पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की सुरक्षा को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. गृह मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से खबर है कि गृह मंत्रालय ने राघव चड्ढा को Z कैटेगरी की सुरक्षा प्रदान की है. उन्हें दिल्ली और पंजाब दोनों जगह यह सुरक्षा कवर मिलेगा.
सूत्रों के मुताबिक, राघव चड्ढा की सुरक्षा अब अर्धसैनिक बलों द्वारा की जाएगी. यह फैसला इंटेलिजेंस ब्यूरो की थ्रेट परसेप्शन रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है. गौरतलब है कि पंजाब सरकार ने राघव चड्ढा की सुरक्षा वापस ले ली थी, जिसके बाद केंद्र सरकार ने उन्हें सुरक्षा कवर देने का निर्णय लिया.
Z कैटेगरी सुरक्षा क्या होती है?
Z श्रेणी की सुरक्षा में कुल 33 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं. इसमें VIP को सशस्त्र बलों की सुरक्षा दी जाती है. उनके आवास पर 10 आर्म्ड स्टैटिक गार्ड तैनात रहते हैं. इसके अलावा 6 पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) 24 घंटे सुरक्षा में रहते हैं. साथ ही 12 कमांडो तीन शिफ्ट में आर्म्ड एस्कॉर्ट के तौर पर तैनात रहते हैं, 2 वॉचर्स शिफ्ट के हिसाब से और 3 प्रशिक्षित ड्राइवर भी 24 घंटे मौजूद रहते हैं.
असल में आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं. पंजाब सरकार ने राघव चड्ढा से Z+ श्रेणी की सुरक्षा वापस ले ली थी. सूत्रों के अनुसार, यह फैसला आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच बढ़ती खाई के चलते लिया गया है.
सांसद अशोक मित्तल बनाए गए थे डिप्टी लीडर
बता दें कि बीते 2 अप्रैल को आम आदमी पार्टी ने बड़ा फेरबदल करते हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया था. उनकी जगह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर और पार्टी सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल राज्यसभा में पार्टी के नए डिप्टी लीडर का पद दिया गया था.
आम आदमी पार्टी के इस एक्शन और AAP नेताओं की सोशल मीडिया पर चल रही लगातार बयानबाजी के बाद राघव चड्ढा ने भी एक वीडियो बनाकर खुद पर लगाए गए सभी आरोपों का जवाब दिया था. राघव चड्ढा ने वीडियो जारी कर अपनी ही पार्टी को निशाने पर लिया था. इसके जवाब में आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भी अपने ही सांसद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी तब कहा था कि राघव चड्ढा कम्प्रोमाइज्ड हो चुके हैं.
सीएम भगवंत मान ने लगाया था कंप्रोमाइज्ड होने का आरोप
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा था कि पार्टी में संसदीय बोर्ड के नेता समय-समय पर बदलते रहते हैं और यह एक सामान्य प्रक्रिया है.भगवंत मान ने कहा था कि कई गंभीर मुद्दे ऐसे होते हैं, जिन पर पार्टी उम्मीद करती है कि सांसद वॉकआउट करें या अपनी आवाज उठाएं. उन्होंने कहा कि जब कोई सांसद ऐसा नहीं करता है, तब ये व्हिप का उल्लंघन होता है.
व्हिप का उल्लंघन करने के लिए बाद में कार्रवाई की जाती है. पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाने का मामला हो या गुजरात में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का, राघव चड्ढा ने इनकी बजाय संसद की कैंटीन में समोसे महंगे होने और पिज्जा की डिलीवरी में देरी का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है, वह कम्प्रोमाइज्ड हैं.