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आवारा कुत्तों पर कई दौर की सुनवाई के बाद आज अहम फैसला! अब तक क्या-क्या हुआ?

सुप्रीम कोर्ट आज आवारा कुत्तों मामले में फैसला सुनाएगा. पिछली कई दौर की सुनवाई में डॉग बाइट, रेबीज, शेल्टर और सार्वजनिक सुरक्षा मुद्दों पर बहस हो चुकी है.

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. (File Photo: PTI)
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. (File Photo: PTI)

आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट आज फैसला सुनाएगा. पिछले साल कोर्ट ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया था. जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की थी. पिछले साल नवंबर में बेंच ने अधिकारियों को कई निर्देश दिए थे, जिससे स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाया जा सके. कोर्ट ने निर्देश दिया था कि कुत्तों को शेल्टर में भेजा जाए और उन्हें उसी जगह वापस न छोड़ा जाए, जहां से उन्हें उठाया गया था.

बेंच ने सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर भी रोक लगाने के निर्देश जारी किए थे, सिवाय उन जगहों के जो इसके लिए तय की गई हैं. बाद में, कुत्तों से प्यार करने वालों और जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले समूहों ने इन निर्देशों को वापस लेने के लिए कई याचिकाएं दायर कीं. 

कई समूहों की याचिकाओं पर विस्तार से अच्छी तरह सुनवाई करने के बाद, बेंच ने 29 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.

अब तक क्या-क्या हुआ?

  • सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई 2025 को एक मीडिया रिपोर्ट का खुद संज्ञान लिया, जिसमें कुत्तों के काटने से रेबीज़ होने की घटनाओं का ज़िक्र था. कोर्ट ने इसे बहुत ही परेशान करने वाला और चिंताजनक बताया. जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा, "इस खबर में कुछ चिंताजनक और परेशान करने वाले आंकड़े और तथ्य शामिल हैं."
  • बेंच ने कहा कि दिल्ली और उसके आस-पास के इलाकों में हर दिन सैकड़ों लोगों को कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे रेबीज़ हो रहा है और आखिरकार बच्चे और बुज़ुर्ग इस भयानक बीमारी का शिकार बन रहे हैं.
  • सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त, 2025 को दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाना और उन्हें डॉग शेल्टर में भेजना तुरंत शुरू करें. 'Live Law' की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी थी कि जो भी शख्स या संगठन सरकारी संस्थाओं के काम में रुकावट डालेंगे, उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा. कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए, अगर जरूरी हो तो अधिकारी बल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. एक बार पकड़े जाने और शेल्टर में रखे जाने के बाद, इन कुत्तों को दोबारा सार्वजनिक जगहों पर नहीं छोड़ा जाएगा.
  • सीनियर वकील और एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल, भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की सिफारिशें सुनने के बाद, जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने ये निर्देश जारी किए थे. कोर्ट ने कहा था, "शिशु और छोटे बच्चे, किसी भी कीमत पर, रेबीज का शिकार नहीं बनने चाहिए. इस कार्रवाई से लोगों में यह भरोसा पैदा होना चाहिए कि वे आवारा कुत्तों के काटने के डर के बिना आजादी से घूम-फिर सकते हैं. इसमें किसी भी तरह की भावनात्मकता को शामिल नहीं किया जाना चाहिए."
  • सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 14 अगस्त, 2025 को एक अंतरिम याचिका पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया. इस याचिका में 11 अगस्त, 2025 के उस निर्देश पर रोक लगाने की मांग की गई थी, जिसमें राजधानी की सड़कों से आवारा कुत्तों को हटाने और उन्हें छह से आठ हफ़्तों के अंदर शेल्टर में रखने का आदेश दिया गया था. जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली और जस्टिस संदीप मेहता, जस्टिस एन.वी. अंजारिया को भी शामिल करने वाली बेंच ने जोर देकर कहा, “स्थानीय अधिकारी वह काम नहीं कर रहे हैं, जो उन्हें करना चाहिए. उन्हें यहां आकर जिम्मेदारी लेनी चाहिए.” हालांकि, शीर्ष कोर्ट ने जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की डिवीजन बेंच द्वारा नागरिक निकायों को जारी किए गए निर्देशों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.
  • 22 अगस्त को, सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के उस निर्देश में बदलाव किया, जिसके तहत दिल्ली-NCR के सभी आवारा कुत्तों को हमेशा के लिए शेल्टर में रखने का आदेश दिया गया था. कोर्ट ने फैसला सुनाया कि पकड़े गए आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण करके उन्हें उनके मूल इलाक़ों में ही वापस छोड़ दिया जाए, जबकि बहुत ज्यादा खतरनाक या रेबीज रेबीज़ से पीड़ित कुत्तों को शेल्टर में रखा जा सकता है.
  • सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर, 2025 को सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी दोहरी समस्याओं (आवारा कुत्तों के हमलों और मवेशियों के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं) को रोकने के लिए निर्देश जारी किए. कोर्ट ने आदेश दिया कि स्कूलों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए और राजमार्गों को उन भटकते मवेशियों और जानवरों से मुक्त किया जाए, जिनकी वजह से जानलेवा दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. कुत्तों के काटने के मामलों में हो रही चिंताजनक बढ़ोतरी का संज्ञान लेते हुए, कोर्ट ने सभी शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, सार्वजनिक खेल परिसरों, बस स्टैंडों और डिपो को निर्देश दिया कि वे आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए अपने परिसरों की उचित बाड़बंदी करने हेतु तत्काल कदम उठाएं.
  • 13 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह राज्यों पर भारी मुआवजा लगा सकता है और आवारा कुत्तों के हमलों से होने वाली चोट या मौत के लिए कुत्तों को खाना खिलाने वालों को व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार ठहरा सकता है. बेंच ने सवाल किया कि जो लोग आवारा कुत्तों को खाना खिलाते हैं, वे जनता की सुरक्षा के लिए उन जानवरों को अपने ही घरों के अंदर क्यों नहीं रखते.
  • 28 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. यह फैसला सभी राज्यों की दलीलें सुनने के बाद लिया गया. कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद सुनवाई पूरी कर ली. इन पक्षों में कुत्तों से प्यार करने वाले लोग, कुत्तों के काटने की घटनाओं के पीड़ित, जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता और केंद्र व राज्य सरकारों की तरफ से पेश हुए वकील शामिल थे. सुनवाई पूरी होने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. कोर्ट ने सभी पक्षों को एक हफ्ते के अंदर अपनी लिखित दलीलें जमा करने का निर्देश भी दिया.
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