राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे संसद के विशेष सत्र का दूसरा दिन महिला आरक्षण बिल के नाम रहा. आज केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पेश किया. इस बिल को नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल नाम दिया गया है. इस बिल के पेश करने का प्रस्ताव पास हो गया है. अब कल इस बिल पर चर्चा होगी.
इससे पहले पुरानी संसद में लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों का एक साथ फोटो शूट हुआ और फिर पीएम मोदी के साथ सभी सांसद पदयात्रा करते हुए नई संसद पहुंचे. इसमें पीएम मोदी, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे समेत लोकसभा और राज्यसभा के सभी सदस्य मौजूद रहे.
यह पहला मौका नहीं है, जब महिला आरक्षण बिल सदन के पटल पर आया. 1996 से 27 साल में कई बार यह अहम मुद्दा संसद में उठ चुका है. लेकिन दोनों सदनों में पास नहीं हो सका. 2010 में तो हंगामे के बीच राज्यसभा में पास भी हो गया था. लेकिन लोकसभा से पारित नहीं हो सका था.
राज्यसभा की कार्यवाही कल 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है.
मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर राज्यसभा में हंगामा होने लगा. इस बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण खड़ी हुईं और उन्होंने कहा, हम विपक्ष के नेता का सम्मान करते हैं लेकिन यह व्यापक बयान देना कि सभी पार्टियां ऐसी महिलाओं को चुनती हैं जो प्रभावी नहीं हैं, बिल्कुल अस्वीकार्य है. हम सभी को हमारी पार्टी, पीएम ने सशक्त बनाया है. वित्त मंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक सशक्त महिला हैं.
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, अनुसूचित जाति की महिलाओं की साक्षरता दर कम है और यही कारण है कि राजनीतिक दलों को कमजोर महिलाओं को चुनने की आदत है और वे उन लोगों को नहीं चुनते हैं जो शिक्षित हैं और लड़ सकते हैं.
राज्यसभा सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में कहा कि पीएम मोदी हमको क्रेडिट देते नहीं वो अलग बात है, लेकिन मैं उनको ध्यान दिलाना चाहता हूं कि हम राज्यसभा में इस बिल को 2010 में पहले ही पास करा चुके हैं. खड़गे जब सदन में बोलने के लिए उठे तो थोड़ी ही देर में हंगामा शुरू हो गया. खड़गे ने कहा कि OBC महिलाओं को भी आरक्षण मिले.
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पेश होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राज्यसभा में संबोधन हुआ. अपने संबोधन में उन्होंने कहा,'राज्यसभा में हमारे पास बहुमत नहीं था, लेकिन हमें भरोसा था कि राज्यसभा राजनीतिक सोच से ऊपर उठकर देश के हित में फैसले लेगी देश. आपकी (सांसदों) परिपक्वता के कारण, हम कठिन निर्णय लेने में सक्षम हुए. आधुनिकता अब अनिवार्यता बन गई है.'
महिला आरक्षण बिल के तहत विधानसभा की 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. इसके अलावा लोकसभा में भी महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिलेगा. यानी 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी. साथ ही दिल्ली विधानसभा में भी महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिलेगा.
महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पेश कर दिया गया है. कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस बिल को संसद में पेश किया. बता दें कि इससे पहले पीएम मोदी ने सभी दलों से इस बिल का समर्थन करने की अपील की थी. केंद्रीय मंत्री ने जब यह बिल पेश किया तो संसद में जोरदार हंगामा हुआ.
संसद ने बोलते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि हिन्दुत्व की चर्चा तो होती है, क्या हम 'हिन्दीत्व' पर आ जाएंगे?' उनके भाषण के दौरान बाद में हंगामा भी होता हुआ दिखा. दरअसल, स्पीकर ओम बिड़ला सहित कई सदस्य उनके बैठ जाने की मांग कर रहे थे, लेकिन अधीर रंजन चौधरी ने अपनी बात रखनी जारी रखी. इस दौरान ही सदन में जमकर नारेबाजी होने लगी. इस दौरान स्पीकर ओम बिड़ला अधीर रंजन को अपनी बात खत्न करने के लिए कहते रहे. ओम बिड़ला ने कहा कि आज का दिन महिला आरक्षण के लिए है. इसलिए बाकी बातें बाद में रखिएगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अटल जी के कार्यकाल में कई बार महिला आरक्षण बिल पेश किया गया. लेकिन उसे पार कराने के लिए आंकड़े नहीं जुटा पाए और उसके कारण वह सपना आधूरा रह गया. महिला को अधिकार देने का उनकी शक्ति को आकार देने का काम करने के लिए भगवान ने मुझे चुना है. पीएम मोदी ने महिला आरक्षण को 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' नाम दिया है.
बसपा प्रमुख मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण बिल के साथ है. लेकिन SC, ST/OBC कोटा सुनिश्चित होना चाहिए. आबादी के हिसाब से 50 प्रतिशत आरक्षण रहे तो अच्छा है. पहले SC, ST और अभी ओबीसी आरक्षण के साथ खिलवाड़ हो रहा है. उम्मीद है इस बार ये बिल पास होगा. मैं केंद्र सरकार द्वारा लाये जा रहे महिला आरक्षण बिल का समर्थन करतीं हूं.
पीएम मोदी ने आगे कहा कि यह समय अतीत की हर कड़वाहट को भुलाने का समय है. उन्होंने कहा कि मेरी तरफ से सभी को मिच्छामी दुक्कड़म. उन्होंने कहा,'आज संवत्सरी भी मनाई जाती है, यह एक अद्भुत परंपरा है. आज वह दिन है जब हम 'मिच्छामी दुक्कड़म' कहते हैं, इससे हमें किसी ऐसे व्यक्ति से माफी मांगने का मौका मिलता है, जिसे हमने जानबूझकर या अनजाने में ठेस पहुंचाई है. मैं भी कहना चाहता हूं ' मिच्छामी दुक्कड़म', संसद के सभी सदस्यों और देश के लोगों को. बता दें कि जैन धर्म के मुताबिक मिच्छामी का अर्थ क्षमा करने से और दुक्कड़म का अर्थ गलतियों से है. इसका मतलब होता है कि मेरे द्वारा जाने-अनजाने में की गई गतलियों के लिए मुझे क्षमा करें.
#WATCH | In the Lok Sabha of the new Parliament building, PM Narendra Modi says, "...I extend my heartiest welcome to all of you in this new Parliament building. This occasion is unprecedented in several ways. This is the dawn of Azadi ka Amrit Kaal..." pic.twitter.com/JbVM43eXLv
— ANI (@ANI) September 19, 2023
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन से अपने पहले संबोधन में कहा कि विज्ञान जगत में चंद्रयान-3 की गगनचुंबी सफलता हर देशवासी को गर्व से भर देती है. भारत के नेतृत्व में जी-20 का गरिमामय आयोजन, भारत के लिए यह गर्व का क्षण है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सभी सांसद पदयात्रा करते हुए नए संसद भवन पहुंच चुके हैं. उनके संसद भवन पहुंचने के बाद नई संसद की तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी सहित सभी सांसद बैठे नजर आ रहे हैं.
पुराने संसद भवन से पदयात्रा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सभी सांसद नए संसद भवन पहुंच गए हैं. कुछ देर बाद अब यहीं पर विशेष सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही शुरू होगी.
आज भारत 5वीं अर्थव्यवस्था पर पहुंचा है लेकिन पहले 3 के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है. मैं जिस स्थान पर हूं उस जानकारी के आधार और विश्व के गणमान्य लोगों से बातचीत करता हूं उस आधार पर कह रहा हूं कि दुनिया आश्वस्त है कि भारत टॉप 3 में पहुंचकर रहेगा... : PM @narendramodi
— AajTak (@aajtak) September 19, 2023
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संसद में संबोधन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए संसद भवन के लिए निकल गए हैं. उनके साथ सभी सांसद भी हैं. इस यात्रा के नई संसद पहुंचने के बाद ही आज संसद की कार्यवाही शुरू होगी.

प्रधामंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि इस भवन को सिर्फ पुरानी पार्लियामेंट कहकर छोड़ दें तो ऐसा नहीं होना चाहिए. इसलिए मेरी आपसे प्रार्थना है कि भविष्य में अगर सभी की सहमति हो तो इसे संविधान सदन के रूप में जाना जाए. ताकी यह हमेशा हमारे जीन की प्रेरणा बनी रहे. जब हम इसे संविधान सदन पुकारेंगे तो यह उन महापुरुषों की भी याद दिलाएगी, जो कभी संविधान सभा में बैठा करते थे. भावी पीढ़ी को यह तौहफा देने का अवसर जाने नहीं देना चाहिए.
आज नए संसद भवन में हम सब मिलकर नए भविष्य का श्री गणेश करने जा रहे हैं. आज हम यहां विकसित भारत का संकल्प दोहराना, फिर एक बार संकल्प बद्ध होना और उसका परिपूर्ण करने के लिए जी जान से जुटने के इरादे से नए भवन की तरफ प्रस्थान कर रहे हैं: PM @narendramodi
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अमृत काल के 25 वर्षों में भारत को बड़े कैनवास पर काम करना होगा. हमारे लिए छोटे-छोटे मुद्दों में उलझने का समय खत्म हो गया है. सबसे पहले, हमें आत्मनिर्भर भारत बनने का लक्ष्य पूरा करना होगा. यह समय की मांग है, यह हर किसी का कर्तव्य है. पार्टियां इसके आड़े नहीं आतीं. सिर्फ दिल चाहिए, देश के लिए चाहिए.
पीएम मोदी ने कहा कि मैंने लाल किले से कहा था- यही समय है, सही समय है. एक के बाद एक घटनाओं पर नजर डालें तो हर एक घटना इस बात की गवाह है कि आज भारत एक नई चेतना के साथ जाग उठा है. भारत एक नई ऊर्जा से भर गया है. यही चेतना और ऊर्जा करोड़ों लोगों के सपनों को संकल्प में बदल सकती है और उन संकल्पों को हकीकत में बदल सकती है.
संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यहीं पर 1947 में अंग्रेजी हुकूमत ने सत्ता हस्तांतरण किया. यह सेंट्रल हॉल उस प्रकिया का भी साक्षी है. हमारे राष्ट्रगान और तिरंगे को भी यहीं अपनाया गया. यहीं पर चार हजार से ज्यादा कानून पास हुए. इसी संसद में मुस्लिम बहन बेटियों को न्याय की जो प्रतीक्षा थी, शाहबानों केस के कारण गाड़ी कुछ उलटी पाटी पर चल गई थी. इसी सदन ने हमारी उस गलती को ठीक किया.
"आज हम विनम्रतापूर्वक डॉ. राजेंद्र प्रसाद, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और बीआर अंबेडकर के योगदान को याद करते हैं. हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आभारी हैं कि उन्होंने कल अपने भाषण में बोलते हुए नेहरू के प्रयासों का उल्लेख किया"- @kharge#NewParliamentBuilding pic.twitter.com/i4POmGpKU8
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पीएम मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत गणेश चतुर्थी की शुभकामनाओं के साथ की. उन्होंने कहा कि नए संसद भवन में हम नए भविष्य का श्री गणेश करने जा रहे हैं. आज हम यहां विकसित भारत का संकल्प दोहराकर फिर एक बार संकल्पबद्ध होकर और उसको पूर्ण करने के इरादे से नए भवन की तरफ प्रस्थान कर रहे हैं. ये भवन और उसमें भी यह सेट्रल हॉल एक प्रकार से हमारी भावनाओं से भरा हुआ है. हमे भावुक भी करता है और हमें हमारे कर्तव्य के लिए प्रेरित भी करता है. आजादी के पूर्व ये खंड एक प्रकार से लाइब्रेरी के रूप में इस्तेमाल होता था. बाद में यहां संविधान सभा की बैठक शुरू हुई. उसमें गहन चर्चा करके हमारे संविधान ने यहीं पर आकार लिया.
मल्लिकार्जुन खड़के ने कहा कि हम सभी आज यहां इस ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल में भारत की संसद की समृद्ध विरासत का जश्न मनाने के लिए एकत्र हुए हैं. इसी सेंट्रल हॉल में संविधान सभा की बैठक 1946 से 1949 तक हुई थी. आज हम विनम्रतापूर्वक डॉ. राजेंद्र प्रसाद, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और बीआर अंबेडकर के योगदान को याद करते हैं. हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आभारी हैं कि उन्होंने कल अपने भाषण में बोलते हुए नेहरू के प्रयासों का उल्लेख किया.
"अंग्रेजी हुकूमत से लेकर हमारी आजादी में अब तक हमने इस संसद के शानदार पल को अनुभव किया है. बाबा साहेब आंबेडकर ने हमें 395 आर्टिकल दिए हैं। मैं इस मंच पर खड़े होकर ऊंचा और उत्साहित महसूस कर रहा हूं"- @adhirrcinc#NewParliament #NewParliamentBuilding #ParliamentSpecialSession pic.twitter.com/TctS9hUDrv
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पीयूष गोयल ने कहा कि कल हम सभी ने इस भवन में सार्थक चर्चा की. आज नए संसद भवन में प्रवेश करना ऐतिहासिक पल है. इस अवसर में सभी को बधाई देना चाहता हूं. नया संसद भवन आत्मनिर्भर भारत की पहचना बनेगा. इस देश को नई ऊंचाइयों तक पीएम मोदी के नेतृत्व में हम सब लेकर जाएंगे. लक्ष्य बड़ा है और राह भी कठिन है. लेकिन हम अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे.
अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि आज हम ऐतिहासिक घटना के साक्षी बनने जा रहे हैं. अंग्रेजी हुकूमत से लेकर हमारी आजादी में अब तक हमने इस संसद के शानदार पल को अनुभव किया है. बाबा साहेब आंबेडकर ने हमें 395 आर्टिकल दिए हैं. इस अवसर का लाभ उठाते हुए, बिना किसी मलाल के और बिना कुछ कहे, मुझे कहना होगा कि मैं इस मंच पर खड़े होकर ऊंचा और उत्साहित महसूस कर रहा हूं, जिसने आकाशगंगा के बीच में ऐतिहासिक घटनाओं और कई महत्वपूर्ण घटनाओं का कारवां देखा है. ऐसे दिग्गज जिन्होंने इस प्रतिष्ठित सदन, जिसे संविधान सभा कहा जाता था, में भारत के संविधान को बनाने के लिए अपना दिमाग खपाया और कड़ी मेहनत की.
उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी को देश की आर्थिक वृद्धि और विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने में सक्षम बनाना आवश्यक है. भारत दुनिया की सबसे ऊंची अर्थव्यवस्था होने के बावजूद, हमारी प्रति व्यक्ति जीडीपी विकसित देशों की तुलना में बहुत पीछे है. इस आर्थिक विकास की चुनौती से निपटने के लिए विकास समर्थक सरकारी नीतियों, कम मुद्रास्फीति को बढ़ावा देने, ब्याज दरों को कम करने, बेरोजगारी को कम करने, कुशल कार्यबल को बढ़ावा देने, क्रय शक्ति को बढ़ाने, मांग को प्रोत्साहित करने और स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा क्षेत्र को बढ़ाने की आवश्यकता है.
मेनका गांधी ने संसद में कहा कि आज ऐतिहासिक दिन है. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में महिलाओं को बराबरी का अधिकार मिलने जा रहा है. महिला आरक्षण से हाशिए पर खड़ी महिलाओं की किस्मत बदल जाएगी. हम नए संसद भवन में जा रहे हैं. मैं 32 साल की उम्र में संसद आई. मेरे पति की मौत के 9 साल बाद. अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में मैंने बीजेपी ज्वाइन की थी.
महिला आरक्षण बिल के संसद में पेश होने की सूचना के बीच जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा,'मुख्य रूप से पुरुष राजनीतिक परिदृश्य के कठिन इलाके को स्वयं पार करने के बाद, मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि आखिरकार महिला आरक्षण विधेयक एक वास्तविकता बन जाएगा. आधी आबादी होने के बावजूद हमारा प्रतिनिधित्व बेहद कम है. यह एक बेहतरीन कदम है.'

पुराने संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्ल्किार्जुन खड़गे से बातचीत की.

महिला आरक्षण बिल आज ही पेश किया जाएगा. कानून मंत्री लोकसभा में इसे पेश करेंगे. बता दें कि महिला आरक्षण विधेयक में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी या एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव है. विधेयक में 33 फीसदी कोटा के भीतर एससी, एसटी और एंग्लो-इंडियन के लिए उप-आरक्षण का भी प्रस्ताव है. विधेयक में प्रस्तावित है कि प्रत्येक आम चुनाव के बाद आरक्षित सीटों को रोटेट किया जाना चाहिए.
(पॉलोमी साहा)
गुजरात बीजेपी सांसद नरहरि अमीन सांसदों के ग्रुप फोटो सेशन के दौरान बेहोश हो गए. वह अब ठीक हो गए हैं और फोटो सेशन में हिस्सा ले रहे हैं.


आज से देश को नई संसद मिल जाएगी. इससे पहले पीएम मोदी के नेतृत्व में सभी दलों के सांसदों ने पुरानी संसद में फोटो शूट में हिस्सा ले रहे हैं.
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी जब संसद पहुंचीं तो उनसे महिला आरक्षण बिल के बारे में सवाल किया गया. इसके जवाब में उन्होंने कहा, ये अपना है.
नई संसद में प्रवेश से पहले संसद में तैनात कर्मचारियों और सुरक्षाबलों के लिए नया ड्रेस कोड लागू किया गया है. नई संसद में पहले दिन की कार्यवाही के दौरान सुरक्षाकर्मी नई ड्रेस में नजर आए.

लोक सभा स्पीकर ने नए संसद भवन को आधिकारिक तौर पर संसद भवन का दर्जा दे दिया है. लोक सभा सचिवालय ने अधिसूचना भी जारी कर दी. यहां संसद सत्र शुरू करने के लिए ऐसा करना जरूरी होता है.

पिछले कुछ हफ्तों में, बीजद और बीआरएस समेत कई दलों ने बिल को फिर से लाने की मांग की थी. जबकि कांग्रेस ने भी रविवार को अपनी हैदराबाद कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया था.
2008 के विधेयक को कानून और न्याय संबंधी स्थायी समिति को भेजा गया था, लेकिन यह अपनी अंतिम रिपोर्ट में आम सहमति तक पहुंचने में विफल रहा. समिति ने सिफारिश की कि विधेयक को संसद में पारित किया जाए और बिना किसी देरी के कार्रवाई में लाया जाए.
कमेटी के दो सदस्य, जोकि समाजवादी पार्टी के थे, वीरेंद्र भाटिया और शैलेन्द्र कुमार ने यह कहते हुए असहमति जताई कि वे महिलाओं को आरक्षण प्रदान करने के खिलाफ नहीं थे, लेकिन जिस तरह से इस विधेयक का मसौदा तैयार किया गया था, उससे असहमत थे. उन्होंने सिफारिश की थी कि प्रत्येक राजनीतिक दल को अपने 20 प्रतिशत टिकट महिलाओं को वितरित करने चाहिए, आरक्षण 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए.
साल 2008 से पहले इस बिल को 1996, 1998 और 1999 में भी पेश किया गया था. गीता मुखर्जी की अध्यक्षता में एक संयुक्त संसदीय समिति ने 1996 के विधेयक की जांच की थी और 7 सिफारिशें की थीं. इनमें से पांच को 2008 के विधेयक में शामिल किया गया था, जिसमें एंग्लो इंडियंस के लिए 15 साल की आरक्षण अवधि और उप-आरक्षण शामिल था. इस बिल में यह भी शामिल था, अगर किसी राज्य में तीन से कम लोकसभा की सीटें हों, दिल्ली विधानसभा में आरक्षण और कम से एक तिहाई आरक्षण. कमेटी की दो सिफारिशों को 2008 के विधेयक में शामिल नहीं किया गया था. पहला राज्यसभा और विधान परिषदों में सीटें आरक्षित करने के लिए था और दूसरा संविधान द्वारा ओबीसी के लिए आरक्षण का विस्तार करने के बाद ओबीसी महिलाओं के लिए उप-आरक्षण के लिए था.
बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों ने हमेशा इसका समर्थन किया. हालांकि कुछ अन्य दलों ने महिला कोटा के भीतर ओबीसी आरक्षण की कुछ मांगों को लेकर इसका विरोध किया. अब एक बार फिर कई दलों ने इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक लाने और पारित करने की जोरदार वकालत की, लेकिन सरकार की ओर से कहा गया है कि उचित समय पर उचित निर्णय लिया जाएगा.
कांग्रेस ने महिला आरक्षण विधेयक को मोदी कैबिनेट की मंजूरी मिलने का स्वागत करते हुए कहा कि सर्वदलीय बैठक में इस पर चर्चा कर आम सहमति बनाई जा सकती थी. कांग्रेस ने कहा कि सरकार का यह फैसला कांग्रेस और UPA सरकार में उसके सहयोगी रहे दलों की जीत है, क्योंकि उन्हीं की सरकार के कार्यकाल में यह विधेयक राज्यसभा में पारित हुआ था.
कांग्रेस ने अपने पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा 16 जुलाई, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए उस पत्र को भी जारी किया, जिसमें महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल पारित कराने की मांग की गई थी.
करीब 27 सालों से लंबित महिला आरक्षण विधेयक अब संसद के पटल पर आएगा. आंकड़ों के मुताबिक, लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 15 फीसदी से कम है, जबकि राज्य विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व 10 फीसदी से भी कम है.
इस लोकसभा में 78 महिला सदस्य चुनी गईं, जो कुल संख्या 543 के 15 प्रतिशत से भी कम हैं. बीते साल दिसंबर में सरकार द्वारा संसद में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्यसभा में भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व करीब 14 प्रतिशत है. इसके अलावा 10 राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 10 फीसदी से भी कम है, इनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, ओडिशा, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा और पुडुचेरी शामिल हैं.

महिला आरक्षण विधेयक में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी या एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव है. विधेयक में 33 फीसदी कोटा के भीतर एससी, एसटी और एंग्लो-इंडियन के लिए उप-आरक्षण का भी प्रस्ताव है. विधेयक में प्रस्तावित है कि प्रत्येक आम चुनाव के बाद आरक्षित सीटों को रोटेट किया जाना चाहिए. आरक्षित सीटें राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में रोटेशन द्वारा आवंटित की जा सकती हैं. इस संशोधन अधिनियम के लागू होने के 15 साल बाद महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण समाप्त हो जाएगा.