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'हिंदू धर्म पर स्पष्ट हमला...', उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म वाले बयान को मद्रास HC ने बताया हेट स्पीच

तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए बयान को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि इस्तेमाल किए गए शब्द जनसंहार और सांस्कृतिक विनाश का संकेत देते हैं. हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस बयान पर सवाल उठाना हेट स्पीच नहीं है.

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उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को 'मिटाने' जैसी बातें की थी. (Photo: PTI)
उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को 'मिटाने' जैसी बातें की थी. (Photo: PTI)

तमिलनाडु के युवा कल्याण और खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म को लेकर दिए गए बयान पर चल रही सियासी और कानूनी बहस के बीच मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को एक अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि मंत्री द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा का अर्थ जनसंहार की ओर इशारा करता है और यह हेट स्पीच की श्रेणी में आती है.

यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उदयनिधि स्टालिन के बयान पर सवाल उठाए गए थे. आलोचकों ने मंत्री की टिप्पणी को सनातन धर्म का पालन करने वालों के खिलाफ ‘जनसंहार’ का आह्वान बताया था. हालांकि उदयनिधि स्टालिन ने बाद में इस व्याख्या को खारिज करते हुए कहा था कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है.

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मामले की सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, “यदि यह कहा जाए कि सनातन धर्म का पालन करने वाले लोगों का अस्तित्व नहीं होना चाहिए, तो इसके लिए सही शब्द ‘जनसंहार’ है. यदि सनातन धर्म को एक धर्म माना जाए, तो यह ‘रिलिजिसाइड’ यानी धर्म के विनाश की श्रेणी में आएगा.”

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कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह की भाषा लोगों के उन्मूलन की ओर इशारा करती है, चाहे वह किसी भी तरीके से हो, जिसमें इकोसाइड, फैक्टोसाइड और कल्चरसाइड जैसे रूप शामिल हैं.

कोर्ट ने तमिल भाषा में इस्तेमाल किए गए शब्द ‘सनातन ओझिप्पु’ की व्याख्या करते हुए कहा कि इसका स्पष्ट अर्थ सांस्कृतिक जनसंहार या संस्कृति के उन्मूलन से जुड़ा है. ऐसे में मंत्री के बयान पर सवाल उठाने वाली सोशल मीडिया पोस्ट को हेट स्पीच नहीं माना जा सकता.

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इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में बयानबाजी तेज हो गई है. विपक्षी दलों ने कोर्ट की टिप्पणी को अपने आरोपों की पुष्टि बताया है, जबकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि पूरे मामले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है. फिलहाल यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है.

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