.

सदन में मनरेगा (MGNREGA) में कथित बदलावों और श्रमिकों से जुड़े दूसरे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है. हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार इस सत्र का इस्तेमाल अपना बहुमत साबित करने के लिए कर सकती है.

विश्वास मत लाने की संभावना

आप सरकार सदन में 'विश्वास मत' पेश कर सकती है. मौजूदा हालात के बीच अपनी ताकत दिखाना मुख्यमंत्री भगवंत मान की रणनीति हो सकती है. अगर ये प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो विधानसभा के नियमों के मुताबिक अगले छह महीनों तक सरकार के खिलाफ कोई अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकेगा. अप्रैल 2026 की हालिया रिपोर्टों की मानें तो सरकार आंतरिक उथल-पुथल के बीच अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है.

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गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के रिटायर्ड प्रोफेसर कुलदीप सिंह ने इस पर अपनी राय दी है. उन्होंने बताया कि सत्र बुलाने की ये रणनीति राज्यसभा सांसदों के दलबदल के प्रभाव को कम करने की कोशिश हो सकती है. प्रोफेसर कुलदीप सिंह ने कहा, 'वैसे तो उन्होंने इसे मजदूर दिवस के लिए बुलाया है, लेकिन सदन में पारित कोई भी प्रस्ताव या बिल सरकार के प्रति विश्वास का ही प्रतीक माना जाता है. ये दिखाता है कि उनके पास संख्या बल है.'

कुलदीप सिंह ने आगे कहा, 'छह महीने की परंपरा अपनी जगह है, लेकिन अगर विधायक दल में फूट पड़ती है और राज्यपाल को लगता है कि सरकार ने बहुमत खो दिया है, तो व मुख्यमंत्री को कभी भी बहुमत सिद्ध करने के लिए कह सकते हैं. ये एक अस्थायी राहत है.'

ये विशेष सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब कुछ दिन पहले ही राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने पाला बदलकर बीजेपी का दामन थाम लिया है. 

मुख्यमंत्री भगवंत मान का रुख

मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि उनकी सरकार को विधानसभा के अंदर और बाहर 'पूर्ण विश्वास' हासिल है. उन्होंने फ्लोर टेस्ट की मांग को गैर-जरूरी बताया है. मान ने तर्क दिया कि उनके पास 94 विधायक हैं और हालिया बजट भी लगभग सर्वसम्मति से पारित हुआ था. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि अगर चुनौती दी गई तो वो सदन में बहुमत साबित करने को तैयार हैं.

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बता दें कि मुख्यमंत्री मान 5 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर दल बदल करने वाले सांसदों को वापस बुलाने की मांग करेंगे. वहीं, विपक्ष ने इस सत्र की टाइमिंग पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस, बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल ने पब्लिक हॉलिडे पर सत्र बुलाने की आलोचना की है. विपक्षी दलों का कहना है कि ये सत्र पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है और सरकारी खजाने पर बेमतलब का बोझ है.

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