प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने शुक्रवार सुबह पंजाब के कैबिनेट मंत्री और आप नेता संजीव अरोड़ा के लुधियाना स्थित घर पर छापेमारी की. सुबह जब ED की टीम मंत्री के आवास पर पहुंची, तो वहां सबसे पहले दस्तावेजों की जांच शुरू की गई. सुरक्षा को देखते हुए घर के बाहर केंद्रीय पुलिस बल के जवानों को भी तैनात किया गया. जानकारी के मुताबिक, जांच एजेंसी के रडार पर केवल मंत्री संजीव अरोड़ा ही नहीं, बल्कि उनके बिजनेस पार्टनर्स भी हैं. यह पूरी कार्रवाई लुधियाना, जालंधर, चंडीगढ़ और गुरुग्राम समेत कुल 13 ठिकानों पर एक साथ की गई.
इस रेड पर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया के 'X' पर लिखा कि पिछले तीन दिनों में आप नेता के यहां यह दूसरी रेड है. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए पूछा कि अब तक अनगिनत रेड में क्या एक रुपया भी काला धन मिला? केजरीवाल इसे सत्ता के लिए की जा रही 'ओछी राजनीति' करार दिया.
जमीन घोटाले से लेकर स्टॉक मार्केट और सट्टेबाजी तक फैला है मामला
जांच एजेंसी के रडार पर केवल मंत्री संजीव अरोड़ा ही नहीं, बल्कि उनके लुधियाना स्थित बिजनेस पार्टनर हेमंत सूद और जालंधर के कारोबारी चंद्रशेखर अग्रवाल भी हैं. यह मामला 'हैम्पटन स्काई रियल्टी' नाम की कंपनी से जुड़ी लैंड डील से शुरू हुआ था, लेकिन अब इसमें कई और गंभीर आरोप जुड़ गए हैं.
ED की जांच में सामने आया है कि संजीव अरोड़ा की कंपनी ने पंजाब में नियमों के खिलाफ जाकर जमीन का इस्तेमाल बदला. साथ ही, उन पर शेयर बाजार में हेराफेरी, फर्जी सेल दिखाकर शेयरों की कीमत बढ़ाने और दुबई से सट्टेबाजी के काले धन को भारत में सफेद करने के भी आरोप हैं. इसके अलावा, संजीव के बेटे और कंपनी के एमडी काव्या अरोड़ा के ठिकानों पर भी तलाशी ली गई, वह भी अब जांच के दायरे में हैं.
जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. आरोप है कि जालंधर के कारोबारी चंद्रशेखर अग्रवाल, जो एक क्रिकेट बुकी के रूप में जाने जाते हैं, अपने सट्टेबाजी के अवैध कारोबार और हवाला के पैसे को संजीव अरोड़ा की कंपनियों के जरिए रियल एस्टेट में निवेश कर रहे थे. संजीव पर अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर इन अवैध ऑपरेटरों को संरक्षण देने और उसके बदले मुनाफा कमाने का भी संदेह है.
इसके अलावा, मंत्री की कंपनियां फर्जी एक्सपोर्ट बिलों और गैर-मौजूद GST संस्थाओं से खरीदारी दिखाकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी के शक में भी हैं. हेमंत सूद की कंपनी 'फाइंडोक फिनवेस्ट' पर आरोप है कि उसने इन अवैध पैसों को स्टॉक मार्केट के जरिए ठिकाने लगाने में मदद की. फिलहाल, FEMA (फेमा) के तहत चल रही इस कार्रवाई में अधिकारी घर के भीतर और व्यावसायिक ठिकानों पर मौजूद हैं और बड़े पैमाने पर कागजातों और डिजिटल सबूतों को खंगाला जा रहा है.