इस साल राज्य सभा को नया उपसभापति मिल सकता है. दरअसल, सदन के मौजूदा उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह का कार्यकाल इस साल अप्रैल में खत्म हो रहा है.
हरिवंश जेडीयू से दो बार राज्य सभा के सांसद रहे हैं. जेडीयू सूत्रों के अनुसार, तीसरी बार हरिवंश की जगह किसी नए चेहरे को राज्यसभा में भेज सकती है. ऐसे में राज्य सभा के उपसभापति के लिए चुनाव होना तय है.
हरिवंश 2018 से राज्य सभा के उपसभापति है, लेकिन तीसरी बार उनकी राज्य सभा में तीसरी पारी मुश्किल है, क्योंकि जेडीयू इस बार जातिगत समीकरणों को देखते हुए किसी दूसरे नेता को राज्य सभा भेजना चाहती है.
बिहार में खाली होंगी राज्यसभा की 5 सीटें
इस साल अप्रैल में बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें खाली होंगी. इन पांच में से चार सीटों पर एनडीए का जीतना तय है, जिसमें से दो सीटें जेडीयू के खाते में जाएंगी.
ऐसे में जेडीयू नेता और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर (पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के बेटे) की राज्य सभा में फिर से सीट मिलनी तय है और वे मोदी सरकार में मंत्री बने रहेंगे. जेडीयू के दूसरे सांसद हरिवंश को तीसरी बार राज्य सभा मिलनी मुश्किल है, क्योंकि उनको राज्य सभा के दो कार्यकाल मिल चुके हैं.
नीतीश से खट्टे-मीठे रिश्ते रहे हैं हरिवंश के
हरिवंश को नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है, लेकिन 2018 में उनको उपसभापति बनाने का प्रस्ताव बीजेपी की तरफ से आया जिसका नीतीश कुमार ने समर्थन किया था.
बाद में नीतीश और हरिवंश के रिश्ते खट्टे-मीठे रहे. जब 2022 में नीतीश कुमार ने एनडीए से अलग होकर महागठबंधन की बिहार में सरकार बनाई, तब हरिवंश ने उपसभापति पद से इस्तीफा नहीं दिया था.
जेडीयू की ये दलील
इसके पीछे राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश का तर्क था कि वे संवैधानिक पद पर हैं, लिहाजा इस्तीफा देना ठीक नहीं होगा. तब जेडीयू के नेताओं ने हरिवंश की आलोचना भी की थी.
उपसभापति के पद को लेकर जेडीयू नेताओं का कहना है कि उपसभापति कौन होगा, ये फैसला करने का काम बीजेपी है. दूसरी ओर लोक सभा में डिप्टी स्पीकर का पद 2019 से ही खाली है.