विपक्ष द्वारा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को पद से हटाने की मांग को लेकर दिए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस को रिजेक्ट (खारिज) कर दिया गया है. सूत्रों ने बताया कि राज्यसभा महासचिव पीसी मोदी द्वारा सदन में पेश किए गए अपने फैसले में उपसभापति ने कहा कि महाभियोग नोटिस देश की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने और मौजूदा उपराष्ट्रपति को बदनाम करने की साजिश का हिस्सा है.
बता दें कि राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था. विपक्षी दलों ने धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के लिए अनुच्छेद 67बी के तहत नोटिस दिया था, ये नोटिस राज्यसभा महासचिव पीसी मोदी को सौंपा गया था. राज्यसभा के सभापति को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 14 दिन पहले नोटिस दिया जाना जरूरी होता है, जबकि संसद का शीतकालीन सत्र 20 दिसंबर यानी कल समाप्त हो रहा है.
दरअसल, विपक्ष ने धनखड़ पर सदन में पक्षपातपूर्ण बर्ताव करने का आरोप लगाया था. साथ ही इस नोटिस पर विपक्ष की तरफ से 60 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे.
इस मामले में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा था कि हमने केवल विपक्षी नेताओं के अपमान को लेकर अपनी आवाज उठाई है. जयराम रमेश ने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार), झारखंड मुक्ति मोर्चा, डीएमके समेत विपक्षी दलों के सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं. अविश्वास प्रस्ताव पर 60 सांसदों के हस्ताक्षर हैं.
कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य जयराम रमेश ने दावा किया था कि सरकार नहीं चाहती कि सदन चले. जयराम रमेश ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को कठघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि रिजिजू ने राज्यसभा सभापति और जेपी नड्डा के सामने राज्यसभा नहीं चलने देने की बात कही थी. उन्होंने दावा किया कि फ्लोर लीडर्स की बैठक में रिजिजू ने यह कहा था कि जब आप (विपक्षी दल) लोकसभा में अडानी का मुद्दा उठाते रहेंगे, हम (सत्ता पक्ष) राज्यसभा नहीं चलने देंगे.