प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 17वें भारतीय सहकारी महासम्मेलन को संबोधित किया. यहां उन्होंने कहा, आज हमारा देश विकसित और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य पर काम कर रहा है. आज अगर हम दुनिया में दूध के सबसे बड़े उत्पादक हैं, तो इसका श्रेय डेयरी सहकारी समितियों को दिया जा सकता है. यदि भारत, चीनी के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है तो इसका श्रेय सहकारी समितियों को भी दिया जा सकता है.
पीएम ने कहा, मैंने लाल किले से कहा है कि हमारे हर लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सबका प्रयास आवश्यक है. सहकार की स्पिरिट भी तो यही है. जब विकसित भारत के लिए बड़े लक्ष्यों की बात आई तो हमने सहकारिता को एक बड़ी ताकत देने का फैसला किया. हमने पहली बार सहकारिता के लिए अलग मंत्रालय बनाया, अलग बजट का प्रावधान किया.
'सहकारी समितियों की बढ़ेगी ताकत'
उन्होंने कहा, आज कोऑपरेटिव को वैसी ही सुविधाएं, वैसे ही प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जैसे कार्पोरेट सेक्टर को मिलते हैं. सहकारी समितियों की ताकत बढ़ाने के लिए उनके लिए टैक्स की दरों को भी कम किया गया है. सहकारिता क्षेत्र से जुड़े जो मुद्दे वर्षों से लंबित थे, उन्हें तेज गति से सुलझाया जा रहा है. हमारी सरकार ने सहकारी बैंकों को भी मजबूती दी है. लेकिन पिछले 9 वर्षों में ये स्थिति बिल्कुल बदल गई है.
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'किसान सम्मान निधि पर सबसे ज्यादा खर्च'
आज करोड़ों छोटे किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि मिल रही है. कोई बिचौलिया नहीं, कोई फर्जी लाभार्थी नहीं. 2014 से पहले अक्सर किसान कहते थे कि उन्हें सरकार की मदद बहुत कम मिलती है और जो थोड़ी बहुत मिलती भी थी, वो बिचौलियों के खातों में जाती थी. यानी तब पूरे देश की कृषि व्यवस्था पर जितना खर्च तब हुआ, उसका लगभग 3 गुना हम केवल किसान सम्मान निधि पर खर्च कर चुके हैं.
'भारत में यूरिया बैग 270 रुपए में'
सरकारी योजनाओं के लाभ से देश के छोटे और मध्यम किसान वंचित ही रहते थे. बीते 4 वर्षों में इस योजना के अंतर्गत 2.5 लाख करोड़ रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजे गए हैं. ये रकम कितनी बड़ी है इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि 2014 से पहले के 5 वर्षों का कुल कृषि बजट ही मिलाकर 90 हजार करोड़ रुपये से कम था. आज किसान को एक यूरिया बैग के लिए करीब 270 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं. उसी एक बैग की कीमत बांग्लादेश में 720 रुपये, पाकिस्तान में 800 रुपये और चीन में 2100 रुपये है. पिछले 9 वर्षों में बीजेपी सरकार ने उर्वरक सब्सिडी पर 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं. यही सबसे बड़ी गारंटी है.
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'किसानों पर 6.5 लाख करोड़ खर्च कर रही सरकार'
दुनिया में निरंतर महंगी होती खादों और केमिकल का बोझ किसानों पर न पड़े, इसकी भी गारंटी केंद्र की भाजपा सरकार ने आपको दी है. पिछले 9 वर्षों में किसानों की उपज को एमएसपी पर खरीदकर 15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा दिए गए हैं. दूसरे शब्दों में सरकार कृषि और किसानों पर प्रति वर्ष लगभग 6.5 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रही है. आखिरकार गारंटी क्या होती है, किसान के जीवन को बदलने के लिए कितना महा भगीरथ प्रयास जरूरी है, इसके इसमें दर्शन होते हैं. कुल मिलाकर अगर देखें तो सिर्फ फर्टिलाइजर सब्सिडी पर भाजपा सरकार ने 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किये हैं.
'किसानों को सालाना 50 हजार की मदद पहुंच रही'
पीएम ने कहा, किसानों को उनकी फसल की उचित कीमत मिले, इसे लेकर हमारी सरकार शुरू से बहुत गंभीर रही है. पिछले 9 साल में MSP को बढ़ाकर, MSP पर खरीद कर 15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा किसानों को दिए गए हैं. हिसाब लगाएं तो आज हर वर्ष केंद्र सरकार साढ़े 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खेती और किसानों पर खर्च कर रही है. इसका मतलब है कि प्रतिवर्ष हर किसान तक सरकार औसतन 50 हजार रुपये किसी ना किसी रूप में पहुंचा रही है. यानी भाजपा सरकार में किसानों को अलग-अलग तरह से हर साल 50 हजार रुपये मिलने की गारंटी है. ये मोदी की गारंटी है.
'किसानों के लिए 3 लाख 70 हजार करोड़ का पैकेज'
यही नहीं, गन्ना किसानों के लिए भी उचित और लाभकारी मूल्य अब रिकॉर्ड 315 रुपये क्विंटल कर दिया गया है. किसान हितैषी अप्रोच को जारी रखते हुए कुछ दिन पहले एक और बड़ा निर्णय लिया गया है. केंद्र सरकार ने किसानों के लिए 3 लाख 70 हजार करोड़ रुपये का पैकेज घोषित किया है. अमृतकाल में देश के गांव, किसान के सामर्थ्य को बढ़ाने के लिए अब कॉपरेटिव सेक्टर की भूमिका बहुत बड़ी होने वाली है. सरकार और सहकार मिलकर विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को डबल मजबूती देंगे.
'भंडारण क्षमता बढ़ेगी, नए रोजगार भी मिलेंगे'
आज भारत में हम जितना अनाज पैदा करते हैं, उसका 50% से भी कम हम स्टोर कर सकते हैं. अब केंद्र सरकार दुनिया की सबसे बड़ी भण्डारण योजना लेकर आई है. बीते अनेक दशकों में देश में करीब 1,400 लाख टन से अधिक की भण्डारण क्षमता हमारे पास है. आने वाले 5 वर्षों में लगभग 700 लाख टन की नई भण्डारण क्षमता बनाने का हमारा संकल्प है. ये निश्चित रूप से बहुत बड़ा काम है, जो देश के किसानों का सामर्थ्य बढ़ाएगा, गांवों में नए रोजगार बनाएगा.
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क्या है सहकारी कांग्रेस का पूरा कार्यक्रम
भारतीय सहकारी कांग्रेस शनिवार से दिल्ली में शुरू हो गई है. इस महा सम्मेलन में दो दिन तक भारत में सहकारी आंदोलन पर चर्चा की जाएगी. 17वीं भारतीय सहकारी कांग्रेस अंतर्राष्ट्रीय सहकारी दिवस के अवसर पर आयोजित की जा रही है. इसका उद्देश्य सहकारी आंदोलन में विभिन्न रुझानों पर चर्चा करना और भारत के सहकारी आंदोलन के विकास के लिए भविष्य की नीति दिशा तैयार करना है. 'अमृत काल: जीवंत भारत के लिए सहयोग के माध्यम से समृद्धि' के मुख्य विषय पर सात तकनीकी सत्र होंगे. इसमें भारत और विदेश की सहकारी समितियों, मंत्रालयों, विश्वविद्यालयों, प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रतिनिधियों समेत 3600 से ज्यादा हितधारकों की भागीदारी होगी.