पद्म भूषण विजेता और सामाजिक कार्यकर्ता इला भट्ट का निधन हो गया है. 89 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली है. गांधीवादी विचारधारा का हमेशा प्रचार करने वालीं इला भट्ट का अहमदाबाद के अस्पताल में निधन हुआ है. महिलाओं को सशक्त करने में उनकी एक सक्रिय भूमिका रही थी, कई मुहिम के जरिए उन्होंने महिला अधिकारों के लिए लड़ा था.
इला भट्ट को अपने जीवन में उल्लेखनीय कार्यों के लिए कई अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. साल 1977 में उन्हें रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला था, फिर 1986 में राइट लाइवलीहुड अवार्ड से सम्मानित किया गया था. बाद में उन्हें भारत सरकार ने पद्म भूषण जैसे पुरस्कार से भी नवाजा था. इला ने अपने जिंदगी के कई साल स्वश्रयी महिला सेवा संघ को भी दिए थे. उनकी तरफ से ही उस संगठन की स्थापना की गई थी. 1972 से 1996 तक वे इस संगठन में महासचिव के रूप में काम करती रहीं. साल 2011 में इला को गांधी पीस प्राइज भी दिया गया था. उद्यमिता के माध्यम से उन्होंने महिलाओं के लिए कई क्रांतिकारी काम किए थे. जिस तरह से वे इन कार्यों में सक्रिय रहीं, समाज में उनकी लोकप्रितया भी बढ़ती गई.
वैसे उन्हें कई दूसरे अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था. इस लिस्ट में ग्लोबल फेयरनेस अवार्ड, रैडक्लिफ मेडल, राइट लाइवलीहुड अवार्ड शामिल हैं. जिंदगी के अलग-अलग पड़ाव पर इला अपने कार्यों के जरिए इन अवॉर्ड्स को जीतती रहीं. उनकी निजी जिंदगी की बात करें तो इला ने 1956 में रमेश भट्ट से शादी की थी. उनके दो बच्चे हैं-अमीमयी और मिहिर. उनका पूरा परिवार अहमदाबाद में ही रहता है. इला भट्ट के निधन से राजनीतिक गलियारों में भी शोक की लहर है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, जयराम रमेश जैसे कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है.