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पांडुलिपियों की खोज का मिशन... क्या है ‘विज्ञान भारतम् सर्वे’, PM मोदी ने मन की बात में किया जिक्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘विज्ञान भारतम् सर्वे’ का जिक्र करते हुए देशवासियों से पांडुलिपियों के संरक्षण में भागीदारी की अपील की. उन्होंने बताया कि यह अभियान भारत की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए चलाया जा रहा है. इसके तहत लोग ऐप के जरिए पांडुलिपियों की जानकारी साझा कर सकते हैं.

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देश की प्राचीन पांडुलिपियों को बचाने के लिए जनभागीदारी का बड़ा अभियान शुरू किया गया (Photo: PTI)
देश की प्राचीन पांडुलिपियों को बचाने के लिए जनभागीदारी का बड़ा अभियान शुरू किया गया (Photo: PTI)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 132वें एपिसोड में अपने संबोधन में विज्ञान भारतम् सर्वे का जिक्र किया है. अपने संबोधन में देश की सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए “विज्ञान भारतम सर्वे” का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा प्रयास है, जो देशवासियों की जनभागीदारी की भावना को दर्शाता है.

प्रधानमंत्री ने बताया कि इस सर्वे का उद्देश्य देश भर में मौजूद मैनुस्क्रिप्ट यानी पांडुलिपियों के बारे में जानकारी इकट्ठा करना है. उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध परंपरा और इतिहास को समझने के लिए इन पांडुलिपियों का संरक्षण और दस्तावेजीकरण बहुत जरूरी है.

कैसे जुड़ सकते हैं लोग?

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस सर्वे से जुड़ने के लिए “विज्ञान भारतम् ऐप” एक महत्वपूर्ण माध्यम है. उन्होंने देशवासियों से अपील की कि अगर उनके पास कोई पांडुलिपि है या उसके बारे में जानकारी है, तो वे उसकी फोटो ऐप पर साझा करें. उन्होंने यह भी साफ किया कि हर एंट्री से जुड़ी जानकारी को दर्ज करने से पहले उसकी वेरिफिकेशन की जा रही है, ताकि डेटा की विश्वसनीयता बनी रहे.

देशभर से मिले उदाहरण

प्रधानमंत्री ने बताया कि अब तक हजारों पांडुलिपियां देश के अलग-अलग हिस्सों से साझा की जा चुकी हैं. उन्होंने कुछ उदाहरण भी दिए:

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• अरुणाचल प्रदेश के नामसाई से नन्ती सिंह नोवांग ने ताई लिपि में पांडुलिपियां साझा कीं

• अमृतसर के भाई अमित सिंह राणा ने गुरुमुखी लिपि से जुड़ी पांडुलिपियां साझा कीं

• कुछ संस्थाओं ने ताड़ के पत्तों (पाम लीफ) पर लिखी पांडुलिपियां दीं

• राजस्थान के अभय जैन ग्रंथालय ने कॉपर प्लेट पर लिखी प्राचीन पांडुलिपियां साझा कीं

• लद्दाख की हेमिस मठ (मोनास्ट्री) ने तिब्बती भाषा की बहुमूल्य पांडुलिपियों की जानकारी दी

उन्होंने कहा कि ये सिर्फ कुछ उदाहरण हैं, जबकि देश के कोने-कोने से लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं.

यह भी पढ़ें: 'जागरूक रहें, बहकावे में ना आएं...', मन की बात के 132वें एपिसोड में पीएम मोदी की देशवासियों से अपील

सर्वे की समय सीमा और अपील

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि यह सर्वे जून के मध्य तक जारी रहेगा. उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया कि वे अपनी संस्कृति और विरासत से जुड़े ऐसे पहलुओं को सामने लाएं और ज्यादा से ज्यादा इसमें भाग लें.

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