
नक्सल मुक्त भारत का ऐलान हो चुका है, अब केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसी और सुरक्षाबल मिलकर नक्सलियों के आर्थिक तंत्र को पूरी तरीके से खत्म करने के साथ-साथ नक्सलियों की विचारधारा को समाप्त करने का अभियान तेजी से शुरू किया है, जी हां आपको मैं यहां बताने जा रहा हूं कि किस तरीके से नक्सलियों की अर्थ तंत्र को खत्म करने के लिए सुरक्षा बलों ने एक बड़ा अभियान अबूझमाड़ के जंगलों में शुरू किया है, इसी इलाके में नक्सलियों में अपने जो स्मारक बना रखे थे. उनको भी तोड़ा जा रहा है, पिछले एक महीने की अगर बात करें तो सुरक्षा बलों ने बस्तर के इलाके में 12 करोड़ से ज्यादा मूल्य के रुपये और सोना बरामद किए हैं, जिसमें 6 करोड़ 75 लाख रुपये नगद और 8 किलोग्राम सोना नक्सलियों के डंप से बरामद किया गया है. यहां पर नक्सलियों ने ये रुपये नक्सलवाद फैलाने के लिए जमा कर रखे थे. अब जब की देश के विभिन्न इलाकों से नक्सलवाद पूरी तरीके से खत्म हो गया है ऐसे में सुरक्षा बल नक्सलियों के गढ़ में जाकर के उनके हथियारों के डंप रूपए- पैसे सोना चांदी यह तमाम चीज ढूंढने में जुटी हुई है, खास तौर पर उन इलाकों में जहां पर नक्सलियों ने अपनी सुरक्षित राजधानी बना रखी थी.
यही नहीं आजतक को एक्सक्लूसिव जानकारी मिली है कि नक्सलियों के करीब 300 से ज्यादा स्मारकों को सुरक्षा बलों ने पिछले एक से दो महीने के अंदर नष्ट किया है, स्मारकों को नष्ट करने के पीछे का मकसद ये है कि नक्सली विचारधारा को पूरी तरीके से अबूझमाड़ के जंगलों से खत्म कर देना है.
यही वजह है इन तमाम इलाकों में बुलडोजर के जरिए अभियान सुरक्षा बलों के द्वारा चलाए जा रहा है. DRG/STF/CoBRA/बस्तर फाइटर्स/CRPF/BSF/ITBP/SSB/CAPF ने स्थानीय प्रशासन तथा अन्य सभी हितधारकों के साथ समन्वित प्रयास करते हुए असंभव को संभव कर दिखाया है.
बस्तर संभाग में एक महीने में 170 माओवादी कैडरों की मुख्यधारा में वापसी- विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर समाज के साथ जुड़ने का निर्णय लिया. पिछले एक महीने में 343 से अधिक घातक हथियार बरामद- AK-47, INSAS, SLR, BGL लांचर और LMG जैसे हथियारों की बड़ी बरामदगी ने माओवादी सैन्य क्षमता को लगभग समाप्त कर दिया है.

12 करोड़ से अधिक नकदी की बरामदग
पिछले एक महीने में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के डंप से भारी आर्थिक संसाधन बरामद किए है- पिछले 31 दिनों में ₹6.75 करोड़ नकद तथा 8 किलोग्राम सोना (₹12 करोड़ से अधिक मूल्य) की बरामदगी माओवादी तंत्र के आर्थिक आधार के कमजोर होने का स्पष्ट संकेत है. डंप रिकवरी में ऐतिहासिक उपलब्धि- नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास में एक ही महीने की अवधि में इतनी बड़ी नकदी और सोने की बरामदगी एक महत्वपूर्ण कीर्तिमान है.
उधर, राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA ने नक्सल- विरोधी अभियान में नक्सली अर्थ तंत्र को पूरी तरीके से खत्म करने के लिए एक समर्पित विभाग की स्थापना की है, जिसने 108 मामलों की जांच की और 87 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए, जिससे त्वरित अभियोजन के ज़रिए नक्सलवादी संगठनात्मक संरचना को काफी कमजोर कर दिया गया, इसके साथी शहरों में रह रहे नक्सलियों के मददगारों के अर्थतंत्र को भी पूरी तरीके से एनआईए ने ध्वस्त किया है.

300 से ज्यादा स्मारकों पर एक्शन
ग्राउंड पर जाकर के हमने तमाम लोकेशन पर देखा है कि अबूझमाड़ के जंगलों में नक्सलियों ने जो अपने नक्सली विचारधारा को पनपनाने के लिए नक्सली ट्रेनिंग सेंटर के पास बड़े-बड़े वैचारिक स्मारक बना रखे थे. इन स्मारकों को सुरक्षा बलों ने बुलडोजर के जरिए ध्वस्त कर दिया है. इन पर बुलडोजर प्रहार ये दिखाता है कि नक्सलियों के दिल और उनके दिमाग पर उनकी विचारधारा को पूरी तरीके से ध्वस्त सरकार के द्वारा किया जा रहा है.
अब तक की जानकारी के मुताबिक ऑपरेशन के जरिए नक्सलियों के 300 से ज्यादा विचारधारा को पुष्पित और प्रज्वलित करने वाले स्मारकों को अबूझमाड़ की घने जंगलों में ध्वस्त किया गया है. देशभर में नक्सलियों की स्मारकों को ध्वस्त करने का एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है. ग्राउंड से जो हमें आंकड़े मिले हैं. उसके मुताबिक, जिसके तहत महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में दोनों राज्यों में मिलाकर अब तक 300 से ज्यादा नक्सली मॉन्यूमेंट्स ध्वस्त किए गए हैं. सबसे ज्यादा कार्रवाई वर्ष 2026 में हुई है, जिसमें छत्तीसगढ़ में 200 और महाराष्ट्र में 100 से ज्यादा नक्सली स्मारकों (मॉन्यूमेंट्स) तोड़े गए.

हथियार, उनके डंप तथा IED भारी मात्रा में पकड़े गए... नक्सली इलाके के रिपोर्टिंग के दौरान हमने देखा कि किस तरीके से नक्सलियों ने अलग-अलग पहाड़ी इलाकों की गुफाओं में भारी मात्रा में आईईडी रॉकेट लांचर बनाने की फैक्ट्रियां बंदूक बनाने के लिए देसी स्टाइल मशीन की लगा रखी थी, जिनको की अब लगातार सुरक्षा बल नष्ट कर रहे हैं. आंकड़ों की अगर बात करें तो वर्ष 2024 से 2026 की अवधि के दौरान नक्सलवादियों के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए नक्सलियों के डंप ढूंढने के अभियानों में बड़ी सफलता हासिल हुई है.
इस दौरान नक्सलियों के कब्जे से भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए हैं. वर्ष 2024–26 की अवधि में नक्सलियों के कब्जे से AK-47, SLR, INSAS, .303 राइफल और BGL लॉन्चर सहित कुल 1031 हथियार बरामद किए गए.
दूसरी ओर इस अवधि में नक्सलियों ने सुरक्षा बलों का एक भी हथियार लूटने में सफल नहीं हो सके जो सुरक्षा बलों की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. नक्सलियों द्वारा जंगल और पहाड़ी इलाकों में लगाए गए IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) को खोजने और निष्क्रिय करने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है.
इस विशेष अभियान के तहत वर्ष 2025 में सबसे अधिक 894 IED बरामद और निष्क्रिय किए गए.
निष्कर्षइन अभियानों से साफ है कि सुरक्षा बलों का नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन लगातार सफल रहा है, हथियारों की बरामदगी बढ़ी है और IED निष्क्रिय करने में भी बड़ी सफलता मिली है, जबकि नक्सलियों सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने में काफी हद तक नाकाम रहे हैं.
20 अलग-अलग टीमें तैनात
यही नहीं आजतक को एक्सक्लूसिव जानकारी गृह मंत्रालय से मिली है कि नक्सली इलाके में नक्सलियों के विस्फोटकों, जिनको की गुफाओं में छुपा रखा है, उसके लिए अलग-अलग सिक्योरिटी फोर्सज की विशेष 20 से अधिक टीमें अलग-अलग राज्यों के लिए तैयार की गई है, इन टीमों में बमनिरोधक दस्ते के साथ-साथ आधुनिक विस्फोटक ढूंढने की तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है तो वहीं डॉग स्क्वायड टीम, जिसमें बेल्जियम मेलानॉइस किस्म के डॉग के साथ-साथ देसी मोहदुल डॉग को भी IED विस्फोटक ढूंढने में किया जा रहा है. मकसद ये है कि ऑपरेशन द एंड के तहत पूरी तरीके से नक्सली इलाके को हथियार और विस्फोटक से मुक्त करना है.
बस्तर में ऐतिहासिक परिवर्तन
नक्सलियों के कल पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुंदर राज पी पिछले कई सालों से नक्सली इलाके में तैनात हैं और एक बहुत बड़ा श्रेय इनको नक्सली मुक्त भारत में दिया जाएगा. आजतक से बातचीत में उन्होंने कहा कि मिशन 2026 के तहत बस्तर आज एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है. लंबे समय तक हिंसा और भय के साये में रहा ये क्षेत्र अब शांति, विश्वास और विकास की नई दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है. सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन और बस्तर की जनता के संयुक्त संकल्प ने नक्सल-मुक्त बस्तर के लक्ष्य को लगभग साकार कर दिया है.
अब बस्तर स्थायी शांति, प्रगति और जनविश्वास के एक नए अध्याय की ओर आत्मविश्वास के साथ अग्रसर है.