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मर्सिडीज खरीदने वाले और हवाई चप्पल लेने वाले के लिए टैक्स एक नहीं हो सकता: सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'वन नेशन, वन टैक्स' की अवधारणा से जुड़े सवाल पर कहा कि ये अभी संभव नहीं है. उन्होंने मर्सिडीज कार खरीदने वाले और हवाई चप्पल खरीदने वाले के लिए एक जैसा टैक्स नहीं हो सकता.

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण. (Photo: ITG)
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण. (Photo: ITG)

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि मर्सिडीज कार खरीदने वाले और हवाई चप्पल लेने वाले के लिए एक जैसा टैक्स नहीं हो सकता. उन्होंने ये बातें आजतक के साथ एक विशेष इंटरव्यू में कहीं हैं.

इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि जैसा कि हमने देखा है कि भारत सरकार चार जीएसटी स्लैब से दो जीएसटी स्लैब पर आ गई है, अब भारत सरकार एक जीएसटी स्लैब पर जाने की कोशिश कर रही है जो वन नेशन, वन जीएसटी की अवधारणा को समर्पित होगा.

इसके जवाब में उन्होंने कहा कि इनमें कुछ समय लगेगा या बहुत वक्त लगेगा. एक बार जब हम डेवलपमेंट का एक स्तर पार कर लेंगे तो देखेंगे कि एक से ज्यादा दरों की जरूरत नहीं है, अगर हम भारत के विकास को समझने की कोशिश करें तो पूरा देश एक समान नहीं है, कई इलाके बहुत विकसित है तो कई इलाके कम विकसित हैं और इसलिए डेवलपमेंट के इन कई क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए ये सही नहीं है.

'नहीं कर सकते लोगों से एक जैसा व्यवहार'

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उन्होंने दिवंगत बीजेपी नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का उदाहरण दोहराया और कहा कि उन्हें एक बार बताया था कि क्या एक बेंज कार और एक हवाई चप्पल खरीदने वाले के साथ एक जैसे व्यवहार किया जा सकता है और क्या दोनों पर एक जैसा टैक्स लगाया जा सकता है.

विकसित भारत के बाद संभव है एक टैक्स

उन्होंने कहा कि हवाई चप्पल खरीदने वाला व्यक्ति अभी भी डेवलपमेंट के उस स्तर पर नहीं है, जहां वह अपने चप्पल के लिए ज्यादा टैक्स का भुगतान कर सके. लेकिन कार खरीदने वाला थोड़ा ज्यादा टैक्स देने की स्थिति में होता है. इस लिए अगर दोनों पर एक जैसा टैक्स होगा तो ये सही नहीं होगा.

उन्होंने वन नेशन, वन टैक्स की अवधारणा से इनकार ना करते हुए कहा कि आने वाले वक्त में, जब भारत बहुत विकसित हो जाएगा तो ये संभव है.

क्या जीएसटी के दायरें में आएंगे पेट्रोल-डीजल

इस सवाल के जवाब में वित्त मंत्री ने कहा कि ये दोनों जीएसटी के इस प्रपोजल में नहीं थे. हालांकि, जीएसटी लाने के वक्त भी हमने कहा था और एक लीगल प्रोविजन बनाया था, जब कभी-भी राज्य रेट को लेकर तैयार होंगे, तब पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जा सकेगा.

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