तमिलनाडु की सियासत में बुधवार को एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला हुआ जिसने पिछले करीब छह दशकों का इतिहास बदल कर रख दिया. विजय सरकार के आगामी कैबिनेट विस्तार में कांग्रेस शामिल होने जा रही है. राज्य में पूरे 59 साल के लंबे अंतराल के बाद यह पहली बार होगा जब कांग्रेस सरकार का हिस्सा बनेगी. कांग्रेस आलाकमान ने घोषणा की कि उसके दो विधायक एडवोकेट एस राजेश कुमार और पी. विश्वनाथन गुरुवार (21 मई) को सुबह 10 बजे राजभवन में मंत्री पद की शपथ लेंगे.
इस फैसले की जानकारी कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी. उन्होंने इसे कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया. वेणुगोपाल ने कहा कि 59 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कांग्रेस तमिलनाडु कैबिनेट में शामिल हो रही है. दरअसल, राजेश कुमार कन्याकुमारी जिले के किल्लियूर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीते हैं, जबकि पी विश्वनाथन मदुरै जिले की मेलूर सीट से चुने गए हैं.
एक्स पर वेणुगोपाल ने लिखा, 'कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु कैबिनेट में कांग्रेस विधायकों एडवोकेट राजेश कुमार और थिरू पी. विश्वनाथन को शामिल करने की मंजूरी दे दी है. वे आज (गुरुवार) मंत्री पद की शपथ लेंगे. यह हमारे लिए एक ऐतिहासिक अवसर है, क्योंकि कांग्रेस 59 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद तमिलनाडु कैबिनेट में शामिल हो रही है.'
वेणुगोपाल ने आगे कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि दोनों नए मंत्री तमिलनाडु की जनता की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी के जन-कल्याणकारी और प्रगतिशील विज़न को लागू करने के लिए काम करेंगे. पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने भी इस फैसले पर खुशी जताते हुए दोनों विधायकों को बधाई दी.
बता दें कि हाल ही में संपन्न हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने DMK के साथ चुनाव-पूर्व गठबंधन में चुनाव लड़ा था और उसके 5 विधायक जीते थे. हालांकि, चुनाव नतीजों (4 मई) के बाद जब सीएम विजय की पार्टी TVK 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के आंकड़े से थोड़ा पीछे रह गई, तो कांग्रेस ने DMK का साथ छोड़ दिया और विजय सरकार को समर्थन देने का फैसला किया.
क्यों टूटा DMK-कांग्रेस का पुराना रिश्ता?
यह कूटनीतिक बदलाव अचानक नहीं हुआ है. दरअसल, 2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के भीतर से सत्ता में हिस्सेदारी की मांग उठ रही थी. तत्कालीन मुख्यमंत्री और DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने साफ कह दिया था कि तमिलनाडु की राजनीति में 'पावर शेयरिंग फॉर्मूला' (गठबंधन सरकार) काम नहीं करेगा.
दूसरी ओर, साल 2024 में अपनी पार्टी लॉन्च करने वाले विजय ने शुरुआत से ही अपने सहयोगियों को सत्ता में उचित हिस्सेदारी देने का वादा किया था. डीएमके के कड़े रुख के कारण उसके और कांग्रेस के रिश्तों में खटास आ गई थी, जिसके चलते चुनाव प्रचार के दौरान भी राहुल गांधी और स्टालिन एक साथ मंच पर नजर नहीं आए थे.
तमिलनाडु की सत्ता का इतिहास (1952 से 2026)
तमिलनाडु में कांग्रेस की यह वापसी इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि 1967 के बाद पहली बार पार्टी सीधे सत्ता का हिस्सा बनेगी. 1952 से 1967 तक तमिलनाडु में कांग्रेस की सरकार रही थी. उस दौर में सी राज सी राजगोपालाचारी, के कामराज और एम भक्तवत्सलम जैसे दिग्गज नेताओं ने राज्य की कमान संभाली थी. लेकिन 1967 में DMK के सत्ता में आने के बाद कांग्रेस कभी सरकार का हिस्सा नहीं बन सकी.
हालांकि कांग्रेस ने अलग-अलग समय पर DMK और AIADMK दोनों के साथ गठबंधन किया, लेकिन उसे कभी सत्ता में हिस्सेदारी नहीं मिली. 2006 से 2011 के बीच DMK सरकार के दौरान भी कांग्रेस ने सरकार में हिस्सेदारी की मांग उठाई थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी.
TVK के शीर्ष नेता और लोक निर्माण व खेल विकास मंत्री आदव अर्जुन ने बुधवार को स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री विजय का विजन सभी सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने का है. कांग्रेस के अलावा VCK और IUML के प्रतिनिधियों के भी विजय कैबिनेट में शामिल होने की पूरी संभावना है. वहीं, पार्टी ने पहले ही साफ कर दिया है कि AIADMK के बागी विधायकों को कैबिनेट में कोई जगह नहीं दी जाएगी.
तमिलनाडु कांग्रेस के अध्यक्ष के. सेल्वपेरुन्थागाई ने कहा कि कैबिनेट विस्तार और सरकार के कामकाज को लेकर सभी फैसले सामूहिक सहमति से लिए जा रहे हैं. गुरुवार सुबह होने वाला यह शपथ ग्रहण समारोह तमिलनाडु की राजनीति में गठबंधन सरकारों के एक नए युग की शुरुआत करने जा रहा है.