देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए विश्विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के द्वारा लागू किए गए नए नियमों पर रोक लगा दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार इस मामले पर सुनवाई करते हुए 'यूजीसी प्रमोशन ऑफ़ इक्विटी रेग्युलेशंस 2026' के प्रावधानों में प्रथम दृष्टया अस्पष्टता है और इनके दुरुपयोग की आशंका है.
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी करते हुए 19 मार्च तक जवाब मांगा है. बीजेपी नेताओं ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे संविधान, सामाजिक समरसता और सनातन मूल्यों की रक्षा से जुड़ा अहम निर्णय बताया.
वहीं, विपक्षी पार्टियों के नेताओं की राय बटी हुई नजर आई आई. सपा प्रमुख अखिलेश यादव से लेकर बसपा अध्यक्ष मायावती और टीएमसी ने कोर्ट के फैसले को स्वागत करते हुए उचित कदम बताया तो आरजेडी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाया तो कांग्रेस ने बीजेपी पर असली मुद्दों से भटकाने का आरोप लगाया. ऐसे में हम बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर किस दल ने क्या कहा?
बीजेपी ने मोदी-शाह को दी क्रेडिट
बीजेपी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के स्टे का क्रेडिट अपने नेताओं को दे रहे हैं. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि मैं कोर्ट के फैसले के लिए देश के प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत सभी को धन्यवाद देता हूं. पीएम मोदी ने कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया. प्रधानमंत्री मोदी ही थे, जिन्होंने EWS को आरक्षण दिया. कोर्ट का यह निर्णय भारत की सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है. मोदी सरकार की पहचान है, सबका साथ, सबका विकास और सनातन की अखंड एकता है.
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विपक्षी दलों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यूजीसी पर गाली देने वाले सभी ज्ञानी, मैं पिछले 2 दिनों से संसद जा रहा हूं, किसी राजनीतिक दल के किसी सदस्य ने इस पर चर्चा तक करना मुनासिब नहीं समझा. पीएम मोदी के नेतृत्व में जिस केंद्र सरकार ने EWS को 10 फीसदी आरक्षण देकर गरीबों की सुध ली, उसी को गाली दी जा रही है. मोदी जी पर भरोसा रखिए. संविधान की धारा 14 और 15 के तहत ही देश के कानून चलेंगे, सुप्रीम कोर्ट ने वही किया, जो मैंने कहा था.
यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आया तो राम मंदिर बन गया था. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया कोई भी फैसला खुशी की बात है. सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है और कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करने की कोई जरूरत नहीं, सरकार आदेश का पालन करेगी. बिहार के डिप्टीसीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सरकार पूरी तरह पालन करेगी. साथ ही बीजेपी सांसद मनन कुमार मिश्र ने कहा कि हमारे शिक्षा मंत्री कह चुके हैं कि किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा. अब कोर्ट के फैसले के बाद सरकार को कमियां दूर करने का मौका मिल गया है.
बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला न्याय है. नए नियम एक समुदाय को निशाना बनाकर लागू किया जा रहा था, और सुप्रीम कोर्ट ने देखा कि इससे टकराव हो सकता है और कमियां पाईं, और इसलिए उन पर रोक लगा दी. कोर्ट ने बड़े टकरावों को रोका है और मैं इस फैसले का पूरी तरह से स्वागत करता हूं,
सपा से बसपा और टीएमसी ने किया स्वागत
यूजीसी के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट के द्वारा रोक लगाए जाने पर विपक्ष बटा हुआ नजर आया. सपा से लेकर बसपा और टीएमसी ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने यूजीसी के रोक लगाए जाने पर कहा कि सच्चा न्याय किसी के साथ अन्याय नहीं होता है, माननीय न्यायालय यही सुनिश्चित करता है. कानून की भाषा भी साफ होनी चाहिए और भाव भी. बात सिर्फ नियम नहीं, नीयत की भी होती है. न किसी का उत्पीड़न हो, न किसी के साथ अन्याय. न किसी पर जुल्म-ज्यादती हो, न किसी के साथ नाइंसाफी.'
बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का आदेश उचित है, क्योंकि इन नए नियमों से सामाजिक तनाव का माहौल बन गया था. देश के अलग-अलग हिस्सों में इन नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए थे. यूजीसी ने देश भर के सरकारी और प्राइवेट विश्वविद्यालयों में जाति आधारित घटनाओं को रोकने के लिए नए नियम लागू किए हैं, जिससे सामाजिक तनाव का माहौल बन गया है. मौजूदा स्थिति को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट का UGC के नए नियमों पर रोक लगाने का फैसला उचित है.उन्होंने कहा कि देश में सामाजिक तनाव का ऐसा माहौल नहीं बनता, अगर यूजीसी नए नियमों को लागू करने से पहले सभी हितधारकों को भरोसे में लिया होता.
AP सांसद मलविंदर सिंह कंग ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को योग्यता पर विचार करना चाहिए, क्योंकि ऐसे नियम संस्थानों की स्वायत्तता और स्वतंत्रता को कमजोर करते हैं. मुझे लगता है कि सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण के बजाय योग्यता को ध्यान में रखते हुए अपना फैसला दिया है. वहीं, टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सही किया, क्योंकि यूजीसी की गाइडलाइन असंवैधानिक थी. शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अदालत ने अगर रोक लगाई है तो उसमें कुछ कमियां जरूर थी. अब नए नियम में किसी भी समाज के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए.
कांग्रेस-RJD ने बीजेपी पर साधा निशाना
कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और सत्ताधारी बीजेपी पर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया. भाजपा सरकार सिद्धांत को भूल गई है. सरकार का काम है कि यदि कहीं अशांति हो तो वहां शांति पैदा करे,लेकिन ये लोग वर्ग,जाति और धर्म के नाम पर देश में आग लगा रहे हैं ताकि लोगों को असल मुद्दों से ध्यान हट जाए.
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि किसी भी छात्र के साथ जाति के आधार पर भेदभाव न हो,इस पर फिर से चर्चा होनी चाहिए, क्योंकि यह एक संवेदनशील मुद्दा है. साथ ही कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव ने कहा कि समाज के एक वर्ग का दशकों से शोषण हुआ है और उनकी सुरक्षा के लिए कानून बने,लेकिन उससे किसी का अहित नहीं होना चाहिए. इसका भी ख्याल रखा जाना चाहिए.
आरजेडी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को जमकर घेरा. राज्यसभा सांसद मनोज झा ने'न्यायिक तटस्थता' को एक मिथक बताते हुए कानून द्वारा यथास्थिति बनाए रखने पर कटाक्ष किया. साथ ही प्रवक्ता सारिका पासवान ने कहा कि भाजपा सरकार ने उत्तर प्रदेश और बंगाल चुनावों को देखते हुए यह 'जुमला' गढ़ा था.आरजेडी ने बिहार पुलिस के एक पोस्ट के जरिए भी तंज कसा.
आरएली सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि जब यूजीसी ने नियम बनाए, तो सरकार को इसकी जानकारी थी, अब सरकार को सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखना चाहिए, जो भी छात्र, जिसमें SC/ST/OBC छात्र भी शामिल हैं,उन्हें रैगिंग या अपमानित करते हैं, उन्हें सजा मिलनी चाहिए. अब सरकार को तय करना है कि वह क्या करेगी. हम जनरल कैटेगरी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जनगणना के बाद ओबीसी के लिए आरक्षण बढ़ाया जाना चाहिए.
CPI सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि UGC गाइडलाइंस सुप्रीम कोर्ट के आदेश का नतीजा थीं. मोदी सरकार ने इसे कमजोर कर दिया था. सरकार को इस गाइडलाइन का दायरा बढ़ाना चाहिए था, लेकिन यह विवाद खड़ा किया गया है, और यह बीजेपी का मुद्दा है. छात्रों को इसकी वजह से नुकसान नहीं होना चाहिए.
जानिए कुमार विश्वास ने क्या कहा?
कवि कुमार विश्वास ने कहा कि मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं. इस समय भारत किसी भी तरह के बंटवारे को बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं है. ऐसे समय में सरकारों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे राजनीति में किसी भी तरह की बंटवारे वाली लकीरें न खींचें. मैं करोड़ों लोगों की भावनाओं को समझने के लिए सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देता हूं, और मुझे उम्मीद है कि सरकार भी इसका उचित समाधान निकालेगी."