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प्राइवेटाइजेशन कर दलितों-पिछड़ों की नौकरियां खत्म करना चाहती है मोदी सरकार: कांग्रेस

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बृहस्पतिवार को कहा कि मोदी सरकार तेजी से निजीकरण कर रही है. इसके माध्यम से वह दलितों, पिछड़ों और आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों की नौकरियां खत्म करना चाहती है. और क्या-क्या बोला खड़गे ने...

मल्लिकार्जुन खड़गे (फाइल फोटो) मल्लिकार्जुन खड़गे (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ‘22 लाख करोड़ रुपये का हिसाब दे सरकार’
  • ‘चुनाव आए तो आई एससी-एसटी की याद’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बृहस्पतिवार को कहा कि मोदी सरकार तेजी से निजीकरण कर रही है. इसके माध्यम से वह दलितों, पिछड़ों और आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों की नौकरियां खत्म करना चाहती है. और क्या-क्या बोला खड़गे ने... 

‘चुनाव आए तो आई एससी-एसटी की याद’
कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बजट सत्र समाप्त होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि तमिलनाडु की एससी और एसटी सूची में संशोधन के लिए संविधान संशोधन आदेश छह साल से टंगा हुआ था. अब जब वहां विधानसभा चुनाव आ गए हैं तो मोदी सरकार ने इसे संसद से पारित कर दिया. लेकिन देर से ही सही सरकार ने ये काम किया और हम इसका स्वागत करते हैं.

‘22 लाख करोड़ का हिसाब दे सरकार’
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा हमने सदन में सबसे अहम मुद्दा पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और केरोसिन के बढ़ते दामों का उठाया. हमने दो दिन सदन में इस मुद्दे पर लड़ाई लड़ी. हमने सरकार से 6 साल में एक्साइज और सेस से जुटाए 22 लाख करोड़ रुपये का हिसाब भी मांगा लेकिन सरकार ने जवाब नहीं दिया.

‘हम जो किए हैं किए हैं’
खड़गे ने कहा कि संसद में दूसरा मुद्दा हमने किसानों का उठाया. हमारा किसान भाई 120 दिन से दिल्ली के बॉर्डर पर बैठा है. हमने कृषि कानून पर चर्चा करनी चाही लेकिन सरकार ने एक ही जवाब दिया ‘हम जो किए हैं किए हैं आपको क्या करना है कर लो’. जब ब्रूट मेजोरिटी होती है तो ऐसा ही होता है और बीजेपी तो ऐसा ही बर्ताव करती है. 

‘दलितों-पिछड़ों की नौकरियां खत्म करने की कोशिश’
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसद के सत्र में हमने एफडीआई का मुद्दा भी उठाया. सरकार घाटे वाले लोक उपक्रमों का निजीकरण करे समझ आता है, लेकिन वो फायदे वाले पीएसयू का भी निजीकरण कर रही है. बीमा में 74% एफडीआई ला रही है. हमने सरकार से कहा कि लोक उपक्रमों का नेचर सरकारी रहना चाहिए क्योंकि इनके सरकारी रहने से एससी, एसटी, ओबीसी और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को नौकरी में आरक्षण मिलता है. सरकार प्राइवेटाइजेशन को बढ़ावा देकर इन सभी के नौकरियों के अवसर कम करना चाहती है, खत्म करना चाहती है.

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