पंजाब के गुरदासपुर में दो पुलिसकर्मियों की हत्या हो गई थी. आदियां गांव में चेक पोस्ट पर पुलिसकर्मियों की हत्या के में पंजाब पुलिस ने एक संदिग्ध को पकड़ा है और एक का एनकाउंटर कर दिया है, जबकि एक की तलाश जारी है. एनकाउंटर की जानकारी पंजाब पुलिस के बॉर्डर रेंज के डीआईजी संदीप गोयल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी. इस एनकाउंटर पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं.
गुरदासपुर के आदियां गांव में चेक पोस्ट पर एएसआई गुरनाम सिंह और कांस्टेबल अशोक कुमार की हत्या के मामले में 20 साल का दिलावर पकड़ा गया है. 20 साल का इंद्रजीत फरार है. डीआईजी संदीप गोयल ने एक आरोपी के एनकाउंटर की जानकारी दी, लेकिन वारदात में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी को लेकर कोई जानकारी नहीं दी. बाइक और पिस्तौल की बरामदगी से जुड़ा सवाल डीआईजी भी टाल गए.
उन्होंने कि हम कोर्ट में इसका जवाब दे देंगे. अभी जांच चल रही है. डीआईजी के मुताबिक, रणजीत को हथियार बरामदगी के लिए ले जा जाया जा रहा था, उससे पहले ही गाड़ी पलट गई और एनकाउंटर हो गया. सवाल ये भी है कि जिस पिस्तौल से इंस्पेक्टर जख्मी हुए और रणजीत ने जिससे कथित हमला किया, क्या उसी का इस्तेमाल पुलिसकर्मियो की हत्या में किया गया?
सवाल ये भी है कि संदिग्ध रणजीत का एनकाउंटर सुबह छह बजे हुआ. भागने के बाद उसे तीन घंटे का समय और एनकाउंटर तक बाइक-पिस्तौल कैसे मिल गए? रणजीत के रिश्तेदारों और परिवार का दावा है कि पुलिस ने उसे हिरासत में लेने से पहले इलाके से सीसीटीवी हटा दिए. ऐसा क्यों किया गया? परिवार का सवाल यह भी है कि कानूनी प्रक्रिया से निपटने की बजाय उसे 20 किलोमीटर दूर पुराणशाला गांव क्यों ले जाया गया? रणजीत के परिवार ने SHO गुरमीत सिंह की चोट की जांच की भी मांग की है और सवाल उठाया है कि यह चोट असली थी या खुद से लगी थी?
एनकाउंटर पर परिवार का दावा क्या?
परिवार के मुताबिक 19 साल का रणजीत गुरदासपुर कॉलेज से बीए का छात्र था, पुलिस 4 बजे उसके घर पहुंची और उससे घर में ही पूछताछ की, फिर अपने साथ ले गई. परिवार के मुताबिक उनको भी इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई कि उसे कहां ले जाया जा रहा है. गांव के सीसीटीवी और डीवीआर भी पुलिस अपने साथ ले गई, गुरुद्वारे तक का सीसीटीवी भी नहीं छोड़ा. उसके बाद सुबह ही परिवार को रणजीत के मारे जाने की खबर मिली.
एनकाउंटर पर पुलिस का कहना क्या?
पुलिस का दावा है कि शक के आधार पर रणजीत को देर रात घर से उठाया गया. फिर रात 2 से 3 बजे के बीच जांच कर रहे SHO और CIA स्टाफ रणजीत को लेकर वारदात में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी के लिए निकले. कोहरे के बीच रणजीत लेकर जा रही पुलिस की गाड़ी 23 किलोमीटर की दूरी पर पुलिस की गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया. गाड़ी पलट गई और इसके बाद रणजीत हिरासत से भाग गया.
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पुलिस का दावा है कि करीब तीन घंटे बाद बाइक से जा रहे रणजीत को पुलिस ने नाके पर रोका, लेकिन उसने पुलिस पर फायर झोंक दिया. जवाबी कारवाई में उसकी मौत हो गई, पुलिस के मुताबिक दिलावर, रणजीत और इंद्रजीत को आईएसआई से यह टास्क मिला था और 20 हज़ार में से 3 हज़ार एडवांस भी मिले थे. पुलिस ने इसे लेकर न तो फ़ोन, ना ही बैंक खाते या अन्य कोई तथ्य और तकनीकी जानकारी पुलिस ने साझा की.
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संदिग्धों के सीसीटीवी को लेकर सवाल पर डीआईजी संदीप गोयल ने कहा कि हमने वेरीफाई कर लिया, उसमें कुछ नहीं आया. पुलिस के मुताबिक फरार आरोपी इंद्रजीत भी उसी गांव का निवासी है. वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि इंद्रजीत अपाहिज है और बिना बैसाखी के चल नहीं पाता. लोग इंद्रजीत को आरोपी बनाए जाने पर भी सवाल उठा रहे हैं.
विपक्ष की मांग- CBI जांच हो
विपक्षी कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने सीबीआई जांच की मांग की है. विपक्षी दलों ने मानवाधिकार आयोग के दखल की भी मांग की है और एनकाउंटर को फर्जी बताया है. परिवार में रणजीत की मां और ताई, दोनों ने रणजीत को घर का इकलौता चिराग बताते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने इसे बुझा दिया. रणजीत ही नहीं दिलावर और इंद्रजीत 20 साल की उम्र के नौजवान हैं.
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परिवार का कहना है कि अगर कहीं कोई इनका रोल था, तो फांसी दिलाते लेकिन साबित तो करते इनका क़सूर. रणजीत की मां ने कहा कि क़सूर बस इतना है कि वो उस रात घर नहीं था, दोस्त साथ गया था और सुबह 6 बजे लौटा और तभी से घर ही था अगर वो वारदात में होता तो घर क्यों रहता. तीन दिन फरार भी हो सकता था. रणजीत के पिता कुछ साल से सऊदी अरब में हैं.