गृह मंत्री अमित शाह ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की तारीफ की. रविवार को सॉलिसिटर जनरल की दो किताबों 'द बेंच द बार एंड द बिजार' और 'द लॉफुल द ऑफुल' का लोकार्पण हुआ था. इस मौके पर अमित शाह ने कहा कि इन पुस्तकों का समर्पण मां को हुआ है और लोकार्पण भी मदर्स डे पर.
गृह मंत्री ने कहा कि न्यायपालिका और कार्यपालिका के संतुलन को लेकर अपने भाव किसी और मंच पर रखूंगा. क्योंकि, मेरा यहां आना और बोलना तुषार मेहता के लिए है. मेरे यहां बोलने के दूसरे मायने न निकाले जाएं.
शाह बोले, 'मेहता के पास शेरों-शायरी और वन लाइनर का खजाना है. तुषार मेहता विदेशी कोर्ट्स के बाद भारतीय कोर्ट की बातें भी लिखें तो रोचक होगा. हमारे भारत में लोकतंत्र की जड़ें पाताल की गहराइयों तक पहुंचाई हैं.'
गृह मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद से सभी लोकतांत्रिक परिवर्तन रक्तहीन और सुनियोजित हुए. आम जनता को न्याय के द्वार खुले होने और अपनी बात सुने जाने का भरोसा है. न्याय आम आदमी की आस, समाज का संतुलन और जनता का विश्वास है. न्यायपालिका ने इस संतुलन को मजबूती से बनाए रखा है. न्यायपालिका और कार्यपालिका को इसे मजबूती से आगे भी बढ़ाना है.
अमित शाह ने आगे बताया, 'मैं फिलहाल पुस्तकें पढ़ नहीं पाया. मेरी टीम ने बताया है कि पुस्तक न्यायिक व्यवस्था की न्यूट्रल मीमांसा (गहन चिंतन) है. कभी कोर्ट में कविता की गूंज सुनाई देती है तो कभी हास्य भी दिखता है. कभी दो जुड़वां बहनों में से एक ने दूसरी को न्याय दिलाया तो कभी किसी जज ने शिकार करते-करते कैसे न्याय कर दिया!'
उन्होंने आगे कहा, 'हमारे संविधान ने लोकतांत्रिक संस्थाएं एक दूसरे का विरोध करने को नहीं बल्कि संतुलन बनाए रखने को बनाई है. इसी भावना के साथ हमारे संविधान निर्माताओं ने संविधान लिखा. पिछले 75 सालों से इसे और मजबूत किया गया. बार-बार दिखा और आगे दिखना भी चाहिए. कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संतुलित संबंधों को और मजबूत होना चाहिए. तुषार भाई ने अदालत और कानून की मर्यादा में रहते हुए अपनी पुस्तकों में साहित्य, हास्य और सत्य घटनाओं को पिरोया है.'
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दो पुस्तकों के लोकार्पण के बाद देश के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि तुषार मेहता की इन दोनों किताबों ने कोर्टरूम ड्रामा बहुत अच्छी तरह विस्तार से लिखा है. उनके दिन अदालतों में और शाम ब्रीफ पढ़ने में बीतती हैं. ऐसे में उन्होंने ईश्वर से 25 वां घंटा भी लिया होगा. तभी उन्होंने इतना उम्दा लिखा है जिसमें कई तरह के भाव वाली कहानियां हैं.
चीफ जस्टिस ने बॉम्बे हाईकोर्ट और अन्य हाईकोर्ट्स के कई दिलचस्प किस्से सुनाए. लोगों ने चीफ जस्टिस के सुनाए किस्सों पर कहकहे लगाए. जैसे- एक बार एक अदालत में अपनी दलीलें सुना सुना कर आजिज आए वकील फाइलें पटक कर बाहर निकल ही रहे थे तो जज ने इनको आवाज देकर बुलाया और कहा कि इस अंजुमन में आपको आना है बार बार दीवार दर को गौर से पहचान लीजिए.
सीजेआई ने कई किस्से सुनाए और कहा कि तुषार मेहता आपकी किताब का तीसरा वॉल्यूम भी तैयार हो रहा है. कोर्ट रूम में थिएटर और लॉ का भी संगम होता है जिसमें हर कोई हीरो होता है. तुषार मेहता ने हमें याद दिलाया कि कानून सिर्फ आदेश और निर्णय नहीं होता वो जीवन का हास्य भी होता है. कॉमिक ब्रिलियंस भी तुषार भाई ने अपने लेखन में ये बेहतरीन किस्सागोई बरकरार रखी है. इनके लेखन ने बताया कि न्याय अंधा हो सकता है लेकिन उसमें जबरदस्त हास्य बोध है.