पूर्वोत्तर क्षेत्र में अब तक के सबसे बड़े आत्मसमर्पण कार्यक्रम में 9 समूहों के 1855 उग्रवादियों ने केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम के समक्ष आत्मसमर्पण किया.
इस मौके पर रंगारंग कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ.
लोकनृत्य प्रस्तुत करते स्थानीय कलाकार.
पूर्वोत्तर में चिदंबरम के समक्ष 1855 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया.
अपने कमाण्डरों के नेतृत्व में उग्रवादियों ने 201 हथियार और गोलाबारूद सौंपे.
जिन भूमिगत संगठनों के उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया उनके नाम हैं, ऑल आदिवासी नेशनल लिबरेशन आर्मी, संथाल टाइगर फोर्स, बिरसा कमांडो फोर्स, आदिवासी कोबरा मिल्रिटी ऑफ असम, कुकी लिबरेशन आर्मी, कुकी लिबरेशन आर्गेनाइजेशन, हमार पीपुल्स कन्वेंसन, युनाइटेड कुकीगाम डिफेंस आर्मी और कुकी रिवोल्यूशनरी आर्मी.
गोगोई ने उल्फा के कमाण्डर इन चीफ परेश बरूआ से शांति के लिये बातचीत करने की अपील दोहराते हुए कि बातचीत के रास्ते सभी के लिये खुले हैं.
गोगोई ने कहा, ‘आपने सशस्त्र संघर्ष को जारी रखने की निष्फलता का एहसास किया. यह समूचे देश के लिये अच्छा संदेश है कि उग्रवाद से किसी को लाभ नहीं पहुंचने वाला है. समस्या लोकतांत्रिक प्रक्रिया से ही सुलझ सकती है.’
इस मौके पर असम के मुख्यमंत्री गोगोई ने कहा कि आत्मसमर्पण का श्रेय कमाण्डरों और समाज को जाता है.
चिदम्बरम ने कहा कि उल्फा और एनडीएफबी शांति प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं और अन्य उग्रवादी गुटों के साथ बातचीत सम्पन्न होने के करीब है जो देश के लिये अच्छा है.
समर्पण करने वालों में आदिवासी संथाल संगठन के पांच बड़े जातीय समूहों के उग्रवादी शामिल थे जो ऊपरी असम में सक्रिय थे.
उग्रवादियों ने बड़ी संख्या में हथियार भी सौंपे.
अपने कमाण्डरों के नेतृत्व में उग्रवादियों ने 201 हथियार और गोलाबारूद सौंपे.
चिदम्बरम ने कहा कि उल्फा और एनडीएफबी शांति प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं और अन्य उग्रवादी गुटों के साथ बातचीत सम्पन्न होने के करीब है जो देश के लिये अच्छा है. ‘उम्मीद है अन्य भी अनुसरण करेंगे.’
गृहमंत्री ने कहा, ‘पिछले कुछ साल में हम कई बड़े समूहों तक पहुंचे जो हमारे लोकतंत्र की मजबूती को साबित करता है.’ उन्होंने आत्मसमर्पण करने वालों को महात्मा गांधी मौलाना अब्दुल कलाम आजाद और सरदार वल्लभभाई पटेल के शब्दों तथा इस बात को याद रखने को कहा कि सभी भारतीय एक हैं और भारत में सभी के लिये जगह है.
चिदम्बरम ने कहा, ‘अतीत को पीछे छोड़ दो और भविष्य को सकारात्मक ढंग से देखो. हम आप तक पहुंचेंगे. आप उम्मीद खुशी आशावाद तथा भाईचारे के प्रति प्रेम के साथ आगे बढ़ो.’
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ‘सभी मतभेद बातचीत सलाहमशविरे और प्रयास से सुलझाये जा सकते हैं.’
समारोह में मुख्यमंत्री तरूण गोगोई सेना के तीन और चार कोर के जीओसी तथा पुलिस महानिदेशक जयंत नारायण चौधरी भी मौजूद थे.
चिदंबरम ने इस मौके पर कहा, ‘आपके पास सार्थक जीवन जीने, परिवार बनाने भारत के निर्माण तथा भारत एवं असम के भविष्य में योगदान के लिये कई साल हैं. मैं भारत की ओर से आपका स्वागत करता हूं और एक खुशहाल जीवन की कामना करता हूं.’
अपने कमाण्डरों के नेतृत्व में उग्रवादियों ने 201 हथियार और गोलाबारूद सौंपे.
जिन भूमिगत संगठनों के उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया उनके नाम हैं, ऑल आदिवासी नेशनल लिबरेशन आर्मी, संथाल टाइगर फोर्स, बिरसा कमांडो फोर्स, आदिवासी कोबरा मिल्रिटी ऑफ असम, कुकी लिबरेशन आर्मी, कुकी लिबरेशन आर्गेनाइजेशन, हमार पीपुल्स कन्वेंसन, युनाइटेड कुकीगाम डिफेंस आर्मी और कुकी रिवोल्यूशनरी आर्मी.
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ‘भारत सरकार उग्रवादियों का वापस मुख्य धारा में स्वागत करती है. हमारा मानना है कि हमारे यहां गणतंत्र और लोकतंत्र है जहां हर किसी की आवाज सुनी जाती है. हर कोई सम्मान के साथ जीने का हकदार है.’
चिदंबरम ने कहा, ‘मैं आप सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि भारत और असम की सरकार आपके साथ सम्मान और गरिमा के साथ भारत के नागरिक की तरह बर्ताव करेंगे.’
इस मौके पर चिदंबरम ने कहा, ‘आज का दिन ऐतिहासिक है. इस तरह की घटना बार-बार नहीं होती जब उग्रवाद की राह पर चलने वाले इतने समूहों ने एक साथ शांति, मेल-मिलाप और भाईचारे की राह अपनाई हो.’
इनमें तीन कुकी और एक एचएमएआर समूह का उग्रवादी था.
समर्पण करने वालों में आदिवासी संथाल संगठन के पांच बड़े जातीय समूहों के उग्रवादी शामिल थे जो ऊपरी असम में सक्रिय थे.