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इस IFS को जबरन रिटायर किया गया, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी, जानें क्या है मामला

भ्रष्टाचार के आरोपों में निलंबित ओडिशा के आईएफएस अफसर अभय कांत पाठक के रिटायरमेंट को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को मंजूरी दे दी. ओडिशा सरकार की तरफ से उनके रिटायरमेंट की सिफारिश की गई थी.

IFS अफसर अभय कांत पाठक (फाइल फोटो) IFS अफसर अभय कांत पाठक (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • IFS अफसर अभय कांत पाठक को रिटायर किया
  • भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद से वो निलंबित थे

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को 1987 बैच के इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS) के ऑफिसर अभय कांत पाठक के रिटायरमेंट को मंजूरी दे दी है. ओडिशा की नवीन पटनायक सरकार की तरफ से अभय कांत पाठक के रिटायरमेंट की बार-बार सिफारिश की जा रही थी. ओडिशा सरकार की सिफारिश के करीब 4 महीने से ज्यादा बीत जाने के बाद राष्ट्रपति ने पाठक के रिटायरमेंट को मंजूरी दी है. 

अभय कांत पाठक भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद से ही निलंबित हैं. अभय कांत पाठक अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, योजना, कार्यक्रम और वनीकरण के रूप में कार्य करते थे. पाठक और उनके बेटे आकाश को पिछले साल 27 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था. उन पर 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की धनराशि गलत तरीके से लेने के आरोप हैं.

आरोप है कि अभय कांत पाठक ने अपने बेटे आकाश पाठक के बैंक खातों में अपनी अघोषित संपत्ति का नकद जमा कर रहे थे और अपने बेटे को टाटा मोटर्स के फर्जी एमडी के रूप में धोखाधड़ी करने में मदद कर रहे थे. 

बताया जा रहा है कि भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद नवंबर 2020 से ही वो क्राइम ब्रांच की हिरासत में हैं. पिछले साल दिसंबर में ओडिशा सरकार ने केंद्र सरकार से अभय कांत पाठक को जबरन रिटायर करने की सिफारिश की थी. ये पहली बार था कि भ्रष्टाचार के आधार पर ओडिशा सरकार ने एक IFS अधिकारी के अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए सिफारिश की थी. 

 

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