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राहुल गांधी आज खाली करेंगे अपना सरकारी बंगला, खुद अधिकारियों को सौंपेंगे चाबी

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष को मोदी सरनेम मामले में सूरत की एक अदालत ने दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई थी. इसके अगले दिन लोकसभा सचिवालय ने उनकी सांसदी रद्द कर दी थी. उनकी अयोग्यता के बाद उन्हें 22 अप्रैल तक परिसर खाली करने के लिए कहा गया था.

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राहुल गांधी खाली करेंगे अपना सरकारी बंगला
राहुल गांधी खाली करेंगे अपना सरकारी बंगला

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार तक सरकारी बंगले से अपना सभी सामान खाली कर दिया है. सूत्रों की मानें तो वह शनिवार 22 अप्रैल को 12, तुगलक लेन स्थित बंगला लोकसभा सचिवालय को सौंप देंगे. दरअसल, शनिवार को ही बंगला खाली करने की समय सीमा पूरी हो रही है. ऐसे में कहा जा रहा है कि राहुल गांधी खुद संबंधित संपत्ति विभाग के अधिकारियों को चाबियां सौंपेंगे. प्रियंका गांधी ने भी लोधी एस्टेट हाउस खाली करते समय ऐसा किया था. 

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष को मोदी सरनेम मामले में सूरत की एक अदालत ने दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई थी. इसके अगले दिन लोकसभा सचिवालय ने उनकी सांसदी रद्द कर दी थी. उनकी अयोग्यता के बाद उन्हें 22 अप्रैल तक बंगला खाली करने के लिए कहा गया था.Rahul Gandhi starts vacating Lutyens bungalow he was 'not interested living  in' - India Today

बता दें कि राहुल गांधी ने 14 अप्रैल को अपने कार्यालय और कुछ निजी सामान को सरकारी आवास से अपनी मां सोनिया गांधी के आधिकारिक आवास में शिफ्ट किया था. इसके बाद जो कुछ सामान बचा था, उसको भी उन्होंने अब शिफ्ट कर दिया है. शुक्रवार तक आवास पूरी तरह खाली कर दिया गया है. एक ट्रक को उनके सामान के साथ इमारत से बाहर जाते देखा गया.

कैसे मिलता है सरकारी बंगला?

- राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, सुप्रीम कोर्ट के जजों, सांसदों और ब्यूरोक्रेट्स को दिल्ली में जो सरकारी आवास दिए जाते हैं, वो लुटियंस जोन में आते हैं. 

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- इन सरकारी आवासों के आवंटन, रख-रखाव और किराये का काम डायरेक्टोरेट ऑफ एस्टेट देखता है. इसे 1922 में बनाया गया था, जो शहरी आवास मंत्रालय के अधीन आता है.

- दिल्ली में सरकारी आवास आवंटित करने के लिए अलॉटमेंट ऑफ गवर्नमेंट रेसिडेंस (जनरल पूल इन दिल्ली) 1963 है. इसमें दिल्ली का मतलब वो इलाका है जो केंद्र सरकार के अधीन आता है. इन बंगलों का बंटवारा सैलरी और सीनियॉरिटी के आधार पर होता है.

- लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों को आवास बांटने का काम दोनों सदनों की हाउसिंग कमेटी करती है. टाइप IV से टाइप VIII के आवास सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और राज्य मंत्रियों को दिए जाते हैं.

- पहली बार चुने गए सांसदों को टाइप IV के बंगले मिलते हैं. एक से ज्यादा बार चुने गए सांसद को टाइप VIII बंगला दिया जाता है.

Workers move goods as Congress leader and former Lok Sabha MP Rahul Gandhi vacates his official bungalow at 12 Tughlak Lane, in New Delhi (Photo: PTI)

कितने खास होते हैं ये बंगले?

- टाइप VIII का बंगला सबसे उच्च श्रेणी का होता है. ये बंगले आमतौर पर कैबिनेट मंत्री, सुप्रीम कोर्ट के जज, पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व राष्ट्रपति, पूर्व उप राष्ट्रपति और वित्त आयोग के चेयरमैन को मिलते हैं.

- टाइप VIII के बगलों में पांच तो टाइप VII में चार बेडरूम होते हैं. दोनों ही टाइप के बंगलों में सर्वेंट क्वार्टर, लॉन और गैरेज भी होता है. 

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- सभी सांसदों को सरकारी आवास में सालाना 4 हजार लीटर पानी और 50 हजार यूनिट तक की बिजली फ्री मिलती है. अगर किसी साल बिजली या पानी का इस्तेमाल ज्यादा हो जाता है तो उसे अगले साल एडजस्ट किया जाता है. इसके अलावा हर तीन महीने में पर्दों की धुलाई भी फ्री में होती है.

कब खाली कराए जाते हैं ये बंगले?

- न्यूज एजेंसी ने एक सीनियर अफसर से हवाले से बताया है कि सदस्यता खत्म होने के बाद सांसद को एक महीने के भीतर सरकारी बंगला खाली करना होता है. 

- राहुल गांधी को 23 मार्च को सूरत की अदालत ने सजा सुनाई थी और उसी दिन से उनकी सदस्यता खत्म हो गई थी. इसलिए बंगला खाली करने के लिए उन्हें 22 अप्रैल तक का समय दिया गया है.

- नेताओं से बंगले खाली कराने के मकसद से 2019 में मोदी सरकार एक कानून लेकर आई थी. इसके मुताबिक, समय पर बंगले खाली न करने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है. 

- इसके अलावा इसमें ये भी प्रावधान है कि नोटिस मिलने के तीन दिन बाद सरकार बंगला खाली करवाने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है.

- 2014 में मोदी सरकार आने के बाद पूर्व मंत्रियों और पूर्व सांसदों से तेजी से सरकारी बंगले खाली कराए जाने लगे. एक रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार के पहले ही साल 460 नेताओं से सरकारी आवास खाली कराए गए थे. 2020 में प्रियंका गांधी से भी सरकारी आवास खाली करवाया गया था.

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