राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि 'समाज केवल कानून से नहीं, समाज संवेदना से चलता है.' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज में अपनेपन की भावना को लगातार जागरूक रखना आवश्यक है. भागवत ने कहा कि भारत तभी विश्व गुरु बनेगा जब वह दुनिया को यही अपनेपन का सिद्धांत सिखाएगा. उन्होंने प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच समानताएं बताते हुए कहा कि जिसे हमारी परंपरा 'ब्रह्म' या 'ईश्वर' कहती है, उसे आज विज्ञान 'यूनिवर्सल कॉन्शसनेस' कहता है.