पिछले हफ्ते जब बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने राजस्थान के तीन कांग्रेस सांसदों पर MPLADS फंड हरियाणा में खर्च करने का आरोप लगाया, उसी समय आम नागरिकों के एक ऑनलाइन ग्रुप ने समाजवादी पार्टी की पहली बार सांसद बनीं इकरा चौधरी की खुलकर तारीफ की. इकरा उन गिने-चुने सांसदों में रहीं, जिनका MPLADS डैशबोर्ड पूरे दस्तावेज और जियोटैग तस्वीरों के साथ पूरी तरह अपडेट था.
‘ये ठीक करके दिखाओ’ कैंपेन ने जहां वाराणसी से सांसद होने के नाते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पारदर्शिता की सराहना की, वहीं दर्जनों सांसदों को फंड के गलत या अधूरे इस्तेमाल के लिए सवालों के घेरे में भी खड़ा किया. इस अभियान को देशभर से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है और लोग अपने-अपने सांसदों से सवाल पूछ रहे हैं.
बता दें कि भारत में कुल 790 सांसद (लोकसभा के 545 और राज्यसभा के अधिकतम 245) होते हैं. हर सांसद को अपने इलाके के विकास के लिए हर साल 5 करोड़ रुपये खर्च करने का अधिकार होता है. ये पैसा MPLADS (सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना) के तहत मिलता है. लोकसभा सांसद अपने क्षेत्र में 5 करोड़ रुपये तक के काम जिला कलेक्टर को सुझा सकते हैं. राज्यसभा सांसद अपने राज्य के एक या एक से ज्यादा जिलों में काम सुझा सकते हैं.
ये अभियान चलाने वाला ‘ये ठीक करके दिखाओ’ नाम का एक्स (X) अकाउंट साल 2025 में भी एक ऑनलाइन चैलेंज चला चुका है, जिसमें नेता और अफसरों को खराब सड़कों, गड्ढों और गंदगी की तस्वीरें दिखाकर सुधार की चुनौती दी गई थी. इस अकाउंट को उत्तर प्रदेश के एक ऑनलाइन एक्टिविस्ट चलाते हैं, जो खुरपेंच नाम से जाने जाते हैं. उनकी टीम अब लोगों को ये देखने के लिए प्रेरित कर रही है कि सांसदों ने MPLADS का पैसा कैसे खर्च किया और क्या काम के सबूत सही तरीके से अपलोड किए गए हैं या नहीं.
सरकारी डैशबोर्ड से निकाले गए इन आंकड़ों के आधार पर सभी पार्टियों के सांसद जांच के दायरे में आए हैं.
आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने 'काम पूरा' दिखाने के लिए कोलकाता के एक कैफे की फोटो अपलोड की, जो गूगल रिवर्स सर्च में सालों पुरानी निकली.
असल सवाल यह है कि हजारों करोड़ रुपये की इस योजना पर अब तक गंभीर सार्वजनिक निगरानी क्यों नहीं हुई?
हम अक्सर कहते हैं कि देश में भ्रष्टाचार है, लेकिन शायद ही हम ये पूछते हैं कि हमारे चुने हुए सांसद अपने इलाके के लिए असल में कर क्या रहे हैं. बहुत से मतदाताओं को यह तक नहीं पता कि MPLADS जैसी कोई योजना होती है.
अब तक चर्चा बड़े घोटालों और बड़े नामों तक सीमित थी.
‘ये ठीक करके दिखाओ’ अभियान ने इस बहस को ज़मीनी स्तर पर ला दिया कि कौन सी सड़क बनी, कौन सा जिम बना, फोटो असली है या नहीं और पैसा वाकई खर्च हुआ या नहीं.
MPLADS क्या है?
1993 में शुरू हुई MPLADS योजना के तहत सांसद हर साल 5 करोड़ रुपये तक के विकास कार्य सुझा सकते हैं. इस योजना को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) चलाता है. काम का क्रियान्वयन जिला प्रशासन करता है.
सांसद सिर्फ काम सुझाते हैं, भुगतान या निर्माण में उनकी सीधी भूमिका नहीं होती. नियम है कि हर काम की जियोटैग फोटो और प्रगति रिपोर्ट पोर्टल पर डाली जाए. इसके बावजूद, ऑडिट रिपोर्ट्स में बार-बार देरी, अधूरी जानकारी और बिना खर्च हुए फंड की बात सामने आती रही है.
राजीव प्रताप रूडी से हुई सवालों की शुरुआत
नए साल की पूर्व संध्या पर सारण से बीजेपी सांसद राजीव प्रताप रूडी का MPLADS डेटा सामने आया. उनके कई कामों में फोटो नहीं थी, कहीं एक ही फोटो बार-बार अपलोड की गई थी. लोगों ने सवाल उठाया, '20 कंप्यूटर और UPS पर 28 लाख रुपये कैसे खर्च हो गए?'
इसके बाद कांग्रेस, बीजेपी, TMC और अन्य दलों के सांसदों के रिकॉर्ड खंगाले जाने लगे.
राहुल गांधी के MPLADS रिकॉर्ड में भी कम काम पूरे दिखे और कई जगह फोटो नहीं थीं.
DMK सांसद दयानिधि मारन ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे 'फेक न्यूज' बताया और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी.
नगालैंड के कांग्रेस सांसद एस सुपोंगमेरेन जमीर के यहां भी खर्च तो दिखा, लेकिन फोटो नहीं.
डिंपल यादव के मामले में भी सवाल उठे, लेकिन उन्होंने मंत्रालय को पत्र लिखकर डेटा सुधारने की मांग की.
कुछ सांसदों ने जवाब दिए, कुछ ने हमला किया, और कई ने चुपचाप अपनी वेबसाइट अपडेट कर ली.
किसने पास किया टेस्ट?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का MPLADS रिकॉर्ड सबसे पारदर्शी बताया गया जहां हर काम की डिटेल जियोटैग फोटो के साथ अपलोड थी.
वहीं समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा चौधरी को भी सबसे ज़्यादा सराहना मिली. उनका पूरा रिकॉर्ड अपडेट है, पहले और बाद की तस्वीरों के साथ.
आप कैसे जांच सकते हैं अपने सांसद का काम?
कोई भी व्यक्ति www.mplads.gov.in वेबसाइट पर जाकर अपने सांसद का नाम या क्षेत्र डालकर यह देख सकता है:
कितना पैसा मिला
कितना खर्च हुआ
कितने काम पूरे हुए
फोटो और भुगतान की जानकारी
‘ये ठीक करके दिखाओ’ अभियान का कहना है कि हम आरोप नहीं लगा रहे, हम जवाब मांग रहे हैं. क्योंकि सार्वजनिक पैसा है तो सार्वजनिक जवाब भी होना चाहिए.