scorecardresearch
 

सरकारी ठेकों के मामले में घिरे अरुणाचल सीएम पेमा खांडू, सुप्रीम कोर्ट ने CBI को जांच के दिए आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़ी कंपनियों को सरकारी ठेके देने के आरोपों की जांच के लिए CBI को आदेश दिया है। जांच नवंबर 2015 से 2025 तक के टेंडर और कॉन्ट्रैक्ट्स पर केंद्रित होगी.

Advertisement
X
सीएम पेमा खांडू को SC से झटका, CBI जांच के आदेश
सीएम पेमा खांडू को SC से झटका, CBI जांच के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू को बड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने परिवार से जुड़ी कंपनियों को सरकारी ठेके देने के आरोपों में CBI जांच के आदेश दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, दो हफ्ते में CBI प्रारंभिक जांच रजिस्टर्ड करे. सुप्रीम कोर्ट ने पेमा खांडू के परिवार से जुड़ी कंपनियों को सरकारी ठेके देने के मामले में सीबीआई या SIT जांच की मांग वाली याचिका पर बीती 17 फरवरी 2026 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

सोमवार को जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने ये आदेश दिए. Save Mon Region Federation नाम की एनजीओ ने ये याचिका दायर की थी. याचिका में आरोप लगाया गया था कि मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़े लोगों की कंपनियों को सरकारी ठेके कथित तौर पर नियमों को दरकिनार कर और ऊंची दरों पर दिए गए. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि CBI नवंबर 2015 से 2025 तक के बीच हुए टेंडर और कॉन्ट्रैक्ट्स के आवंटन और उनके अमल में लाए जाने की प्रोसेस की जांच करेगी. इसके तहत खासतौर पर उन ठेकों को भी खंगाला जाएगा, जिनका जिक्र याचिका में है. 

जांच एजेंसी को दिए गए ये आदेश
जांच एजेंसी को flow of payments, टेंडर प्रोसेस, और डीलिंग से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करने के लिए कहा गया है. कोर्ट ने यह भी साफ किया कि CBI केवल इसी टाइम पीरियड तक सीमित नहीं रहेगी. अगर जांच के दौरान जरूरी समझा जाए तो एजेंसी इससे पहले या बाद के सौदों और लेन-देन की भी जांच कर सकती है. यानी जांच का दायरा व्यापक रखा गया है ताकि किसी भी संभावित अनियमितता को नजरअंदाज न किया जाए.

Advertisement

सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह जांच में पूरी तरह सहयोग करे. राज्य के मुख्य सचिव को एक सप्ताह के भीतर एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आदेश दिया गया है, जो CBI के साथ समन्वय करेगा. साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है कि टेंडर कमेटी से जुड़े सभी रिकॉर्ड, वाउचर, प्रमाणपत्र और भुगतान से संबंधित दस्तावेज समय पर CBI को उपलब्ध कराए जाएं.

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में क्या कहा?
कोर्ट ने सख्त लहजे में यह भी कहा कि जांच से जुड़े किसी भी रिकॉर्ड, चाहे वह फिजकल हो या डिजिटल को नष्ट नहीं किया जाना चाहिए. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया है कि इस स्तर पर की गई टिप्पणियां अंतिम निष्कर्ष नहीं हैं. कोर्ट का कहना है कि ये जांच केवल यह तय करने के लिए हैं कि क्या इस मामले में स्वतंत्र और विस्तृत जांच की जरूरत है या नहीं.

CBI को निर्देश दिया गया है कि वह 16 सप्ताह के भीतर अपनी प्रारंभिक जांच की स्टेटस रिपोर्ट अदालत में दाखिल करे. इस रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि मामले में आगे नियमित जांच (Regular Investigation) की जरूरत है या नहीं.
 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement