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भारत

2015 की बिजनेस की बड़ी बातें

2015 की बिजनेस की बड़ी बातें
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साल 2015 में भारतीय अर्थव्यवस्था को मजूबत करने की दिशा में कई कदम उठाए गए. इस साल केन्द्र सरकार को जहां सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें सौपी गईं, वहीं आरबीआई ने भी ग्राहकों को फायदा पहुंचाने के लिए कई बार नीतिगत दरों में कटौती की.

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60 साल से ज्यादा पुराने कमोडिटी रेगुलेटर वायदा बाजार आयोग (एफएमस) का इस साल 28 सितंबर को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) में विलय हो गया है. इस विलय का प्रस्ताव 12 साल पहले दिया गया था.
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भारतीय रिजर्व बैंक ने इस साल 15 जनवरी से लेकर 29 सितंबर तक चार बार रेपो रेट में कटौती की. बैंकों ने रेपो दर में 1.25 प्रतिशत की कटौती का केवल आधा ही लाभ ग्राहकों को दिया. फिलहाल रेपो दर इस समय 6.75 प्रतिशत है. 

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इस साल केंद्रीय कर्मचारियों को एक बड़ी सौगात देते हुए सातवें वेतन आयोग ने केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. आयोग ने कर्मचारियों के वेतन में कुल 23.5 फीसदी बढ़ोतरी करने की सिफारिश की है. इसमें 15 प्रतिशत बेसिक सैलरी पर और 25 फीसदी भत्तों में बढ़ोतरी शामिल है.
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विदेशी बैंक HSBC ने भारत में अपना कारोबार बंद करने का फैसला किया है. बैंक ने वैश्विक निजी बैंकिंग में भारतीय कारोबार की समीक्षा के बाद इसे बंद करने का फैसला लिया है.
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस साल 5 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी में गोल्ड बॉन्ड सहित तीन योजनाएं लॉन्च की. इन तीन योजनाओं में स्वर्ण मौद्रीकरण योजना (जीएमएस), सार्वभौमिक स्वर्ण बांड योजना और स्वर्ण सिक्का एवं बुलियन योजना शामिल हैं.
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इस साल सरकार ने भारत में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के मकसद से एफडीआई नियमों को आसान करने का फैसला लिया है जिसमें एफडीआई प्रस्ताव की लिमिट को 3,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है. इसके अलावा सरकार 15 सेक्टरों में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ा दी है.
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