लोकसभा में विपक्ष के प्रस्ताव से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पीकर ओम बिरला के सम्मान में बड़ी बातें कही हैं. पीएम मोदी ने ओम बिरला को एक बेहतरीन अध्यक्ष बताते हुए कहा कि वे सदन के उन सदस्यों को भी बहुत धैर्य से संभालते हैं जो अक्सर हंगामा करते हैं. पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि ओम बिरला ने हमेशा दलीय राजनीति से ऊपर उठकर संविधान की मर्यादा को सर्वोपरि रखा है.
सदन के लिए किसी एक पक्ष के नहीं हैं बिरला
कोटा एयरपोर्ट के शिलान्यास कार्यक्रम में वर्चुअल तौर पर जुड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ओम बिरला जितने शानदार सांसद हैं, उतने ही काबिल लोकसभा अध्यक्ष भी हैं. उन्होंने कहा, 'सदन चलाने की बात हो तो ओम बिरला किसी एक दल के नहीं रह जाते. वे सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के लिए एक समान हैं.'
पीएम मोदी ने आगे कहा कि ओम बिरला पूरी तरह संविधान के प्रति समर्पित हैं और संसदीय नियमों का पालन करना उनकी प्राथमिकता रहती है. उनके मुताबिक, यही वजह है कि वे सदन की कार्यवाही को संतुलन और सम्मान के साथ चलाने में सफल रहते हैं.
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'बड़े घरानों के घमंडी छात्रों' पर कसा तंज
इस दौरान पीएम मोदी ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कुछ सांसदों के व्यवहार का जिक्र करते हुए कहा कि कई बार सदन में बड़े घरानों से आने वाले ऐसे छात्र भी आ जाते हैं, जो घमंडी होते हैं और शोर-शराबा करने की अपनी आदत नहीं छोड़ते. 'ऐसे माहौल में भी ओम बिरला एक कुशल मुखिया की तरह सबको साथ लेकर चलते हैं. वे किसी का अपमान नहीं करते, बल्कि सबकी कड़वी बातें भी मुस्कुराकर सह लेते हैं.' उन्होंने यह भी कहा कि बिरला के चेहरे पर रहने वाली वही मधुर मुस्कान शायद उनकी सबसे बड़ी ताकत है, जिसकी वजह से वे सदन में सभी के प्रिय हैं.
क्यों हो रही है इस प्रस्ताव पर चर्चा?
दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव दिया है. इस प्रस्ताव पर 9 मार्च को लोकसभा में चर्चा और मतदान होना है. बजट सत्र के दौरान सदन में हुए हंगामे, राहुल गांधी की बात पर मचे घमासान और विपक्षी सांसदों को सस्पेंड किए जाने के बाद, विरोधी दलों ने स्पीकर पर एकतरफा कार्रवाई करने के आरोप लगाए थे.
सुरक्षा के चलते पीएम मोदी को दी थी सलाह
इस विवाद के बीच एक अहम जानकारी यह भी सामने आई थी कि ओम बिरला ने प्रधानमंत्री को सदन में आने को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी थी. उन्हें खबर मिली थी कि कुछ सांसद प्रधानमंत्री की सीट के पास पहुंचकर गलत व्यवहार कर सकते हैं. सदन की गरिमा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पीएम मोदी को संबोधन के लिए न आने की सलाह दी थी. हालांकि, कांग्रेस की ओर से इन दावों को खारिज किया गया है.
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9 मार्च की वोटिंग पर टिकी निगाहें
पीएम मोदी ने कहा कि जैसे कोटा शहर देश के बच्चों का भविष्य बनाता है, वैसे ही ओम बिरला भी संसद को बड़े सलीके और अनुशासन से चलाते हैं. उन्होंने बिरला जी को कोटा की अच्छी सीख और संस्कारों की पहचान बताया. अब सबकी नजरें 9 मार्च पर टिकी हैं, जब लोकसभा में इस प्रस्ताव पर चर्चा और वोटिंग होगी. उसी दिन यह साफ हो जाएगा कि सदन का भरोसा आखिर किसके साथ खड़ा है.